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निर्देश : पराली न जलाने वाले किसानों को सरकार देगी 1000 रुपये, कृषि विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव ने वीडियो कांफ्रेंसिंग से उपायुक्त के साथ की मीटिंग
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पंचकूला। कृषि विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव सुमिता मिश्रा ने मंगलवार को चंडीगढ़ से वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से उपायुक्त और उप कृषि निदेशक से पराली न जलाने को लेकर चर्चा की। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य किसानों को पराली न जलाने को लेकर जागरूक करना है, ताकि किसान पराली को जलाने की जगह बेचकर अपनी आय में वृद्धि कर सकें। उपायुक्त विनय प्रताप सिंह ने जिले के बागवानी, कृषि, एमएसएमई विभाग के अधिकारियों को बताया कि जो किसान पराली नहीं जलाएंगे उन्हें सरकार की तरफ से प्रति एकड़ के हिसाब से 1000 रुपये इंसेंटिव के रूप में दिया जाएगा।
उन्होंने कहा की किसानों को पराली न जलाने के लिए अधिक से अधिक जागरूक करें, क्योंकि इससे किसानों को अतिरिक्त आय प्राप्त होगी और पराली जलाने से होने वाले प्रदूषण से भी बचा जा सकेगा। अतिरिक्त उपायुक्त मोहम्मद इमरान रजा ने बताया कि ‘मेरी फसल-मेरा ब्योरा‘ के अंतर्गत जो किसान धान के अलावा कम पानी वाली फसलों की खेती करें, जैसे-मक्की, दालें, तिल्हन व बागवानी। इस पर सरकार उन्हें सात हजार रुपये प्रति एकड़ के हिसाब से इंसेंटिव देगी। इस योजना के तहत किसानों को पहली किश्त दो हजार रुपये और दूसरी किश्त जब फसल तैयार होकर मंडी में जाएगी, उसकी वेरिफिकेशन करके ऐसे किसानों को सात हजार रुपये प्रति एकड़ के हिसाब से दिया जाएगा।
उन्होंने बताया कि किसानों द्वारा पराली को न जलाकर उन्हें बाहर निकल कर गांठों के रूप में छोटे कार्ड बोर्ड उद्योगों को बेचने से किसानों की आय में भी इजाफा होगा और पराली जलने से होने वाले प्रदूषण से भी बचा जा सकेगा। इस अवसर पर बैठक में जिला बागवानी अधिकारी अशोक कौशिक, एएससीओ राहुल बरकोदिया, डीएससीओ रमेश कुमार, पंचकूला प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी विरेंद्र पुनिया, एमएसएमई के उप निदेशक रितुल सिंगला, जिला शिक्षा अधिकारी उर्मिला देवी सहित अन्य संबंधित अधिकारी भी उपस्थित थे।
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उन्होंने कहा की किसानों को पराली न जलाने के लिए अधिक से अधिक जागरूक करें, क्योंकि इससे किसानों को अतिरिक्त आय प्राप्त होगी और पराली जलाने से होने वाले प्रदूषण से भी बचा जा सकेगा। अतिरिक्त उपायुक्त मोहम्मद इमरान रजा ने बताया कि ‘मेरी फसल-मेरा ब्योरा‘ के अंतर्गत जो किसान धान के अलावा कम पानी वाली फसलों की खेती करें, जैसे-मक्की, दालें, तिल्हन व बागवानी। इस पर सरकार उन्हें सात हजार रुपये प्रति एकड़ के हिसाब से इंसेंटिव देगी। इस योजना के तहत किसानों को पहली किश्त दो हजार रुपये और दूसरी किश्त जब फसल तैयार होकर मंडी में जाएगी, उसकी वेरिफिकेशन करके ऐसे किसानों को सात हजार रुपये प्रति एकड़ के हिसाब से दिया जाएगा।
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उन्होंने बताया कि किसानों द्वारा पराली को न जलाकर उन्हें बाहर निकल कर गांठों के रूप में छोटे कार्ड बोर्ड उद्योगों को बेचने से किसानों की आय में भी इजाफा होगा और पराली जलने से होने वाले प्रदूषण से भी बचा जा सकेगा। इस अवसर पर बैठक में जिला बागवानी अधिकारी अशोक कौशिक, एएससीओ राहुल बरकोदिया, डीएससीओ रमेश कुमार, पंचकूला प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी विरेंद्र पुनिया, एमएसएमई के उप निदेशक रितुल सिंगला, जिला शिक्षा अधिकारी उर्मिला देवी सहित अन्य संबंधित अधिकारी भी उपस्थित थे।
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