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दाखिले के बाद बढ़ाई फीस, यूनिवर्सिटी और हरियाणा सरकार को नोटिस
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चंडीगढ़। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने लाला लाजपत राय यूनिवर्सिटी ऑफ वेटनेरी साइंस के बेचलर ऑफ वेटरनरी साइंस पाठ्यक्रम में दाखिल के बाद फीस बढ़ाने के विरोध में दाखिल याचिका पर यूनिवर्सिटी, रोहतक के इंटरनेशनल इंस्टीटियूट ऑफ वेटरनरी एजुकेशन एंड रिसर्च व हरियाणा सरकार को नोटिस जारी कर जवाब तलब कर लिया है।
यूनिवर्सिटी के 73 छात्रों ने एडवोकेट प्रद्युमन गर्ग के माध्यम से दायर याचिका में छात्रों ने हाईकोर्ट को बताया है कि गत वर्ष यूनिवर्सिटी ने पाठ्यक्रम के लिए स्टेट कोटे की फीस 4 लाख 650 रुपये और मैनेजमेंट कोटे की फीस 5 लाख 93 हजार 150 रुपये तय की थी। याचिकाकर्ता छात्रों ने गत वर्ष सितंबर में नीट की परीक्षा दी और 15 दिसंबर को पहली काउंसलिंग हुई। इसके बाद छात्रों का जब चयन हुआ तो 1 मार्च को स्टेट कोटे की फीस 4 लाख 650 रुपये से बढ़ाकर 5 लाख 25 हजार 670 रुपये और मैनेजमेंट कोटे की फीस 7 लाख 74 हजार 270 रुपये कर दी। याची पक्ष ने कहा कि जब तक आदेश जारी किए तब तक सभी कॉलेजों में दाखिले बंद हो चुके थे, जिसके चलते मजबूरी में उन्हें फीस जमा करवानी पड़ी। याची छात्रों ने बाद में मांगपत्र देकर अतिरिक्त फीस वापिस करने की यूनिवर्सिटी से मांग की लेकिन उन्हें साफ धमकी दी गई कि ऐसी मांग करने पर दाखिला नहीं होने दिया जाएगा। अब छात्रों ने हाईकोर्ट की शरण लेकर कहा है कि एक बार प्रोस्पेक्ट जारी होने के बाद छात्रों की फीस बढ़ाना गलत और अन्याय है। छात्रों ने फीस बढ़ोत्तरी के आदेश को खारिज करने की तथा छात्रों द्वारा दी गई अतिरिक्त फीस वापिस दिलवाने की हाईकोर्ट से अपील की है।
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यूनिवर्सिटी के 73 छात्रों ने एडवोकेट प्रद्युमन गर्ग के माध्यम से दायर याचिका में छात्रों ने हाईकोर्ट को बताया है कि गत वर्ष यूनिवर्सिटी ने पाठ्यक्रम के लिए स्टेट कोटे की फीस 4 लाख 650 रुपये और मैनेजमेंट कोटे की फीस 5 लाख 93 हजार 150 रुपये तय की थी। याचिकाकर्ता छात्रों ने गत वर्ष सितंबर में नीट की परीक्षा दी और 15 दिसंबर को पहली काउंसलिंग हुई। इसके बाद छात्रों का जब चयन हुआ तो 1 मार्च को स्टेट कोटे की फीस 4 लाख 650 रुपये से बढ़ाकर 5 लाख 25 हजार 670 रुपये और मैनेजमेंट कोटे की फीस 7 लाख 74 हजार 270 रुपये कर दी। याची पक्ष ने कहा कि जब तक आदेश जारी किए तब तक सभी कॉलेजों में दाखिले बंद हो चुके थे, जिसके चलते मजबूरी में उन्हें फीस जमा करवानी पड़ी। याची छात्रों ने बाद में मांगपत्र देकर अतिरिक्त फीस वापिस करने की यूनिवर्सिटी से मांग की लेकिन उन्हें साफ धमकी दी गई कि ऐसी मांग करने पर दाखिला नहीं होने दिया जाएगा। अब छात्रों ने हाईकोर्ट की शरण लेकर कहा है कि एक बार प्रोस्पेक्ट जारी होने के बाद छात्रों की फीस बढ़ाना गलत और अन्याय है। छात्रों ने फीस बढ़ोत्तरी के आदेश को खारिज करने की तथा छात्रों द्वारा दी गई अतिरिक्त फीस वापिस दिलवाने की हाईकोर्ट से अपील की है।
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