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Panchkula News: बैंक घोटाला में आईएएस प्रदीप कुमार न्यायिक हिरासत में भेजे गए
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सीबीआई का दावा- जांच में नहीं किया सहयोग, डिजिटल साक्ष्य मिटाने और ठिकाने बदलने के आरोप
संवाद न्यूज एजेंसी
पंचकूला। हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (एचएसपीबी) से जुड़े बहुचर्चित सरकारी धन गबन मामले में गिरफ्तार पूर्व सदस्य सचिव एवं तत्कालीन आईएएस अधिकारी प्रदीप कुमार को अदालत ने न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। दो दिन का सीबीआई रिमांड पूरा होने के बाद वीरवार को उन्हें अदालत में पेश किया गया, जहां से न्यायिक हिरासत के आदेश जारी किए गए।
सीबीआई ने अदालत को बताया कि आरोपी ने जांच में अपेक्षित सहयोग नहीं किया। एजेंसी के अनुसार पूछताछ से बचने के लिए वह लगातार अपने ठिकाने बदलते रहे और उनके खिलाफ एकत्र किए गए साक्ष्य गंभीर आर्थिक अपराध की ओर संकेत करते हैं।
सीबीआई के मुताबिक प्रदीप कुमार 24 जून को जांच में शामिल हुए थे, लेकिन अगले दिन उनका मोबाइल फोन बंद मिला। एजेंसी का आरोप है कि इसके बाद उन्होंने अपनी लोकेशन बदलकर जांच से बचने का प्रयास किया। तकनीकी साक्ष्यों, कॉल डिटेल रिकॉर्ड और स्थानीय सूचनाओं के आधार पर सीबीआई ने 30 जून को नरवाना टोल प्लाजा से उन्हें हिरासत में लिया था, जिसके बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया।
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रिमांड के दौरान आरोपी को डिजिटल और दस्तावेजी साक्ष्यों से सामना कराया गया। उनसे आईडीएफसी फर्स्ट बैंक में खाते खुलवाने, सरकारी अधिशेष धनराशि के निवेश, अधीनस्थ अधिकारियों को दिए गए निर्देश, नोटशीट में कथित बदलाव, सह-आरोपियों से संपर्क, संदिग्ध भुगतान और निजी सहायक के माध्यम से कथित लाभ लेने जैसे मुद्दों पर पूछताछ की गई।
सीबीआई ने अदालत को यह भी बताया कि पूछताछ के दौरान आरोपी संतोषजनक जवाब नहीं दे सके और महत्वपूर्ण जानकारियां छिपाईं। एजेंसी का दावा है कि उनके मोबाइल फोन से मामले से जुड़े कुछ डिजिटल साक्ष्य भी हटाए गए हैं।
सीबीआई ने आशंका जताई कि रिहा होने पर आरोपी गवाहों को प्रभावित कर सकते हैं और अन्य आरोपियों को साक्ष्य नष्ट करने के लिए प्रेरित कर सकते हैं। इसके बाद अदालत ने उन्हें न्यायिक हिरासत में भेजने के आदेश दिए।
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संवाद न्यूज एजेंसी
पंचकूला। हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (एचएसपीबी) से जुड़े बहुचर्चित सरकारी धन गबन मामले में गिरफ्तार पूर्व सदस्य सचिव एवं तत्कालीन आईएएस अधिकारी प्रदीप कुमार को अदालत ने न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। दो दिन का सीबीआई रिमांड पूरा होने के बाद वीरवार को उन्हें अदालत में पेश किया गया, जहां से न्यायिक हिरासत के आदेश जारी किए गए।
सीबीआई ने अदालत को बताया कि आरोपी ने जांच में अपेक्षित सहयोग नहीं किया। एजेंसी के अनुसार पूछताछ से बचने के लिए वह लगातार अपने ठिकाने बदलते रहे और उनके खिलाफ एकत्र किए गए साक्ष्य गंभीर आर्थिक अपराध की ओर संकेत करते हैं।
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सीबीआई के मुताबिक प्रदीप कुमार 24 जून को जांच में शामिल हुए थे, लेकिन अगले दिन उनका मोबाइल फोन बंद मिला। एजेंसी का आरोप है कि इसके बाद उन्होंने अपनी लोकेशन बदलकर जांच से बचने का प्रयास किया। तकनीकी साक्ष्यों, कॉल डिटेल रिकॉर्ड और स्थानीय सूचनाओं के आधार पर सीबीआई ने 30 जून को नरवाना टोल प्लाजा से उन्हें हिरासत में लिया था, जिसके बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया।
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रिमांड के दौरान आरोपी को डिजिटल और दस्तावेजी साक्ष्यों से सामना कराया गया। उनसे आईडीएफसी फर्स्ट बैंक में खाते खुलवाने, सरकारी अधिशेष धनराशि के निवेश, अधीनस्थ अधिकारियों को दिए गए निर्देश, नोटशीट में कथित बदलाव, सह-आरोपियों से संपर्क, संदिग्ध भुगतान और निजी सहायक के माध्यम से कथित लाभ लेने जैसे मुद्दों पर पूछताछ की गई।
सीबीआई ने अदालत को यह भी बताया कि पूछताछ के दौरान आरोपी संतोषजनक जवाब नहीं दे सके और महत्वपूर्ण जानकारियां छिपाईं। एजेंसी का दावा है कि उनके मोबाइल फोन से मामले से जुड़े कुछ डिजिटल साक्ष्य भी हटाए गए हैं।
सीबीआई ने आशंका जताई कि रिहा होने पर आरोपी गवाहों को प्रभावित कर सकते हैं और अन्य आरोपियों को साक्ष्य नष्ट करने के लिए प्रेरित कर सकते हैं। इसके बाद अदालत ने उन्हें न्यायिक हिरासत में भेजने के आदेश दिए।