फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Chandigarh ›   Panchkula News ›   Information mismatch in two software of HSVP, people are getting crushed

Panchkula News: एचएसवीपी के दो सॉफ्टवेयर में जानकारी मिसमैच, पिस रहे लोग

Wed, 23 Nov 2022 07:30 AM IST
Panchkula Bureau पंचकुला ब्‍यूरो
Updated Wed, 23 Nov 2022 07:30 AM IST
विज्ञापन
Information mismatch in two software of HSVP, people are getting crushed
पंचकूला। हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण के दो सॉफ्टवेयरों में जानकारी मिस मैच होने के कारण शहर के लोगों के सामने कई प्रकार की दिक्कतें आ रही हैं। ये दोनों ही सॉफ्टवेयर एचएसवीपी के हैं। इससे लोग स्टिल्ट प्लस 4 भवन का निर्माण पूरा होने के बाद उसका अधिभोग प्रमाण पत्र नहीं ले पा रहे हैं। इस सर्टिफिकेट के बगैर न तो भवन को प्रयोग किया जा सकता है और न ही उसे बेचा या ट्रांसफर किया जा सकता है।
विज्ञापन

एचएसवीपी ने पॉलिसी बनाई है कि किसी भी प्लॉट में अगर स्टिल्ट प्लस 4 मंजिला भवन का निर्माण किया जाता है तो सभी फ्लोर की अलग-अलग अलॉटमेंट हो जाती है। भवन मालिक अपने किसी भी फ्लोर को बेच या उसके नाम ट्रांसफर कर सकता है। मगर प्राधिकरण के दो सॉफ्टवेयर पीपीएम व ओएबीपी की तकनीकी दिक्कतों के कारण इस पॉलिसी का लाभ लोग नहीं ले पा रहे हैं। जब भी कोई स्टिल्ट प्लस चार मंजिला भवन बनाता है तो उसे ओएबीपी (ऑनलाइन अप्रूवल ऑफ बिल्डिंग प्लान) सॉफ्टवेयर में नक्शा पास करवाना पड़ता है। उसमें भवन को स्टिल्ट फ्लोर, फर्स्ट फ्लोर, सेकेंड फ्लोर, थर्ड फ्लोर और फोर्थ फ्लोर दर्शाया जाता है।
विज्ञापन

मगर जब पीपीएम (प्लॉट एंड प्रॉपर्टी मैनेजमेंट ) सॉफ्टवेयर में प्लॉटों को विभाजित किया जाता है तो पहली मंजिल को ग्राउंड फ्लोर, दूसरी मंजिल को फर्स्ट फ्लोर, तीसरी को सेकेंड फ्लोर और चौथी मंजिल को थर्ड फ्लोर दर्शाया जाता है। इसमें चौथी मंजिल को दर्शाया ही नहीं जाता है। जब भवन का निर्माण कार्य पूरा होने के बाद उनका अलग-अलग रजिस्ट्रेशन कराने जाते हैं तो दोनों सॉफ्टवेयर में जानकारी अलग-अलग होने के कारण फाइल ही रिजेक्ट हो जाती है। शहर में करीब 200 से 300 स्टिल्ट प्लस चार मंजिला भवन बने हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

न बेच पाते हैं, न ट्रांसफर कर सकते हैं
दोनों सॉफ्टवेयर में फ्लोर की अलग-अलग पहचान होने के कारण प्राधिकरण की ओर से उनकी अलग-अलग ऑक्यूपेशन सर्टिफिकेट जारी नहीं हो पाता है। पूरा भवन एक व्यक्ति का होता है तो उसका ऑक्यूपेशन सर्टिफिकेट जारी कर दिया जाता है। मगर जब किसी एक फ्लोर को बेचा या ट्रांसफर किया जाता है तो उसकी पहचान दोनों सॉफ्टवेयर में अलग-अलग हो जाती है। इससे फाइल रिजेक्ट हो जाती है।
छह महीने पहले लगाई फाइल, आज तक समाधान नहीं
सेक्टर-6 निवासी अनुज अग्रवाल ने बताया कि तीन पार्टनर ने मिलकर सेक्टर-6 में एक स्टिल्ट प्लस चार मंजिला भवन बनाया। सभी फ्लोर के अलग-अलग रजिस्ट्रेशन के लिए छह महीने पहले फाइल लगाई थी। दोनों सॉफ्टवेयर में फ्लोर की अलग-अलग पहचान होने के कारण फाइल रिजेक्ट हो गई। अब छह महीने से प्रयास कर रहे हैं कि किसी तरह से चारों मंजिल का अलग-अलग रजिस्ट्रेशन होने के बाद ऑक्यूपेशन सर्टिफिकेट मिल जाए, ताकि रहने के लिए उसका प्रयोग कर सकें।

इस परेशानी के संबंध में उच्चाधिकारियों को अवगत कराया गया है। उम्मीद है कि बहुत जल्द इस समस्या का समाधान हो जाएगा और लोगों को परेशानी से निजात मिल जाएगी। - गगनदीप सिंह, इस्टेट ऑफिसर पंचकूला, एचएसवीपी
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed