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बाल कैदियों की रिहाई के लिए याचिका पहुंची हाईकोर्ट
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चंडीगढ़। कोरोना की तीसरी लहर को बच्चों के लिए घातक बताते हुए हरियाणा में स्पेशल होम में रह रहे बाल कैदियों की अस्थाई रिहाई के लिए आदेश जारी करने की अपील करते हुए पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में जनहित याचिका दाखिल की गई है।
पंचकूला के गैर सरकारी संगठन लीगल अवेयरनेस एंड फ्री लीगल एड वुमन सोसाइटी ने याचिका दाखिल करते हुए बताया कि वर्तमान में देश ही नहीं पूरी दुनिया कोरोना के प्रकोप का सामना कर रही है। कोरोना की दूसरी लहर का प्रकोप पहली लहर से कहीं अधिक है और अभी तीसरी लहर की तैयारी है। विशेषज्ञों के अनुसार तीसरी लहर बच्चों के लिए घातक सिद्घ होने वाली है। याची ने कहा कि बाल कैदियों को कोरोना से बचाना बेहद जरूरी है और स्पेशल होम में ऐसा हो पाना संभव नहीं है। हाईकोर्ट कोरोना केप्रकोप के चलते पहले ही कई कैदियों की रिहाई का आदेश दे चुका है और साथ ही यह भी कह चुका है कि छोटे अपराधों में जहां गिरफ्तारी आवश्यक न हो वहां गिरफ्तारी न की जाए।
बच्चों की देखभाल, संरक्षण और कल्याण सुनिश्चित करने के लिए उनकी अस्थाई रिहाई जरूरी है, लेकिन सरकार बच्चों की रिहाई के बारे में कोई कदम नहीं उठा रही। याची ने बताया कि बीते दिनों केंद्र सरकार ने ट्वीट किया कि कोरोना बच्चों को प्रभावित नहीं करेगा जो बिलकुल गलत है। विशेषज्ञों और वायरोलॉजिस्ट ने चेताया है कि कोरोना की तीसरी लहर सबसे ज्यादा बच्चों को प्रभावित करेगी। याची ने कहा कि अभी से केंद्र व राज्य सरकार को इस तीसरी लहर से निपटने का रास्ता ढूंढने की जरूरत है। याची ने हाईकोर्ट से अपील की कि इस मामले में दखल देकर राज्य सरकार को उचित निर्देश जारी किए जाएं ताकि बच्चों के कीमती जीवन को बचाया जा सके। हाईकोर्ट इस याचिका पर जल्द सुनवाई करेगा।
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पंचकूला के गैर सरकारी संगठन लीगल अवेयरनेस एंड फ्री लीगल एड वुमन सोसाइटी ने याचिका दाखिल करते हुए बताया कि वर्तमान में देश ही नहीं पूरी दुनिया कोरोना के प्रकोप का सामना कर रही है। कोरोना की दूसरी लहर का प्रकोप पहली लहर से कहीं अधिक है और अभी तीसरी लहर की तैयारी है। विशेषज्ञों के अनुसार तीसरी लहर बच्चों के लिए घातक सिद्घ होने वाली है। याची ने कहा कि बाल कैदियों को कोरोना से बचाना बेहद जरूरी है और स्पेशल होम में ऐसा हो पाना संभव नहीं है। हाईकोर्ट कोरोना केप्रकोप के चलते पहले ही कई कैदियों की रिहाई का आदेश दे चुका है और साथ ही यह भी कह चुका है कि छोटे अपराधों में जहां गिरफ्तारी आवश्यक न हो वहां गिरफ्तारी न की जाए।
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बच्चों की देखभाल, संरक्षण और कल्याण सुनिश्चित करने के लिए उनकी अस्थाई रिहाई जरूरी है, लेकिन सरकार बच्चों की रिहाई के बारे में कोई कदम नहीं उठा रही। याची ने बताया कि बीते दिनों केंद्र सरकार ने ट्वीट किया कि कोरोना बच्चों को प्रभावित नहीं करेगा जो बिलकुल गलत है। विशेषज्ञों और वायरोलॉजिस्ट ने चेताया है कि कोरोना की तीसरी लहर सबसे ज्यादा बच्चों को प्रभावित करेगी। याची ने कहा कि अभी से केंद्र व राज्य सरकार को इस तीसरी लहर से निपटने का रास्ता ढूंढने की जरूरत है। याची ने हाईकोर्ट से अपील की कि इस मामले में दखल देकर राज्य सरकार को उचित निर्देश जारी किए जाएं ताकि बच्चों के कीमती जीवन को बचाया जा सके। हाईकोर्ट इस याचिका पर जल्द सुनवाई करेगा।
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