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‘नास्तिक हूं, इसलिए ओबीसी सर्टिफिकेट जारी करने से किया इनकार, मासूम की हाईकोर्ट से गुहार’
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चंडीगढ़। 14 साल के मासूम ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करते हुए कहा कि वह नास्तिक है इसलिए पंजाब सरकार उसे ओबीसी सर्टिफिकेट जारी नहीं कर रही है। याची ने हाईकोर्ट से अपील की कि पंजाब सरकार को याची को ओबीसी प्रमाणपत्र जारी करने का आदेश दिया जाए। याचिका पर जल्द सुनवाई होगी।
याचिका दाखिल करते हुए मोहाली निवासी तेजस दौन ने एडवोकेट एचपीएस ईशर के माध्यम से हाईकोर्ट को बताया कि वह कहार जाति से है और पंजाब में कहार जाति ओबीसी सूची में शामिल है। याची ने बताया कि उसने अपने पिता के माध्यम से मोहाली के सेवा केंद्र से ओबीसी प्रमाणपत्र के लिए आवेदन किया था। उसने आवेदन में धर्म का जिक्र नहीं किया था क्योंकि वह मानवता के अतिरिक्त किसी धर्म में विश्वास नहीं रखता। याची ने बताया कि उसका आवेदन पत्र यूं ही वापस आ गया और प्रमाणपत्र जारी नहीं किया गया। याची ने इसका कारण पूछा तो बताया गया कि सॉफ्टवेयर में जब तक धर्म का कॉलम नहीं भरा जाता तब तक प्रमाणपत्र नहीं बन सकता।
याची ने कहा कि ऐसा करना सीधे तौर पर संविधान के खिलाफ है। संविधान के अनुसार एक ओर हम किसी भी धर्म को चुनने के लिए स्वतंत्र हैं तो वहीं दूसरी ओर किसी भी धर्म को नहीं मानने के लिए भी। याची ने कहा कि कानून के किसी प्रावधान के तहत आवेदनपत्र में धर्म को भरने की अनिवार्यता नहीं है, केवल एक सॉफ्टवेयर के कारण याची को प्रमाणपत्र से इनकार किया गया है। याची ने अपील की कि उसका आवेदन स्वीकार करने और उसे प्रमाणपत्र जारी करने का पंजाब सरकार को निर्देश दिया जाए। हाईकोर्ट की रजिस्ट्री में यह याचिका दाखिल की गई है जिस पर जल्द सुनवाई संभव है।
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याचिका दाखिल करते हुए मोहाली निवासी तेजस दौन ने एडवोकेट एचपीएस ईशर के माध्यम से हाईकोर्ट को बताया कि वह कहार जाति से है और पंजाब में कहार जाति ओबीसी सूची में शामिल है। याची ने बताया कि उसने अपने पिता के माध्यम से मोहाली के सेवा केंद्र से ओबीसी प्रमाणपत्र के लिए आवेदन किया था। उसने आवेदन में धर्म का जिक्र नहीं किया था क्योंकि वह मानवता के अतिरिक्त किसी धर्म में विश्वास नहीं रखता। याची ने बताया कि उसका आवेदन पत्र यूं ही वापस आ गया और प्रमाणपत्र जारी नहीं किया गया। याची ने इसका कारण पूछा तो बताया गया कि सॉफ्टवेयर में जब तक धर्म का कॉलम नहीं भरा जाता तब तक प्रमाणपत्र नहीं बन सकता।
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याची ने कहा कि ऐसा करना सीधे तौर पर संविधान के खिलाफ है। संविधान के अनुसार एक ओर हम किसी भी धर्म को चुनने के लिए स्वतंत्र हैं तो वहीं दूसरी ओर किसी भी धर्म को नहीं मानने के लिए भी। याची ने कहा कि कानून के किसी प्रावधान के तहत आवेदनपत्र में धर्म को भरने की अनिवार्यता नहीं है, केवल एक सॉफ्टवेयर के कारण याची को प्रमाणपत्र से इनकार किया गया है। याची ने अपील की कि उसका आवेदन स्वीकार करने और उसे प्रमाणपत्र जारी करने का पंजाब सरकार को निर्देश दिया जाए। हाईकोर्ट की रजिस्ट्री में यह याचिका दाखिल की गई है जिस पर जल्द सुनवाई संभव है।
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