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मरीजों पर मार : सिविल अस्पताल में जेनेरिक की जगह लिखी जा रहीं ब्रांडेड दवाएं

Wed, 17 Dec 2025 01:30 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Wed, 17 Dec 2025 01:30 AM IST
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Hit on patients: Branded medicines are being prescribed instead of generic ones in the Civil Hospital.
दवाओं की किल्लत के कारण मरीज बाहर से महंगी दवाएं खरीदने को मजबूर, एंटीबायोटिक से लेकर आई ड्रॉप तक गायब
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माई सिटी रिपोर्टर
पंचकूला। सेक्टर-6 स्थित सिविल अस्पताल में जेनेरिक दवाएं लिखने और उपलब्ध कराने के स्वास्थ्य विभाग के दावे कागजों तक सीमित हैं। हकीकत यह है कि अस्पताल में दवाओं की कमी के कारण डॉक्टरों ब्रांडेड दवाएं लिख रहे हैं। ऐसे में मरीजों पर आर्थिक मार पड़ रही है। उन्हें बाहर से महंगे दाम पर दवाएं ब्रांडेड दवाएं खरीदनी पड़ रही हैं। इससे इलाज के लिए आने वाले मरीजों की परेशानी बढ़ गई है और जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है।

ओपीडी में मरीज बढ़े, दवाएं घट गईं
सिविल अस्पताल की ओपीडी में रोजाना करीब चार हजार मरीज पहुंच रहे हैं। ठंड बढ़ने के साथ करीब 500 मरीजों बढ़ गए हैं। इनमें सांस, ब्लड प्रेशर, शुगर, हार्ट, टीबी, आंख, नाक-कान-गला से संबंधित मरीजों की संख्या अधिक है। मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं लेकिन उन्हें जनरल दवाओं के अलावा आंखों के ड्रॉप, एंटीबायोटिक और अन्य जरूरी दवाएं नहीं मिल पा रही हैं।
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अंबाला वेयरहाउस से सप्लाई धीमी
अंबाला वेयरहाउस से दवाओं की सप्लाई धीमी होने के कारण स्टॉक समय पर नहीं पहुंच पा रहा है। दवा खत्म होते ही मरीजों को बाहर के प्राइवेट मेडिकल स्टोर से महंगी दवाएं खरीदनी पड़ रही हैं। अस्पताल के दवाखाने और नोटिस बोर्ड पर जेनेरिक दवाएं लिखने के निर्देश होने के बावजूद अमल नहीं हो पा रहा है।
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अस्पताल के जन औषधि केंद्र में भी दवाओं का टोटा
अस्पताल परिसर में पोस्टमार्टम हाउस के पास बने जन औषधि केंद्र में भी सभी बीमारियों की जेनेरिक दवाएं उपलब्ध नहीं हैं। इस कारण मरीजों को सस्ती दवाएं नहीं मिल रही हैं। उन्हें बाहर से इलाज के लिए दवाएं लानी पड़ रही हैं।

लिवर की समस्या में हजार रुपये की दवाएं खरीदीं
मुझे लिवर की समस्या है। अस्पताल में डॉक्टर की लिखीं दवाएं नहीं मिलीं ताे बाहर से खरीदनी पड़ीं। करीब एक हजार रुपये खर्च हो गए। जेनेरिक दवाएं नहीं लिखी गईं। -राजू, निवासी खड़क मंगोली, मरीज


शुगर की दवा बाहर से लानी पड़ी
इलाज के लिए अस्पताल आया था लेकिन शुगर की दवा नहीं मिली। बाहर से महंगी दवाएं खरीदनी पड़ीं।
-एचएस अहमद, निवासी मनीमाजरा, मरीज

बुजुर्ग मां की दवाएं नहीं मिलीं
मां को सांस का इंफेक्शन बताया गया। दो घंटे टोकन लेकर बैठे फिर भी दवाएं नहीं मिलीं। बाहर से खरीदनी पड़ीं।
-सुमित, निवासी विकासनगर, तीमारदार

छाती में दर्द, 500 रुपये की दवा बाहर से ली
ठंड लगने से छाती में दर्द हो रहा है। अस्पताल में दवा नहीं मिली। इसके बाद बाहर मेडिकल स्टोर से खरीदनी पड़ी।
-ताशी मुरुप, निवासी रामगढ़

त्वचा रोग में 600 रुपये खर्च
खारिश की समस्या है। लोशन और इंफेक्शन की दवा भी अस्पताल में नहीं है। यह भी बाहर से खरीदनी पड़ी।
-संगीता, निवासी सेक्टर-20

कोट
अस्पताल में दवाओं की सप्लाई कराई जा रही है। यदि ऐसी स्थिति है तो डॉक्टरों को जेनेरिक दवाएं लिखने के निर्देश जारी किए जाएंगे। जिन दवाओं की कमी है उन्हें जल्द स्टॉक में शामिल किया जाएगा।
-डॉ. आरएस चौहान, पीएमओ, सिविल अस्पताल सेक्टर-6
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