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पांच साल में सजा पूरी करने वाले कितने विदेशियों को यूटी प्रशासन ने किया डिपोर्ट: हाईकोर्ट

Thu, 18 Jul 2024 06:03 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Thu, 18 Jul 2024 06:03 AM IST
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How many foreigners who have completed their sentence in five years have been deported by UT Administration: High Court
चंडीगढ़। सजा पूरी होने के बावजूद पंजाब की जेलों में मौजूद 48 कैदियों की वतन वापसी न होने पर हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार को फटकार लगाते हुए संबंधित अधिकारी को तलब कर लिया है। साथ ही यूटी प्रशासन से पूछा है कि बीते 5 साल में सजा पूरी कर चुके कितने विदेशी कैदियों को डिपोर्ट किया है और इसके लिए क्या प्रक्रिया अपनाई गई है। इस जानकारी के आधार पर पंजाब की जेलों में मौजूद कैदियों को वापस भेजा जा सके। साथ ही हाईकोर्ट ने हरियाणा, पंजाब व चंडीगढ़ से स्टेटस रिपोर्ट भी तलब की है।हाईकोर्ट के कैदियों को लेकर लिए गए संज्ञान मामले में सुनवाई के दौरान पंजाब सरकार ने हलफनामा देते हुए बताया था कि पंजाब की जेलों में सजा काटने के बाद भी 48 कैदी मौजूद हैं। हाईकोर्ट ने कहा कि हलफनामे के अवलोकन से पता चलता है कि कुछ मामलों में वर्ष 2008 में ही काउंसलर एक्सेस प्रदान किया गया था, लेकिन राष्ट्रीयता की स्थिति सत्यापित नहीं की गई है। जिन मामलों में राष्ट्रीयता सत्यापित की गई है, वहां भी हिरासत में मौजूद व्यक्तियों को डिपोर्ट नहीं किया गया है।
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ऐसा ही एक मामला हाईकोर्ट ने सूची में पाया जिसमें नाइजीरियन को अदालत बरी कर चुकी थी, लेकिन उसे इसलिए डिपोर्ट नहीं किया जा रहा क्योंकि बरी करने के आदेश के खिलाफ अपील लंबित है। ऐसे में हाईकोर्ट ने इस मामले में संबंधित अधिकारी को पेश होने का आदेश दिया है। अधिकारी को बताना होगा कि किन परिस्थितियों में इन लोगों को डिपोर्ट नहीं किया जा सका।
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सुनवाई के दौरान चंडीगढ़ प्रशासन ने बताया कि बुड़ैल जेल में वर्तमान में 18 विदेशी कैदी मौजूद हैं। इनमें से ऐसा कोई नहीं है जो सजा पूरी होने के बावजूद जेल में मौजूद हो। ऐसे में हाईकोर्ट ने अब यूटी प्रशासन से पिछले पांच साल का ब्योरा मांगा है कि कितने विदेशी कैदियों ने सजा पूरी की है और किस प्रक्रिया का उपयोग कर उन्हें डिपोर्ट किया गया है। हाईकोर्ट का विचार था कि इसी प्रक्रिया को अपना कर पंजाब की जेलों में मौजूद विदेशी नागरिकों को सजा पूरी होने के बाद डिपोर्ट किया जा सके। हाईकोर्ट पंजाब, हरियाणा और यूटी चंडीगढ़ की जेलों में बंद विदेशी नागरिकों की दुर्दशा पर लिए गए स्वत: संज्ञान पर सुनवाई कर रहा है। हाईकोर्ट ने विदेश मंत्रालय के सचिव के माध्यम से भारत संघ को भी प्रतिवादी के रूप में शामिल किया।
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