{"_id":"6a9aeb87d151f57e40007833","slug":"husband-cannot-deprive-wife-of-maintenance-high-court-panchkula-news-c-16-1-pkl1098-1114911-2026-09-04","type":"story","status":"publish","title_hn":"पत्नी को भरण-पोषण से वंचित नहीं कर सकता पति: हाईकोर्ट","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पत्नी को भरण-पोषण से वंचित नहीं कर सकता पति: हाईकोर्ट
विज्ञापन
अलग रहने का उचित कारण साबित न कर सका तो राहत बरकरार
पत्नी और बेटी को पांच-पांच हजार रुपये मासिक देने का आदेश कायम
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। हाईकोर्ट ने कहा कि पति पत्नी को भरण-पोषण से वंचित नहीं कर सकता। यह तब भी लागू होगा जब पत्नी के पास आय का कोई साधन न हो और वह पति से अलग रहने का उचित कारण रखती हो।
अदालत ने बठिंडा परिवार न्यायालय के आदेश को बरकरार रखा है। इस आदेश में पत्नी और बेटी को पांच-पांच हजार रुपये प्रतिमाह भरण-पोषण देने का निर्देश था। यह फैसला जगजीत सिंह की अपील पर सुनाया गया। परिवार न्यायालय ने 15 दिसंबर 2022 को यह आदेश दिया था। भरण-पोषण 18 सितंबर 2015 से देय होगा।
बेटी को उसकी शादी तक और पत्नी को नियमानुसार पात्रता रहने तक यह राशि मिलेगी। पत्नी ने पति पर शादी के बाद कम दहेज लाने को लेकर प्रताड़ित करने का आरोप लगाया था। उसने पति पर शराब व नशीले पदार्थों का सेवन करने और मारपीट करने के आरोप भी लगाए।
विज्ञापन
आरोपों और पति का दावा :
पत्नी ने अदालत में बताया कि विवाद बढ़ने पर उसे बेटी के साथ घर से निकाल दिया गया था। पति ने इन आरोपों को गलत बताते हुए दावा किया कि पत्नी अपनी मर्जी से घर छोड़कर गई थी। उसने कहा कि वह पत्नी और बेटी को वापस अपने साथ रखने और उनका खर्च उठाने के लिए तैयार है। विवाद बढ़ने पर परिवार और पंचायत स्तर पर समझौते के प्रयास हुए थे लेकिन बात नहीं बनी।
हाईकोर्ट का अवलोकन :
हाईकोर्ट ने पाया कि पति यह साबित नहीं कर सका कि पत्नी ने बिना किसी उचित कारण के वैवाहिक घर छोड़ा था। पति ने खुद स्वीकार किया था कि पंचायत के हस्तक्षेप से पत्नी दो बार उसके साथ रह चुकी थी जिससे उनके बीच पहले भी विवाद हुए थे। अदालत ने यह भी पाया कि पत्नी के पास अपना मकान या आय का कोई स्वतंत्र साधन नहीं था। वहीं, पति की आर्थिक स्थिति बेहतर थी। बेटी की गवाही में परिवार के बड़े मकान, एयर कंडीशनर, रेफ्रिजरेटर, कूलर, वाहन और कृषि उपकरण होने की जानकारी सामने आई।
विज्ञापन
पत्नी और बेटी को पांच-पांच हजार रुपये मासिक देने का आदेश कायम
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। हाईकोर्ट ने कहा कि पति पत्नी को भरण-पोषण से वंचित नहीं कर सकता। यह तब भी लागू होगा जब पत्नी के पास आय का कोई साधन न हो और वह पति से अलग रहने का उचित कारण रखती हो।
अदालत ने बठिंडा परिवार न्यायालय के आदेश को बरकरार रखा है। इस आदेश में पत्नी और बेटी को पांच-पांच हजार रुपये प्रतिमाह भरण-पोषण देने का निर्देश था। यह फैसला जगजीत सिंह की अपील पर सुनाया गया। परिवार न्यायालय ने 15 दिसंबर 2022 को यह आदेश दिया था। भरण-पोषण 18 सितंबर 2015 से देय होगा।
विज्ञापन
बेटी को उसकी शादी तक और पत्नी को नियमानुसार पात्रता रहने तक यह राशि मिलेगी। पत्नी ने पति पर शादी के बाद कम दहेज लाने को लेकर प्रताड़ित करने का आरोप लगाया था। उसने पति पर शराब व नशीले पदार्थों का सेवन करने और मारपीट करने के आरोप भी लगाए।
विज्ञापन
आरोपों और पति का दावा :
पत्नी ने अदालत में बताया कि विवाद बढ़ने पर उसे बेटी के साथ घर से निकाल दिया गया था। पति ने इन आरोपों को गलत बताते हुए दावा किया कि पत्नी अपनी मर्जी से घर छोड़कर गई थी। उसने कहा कि वह पत्नी और बेटी को वापस अपने साथ रखने और उनका खर्च उठाने के लिए तैयार है। विवाद बढ़ने पर परिवार और पंचायत स्तर पर समझौते के प्रयास हुए थे लेकिन बात नहीं बनी।
हाईकोर्ट का अवलोकन :
हाईकोर्ट ने पाया कि पति यह साबित नहीं कर सका कि पत्नी ने बिना किसी उचित कारण के वैवाहिक घर छोड़ा था। पति ने खुद स्वीकार किया था कि पंचायत के हस्तक्षेप से पत्नी दो बार उसके साथ रह चुकी थी जिससे उनके बीच पहले भी विवाद हुए थे। अदालत ने यह भी पाया कि पत्नी के पास अपना मकान या आय का कोई स्वतंत्र साधन नहीं था। वहीं, पति की आर्थिक स्थिति बेहतर थी। बेटी की गवाही में परिवार के बड़े मकान, एयर कंडीशनर, रेफ्रिजरेटर, कूलर, वाहन और कृषि उपकरण होने की जानकारी सामने आई।