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Panchkula News: भारतीय हथियारबंद सेनाएं जंग पसंद नहीं करतीं लेकिन वे युद्धों से झिझकती भी नहीं - वीसी

Wed, 29 Oct 2025 12:26 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Wed, 29 Oct 2025 12:26 AM IST
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Indian Armed Forces do not like war but they do not shy away from wars either - VC
अमर उजाला ब्यूरो
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पटियाला। पंजाबी यूनिवर्सिटी में सुरक्षा और युद्ध नीति अध्ययन विभाग की ओर से 1965 के भारत-पाक युद्ध की सिल्वर जुबली को समर्पित एक राष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन किया गया।
यह सेमिनार ज्ञान सेतु थिंक टैंक और मिलिट्री लिटरेचर फेस्टिवल एसोसिएशन के सहयोग से कराया गया। सेमिनार के दौरान जाने-माने फौजी सैनिकों, रणनीतिक माहिरों, विद्वानों और शिक्षा शास्त्रियों ने भारत के रणनीतिक कदमों को दिशा व आकार देने वाले युद्ध के संचालन, भू राजनीतिक और कूटनीतिक पहलुओं पर विचार-चर्चा की।
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उद्घाटन सेशन में मुख्य मेहमान जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ, वेस्टर्न कमांड, लेफ्टिनेंट जनरल मनोज कुमार कटियार, पीवीएसएम, यूवाईएस, एम, एवीएसएम मौजूद रहे। उन्होंने अपने संबोधन में 1965 के युद्ध से लिए गए रणनीतिक सबक और भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा ढांचे के लिए उनकी स्थायी प्रासंगिकता के अलग-अलग पहलुओं पर चर्चा की। वाइस-चांसलर डॉ. जगदीप सिंह ने सेमिनार की अध्यक्षता करते हुए युवा पीढ़ी में आलोचनात्मक समझ को बढ़ावा देने के लिए फौजी इतिहास का अध्ययन करने के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारतीय हथियारबंद सेनाएं जंग को पसंद नहीं करती लेकिन वे युद्धों से झिझकते भी नहीं हैं।
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लेफ्टिनेंट जनरल टीएस शेरगिल, पीवीएसएम, पीएचडी (रिटायर्ड), चेयरमैन, मिलिट्री लिटरेचर फेस्टिवल एसोसिएशन ने 1965 के युद्ध के बारे में जानकारी दी। सेमिनार में 1965 का भारत-पाक युद्ध: घटनाक्रम, योजनाएं और संचालन विषय पर कराए अकादमिक सत्र की अध्यक्षता लेफ्टिनेंट जनरल (डॉ.) केजे सिंह, पीवीएसएम, एवीएसएम और बार (सेवानिवृत्त) ने की।

इस अकादमिक सत्र के मुख्य वक्ताओं में लेफ्टिनेंट जनरल एनपीएस हीरा, पीवीएसएम, एवीएसएम, वीएसएम, पीएचडी (सेवानिवृत्त) शामिल थे, जिन्होंने 1965 के भारत-पाक युद्ध के छिड़ने तक की घटनाओं पर एक प्रस्तुति दी। यह सेमिनार 1965 के भारत-पाक युद्ध के दौरान दिखाई गई बहादुरी और रणनीतिक प्रतिभा को एक सही श्रद्धांजलि के तौर पर पेश किया गया।
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