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Panchkula News: पंजाब में 1500 करोड़ निवेश करना चाहता है जापान का जीएनजे ग्रुप
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चंडीगढ़। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने वीरवार को जापान की मल्टी नेशनल कंपनी ग्लोबल नेटवर्क जापान (जीएनजे) ग्रुप को धान के अवशेष प्रबंधन के लिए सूबे में निवेश करने के लिए पूर्ण समर्थन और सहयोग का भरोसा दिया है। कंपनी सूबे में 1500 करोड़ रुपये का निवेश करना चाहती है। जीएनजे ग्रुप के प्रतिनिधिमंडल ने वीरवार को सीएम भगवंत मान से मुलाकात की जिसमें सायतो मासाहीको, नोबूटोकी इतो, ताकेशी इशीगुरो, हितोशी कोनागानो, रोहित बख्शी, मनप्रीत सिंह और अन्य शामिल थे।
मुख्यमंत्री ने भारत के वातावरण और ग्रामीण विकास के लक्ष्यों को प्राप्त करने में सहायता देने के लिए जीएनजे ग्रुप की वचनबद्धता की सराहना की। उन्होंने कहा कि यह जानकर बड़ी खुशी हुई कि कंपनी वेस्टेज से ऊर्जा बुनियादी ढांचे के विकास में लगभग 1,500 करोड़ रुपये का निवेश करने की योजना बना रही है और इस लाभदायक प्रोजेक्ट को लागू करने के लिए मुख्य तौर पर पंजाब को चुना गया है। इस पहल का उद्देश्य धान के अवशेष के सुचारु प्रबंधन के साथ-साथ एक साफ-सुथरा, हरा-भरा और खुशहाल भविष्य सृजित करना भी है।
मुख्यमंत्री ने कंपनी के इस अहम संभावित सहयोग के लिए किए जा रहे प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में गठजोड़ की बहुत संभावनाएं हैं और सूबा सरकार इस नेक कार्य के लिए कंपनी काे पूरा समर्थन करने के लिए हमेशा तैयार है। धान की पराली जलाना सूबा सरकार के सामने बड़ी चुनौतियों में से एक है और इसी कारण जापानी व्यापारिक कंपनी के साथ रणनीतिक गठजोड़ समय की मांग है।
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मुख्यमंत्री ने कहा कि धान की पराली जलाने से वातावरण प्रदूषण के साथ-साथ मानव स्वास्थ्य को भी भारी नुकसान होता है इसलिए सूबा सरकार इस मसले का स्थायी हल चाहती है। धान की पराली जलाने से मिट्टी के कई सूक्ष्म पोषक तत्व भी नष्ट हो जाते हैं जिसके कारण किसानों को फसलों के लिए खाद और अन्य चीजें इस्तेमाल करनी पड़ती हैं, जिससे लागत बढ़ती है।
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मुख्यमंत्री ने भारत के वातावरण और ग्रामीण विकास के लक्ष्यों को प्राप्त करने में सहायता देने के लिए जीएनजे ग्रुप की वचनबद्धता की सराहना की। उन्होंने कहा कि यह जानकर बड़ी खुशी हुई कि कंपनी वेस्टेज से ऊर्जा बुनियादी ढांचे के विकास में लगभग 1,500 करोड़ रुपये का निवेश करने की योजना बना रही है और इस लाभदायक प्रोजेक्ट को लागू करने के लिए मुख्य तौर पर पंजाब को चुना गया है। इस पहल का उद्देश्य धान के अवशेष के सुचारु प्रबंधन के साथ-साथ एक साफ-सुथरा, हरा-भरा और खुशहाल भविष्य सृजित करना भी है।
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मुख्यमंत्री ने कंपनी के इस अहम संभावित सहयोग के लिए किए जा रहे प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में गठजोड़ की बहुत संभावनाएं हैं और सूबा सरकार इस नेक कार्य के लिए कंपनी काे पूरा समर्थन करने के लिए हमेशा तैयार है। धान की पराली जलाना सूबा सरकार के सामने बड़ी चुनौतियों में से एक है और इसी कारण जापानी व्यापारिक कंपनी के साथ रणनीतिक गठजोड़ समय की मांग है।
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मुख्यमंत्री ने कहा कि धान की पराली जलाने से वातावरण प्रदूषण के साथ-साथ मानव स्वास्थ्य को भी भारी नुकसान होता है इसलिए सूबा सरकार इस मसले का स्थायी हल चाहती है। धान की पराली जलाने से मिट्टी के कई सूक्ष्म पोषक तत्व भी नष्ट हो जाते हैं जिसके कारण किसानों को फसलों के लिए खाद और अन्य चीजें इस्तेमाल करनी पड़ती हैं, जिससे लागत बढ़ती है।