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Panchkula News: रूपनगर में उम्मीदवार का नामांकन रद्द करने पर आरओ के खिलाफ हाईकोर्ट ने कार्रवाई के दिए आदेश
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चंडीगढ़। पंजाब के रूपनगर जिले के एक गांव में पंचायत चुनाव लड़ रहे उम्मीदवार का नामांकन रिटर्निंग ऑफिसर (आरओ) द्वारा बिना किसी वैधानिक नियम के खारिज करने से हैरान पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने राज्य चुनाव आयोग को आरओ के खिलाफ कार्रवाई कर रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है। हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता का नामांकन रद्द करने के आरओ के फैसले पर भी रोक लगा दी है। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि आरओ द्वारा याचिकाकर्ता के नामांकन पत्र खारिज करने के फैसले पर रोक लगाते हुए हमारा मानना है कि आरओ के आचरण की भी राज्य चुनाव आयोग द्वारा निष्पक्ष जांच की जानी चाहिए। इसके अनुसार, राज्य चुनाव आयोग, पंजाब को भी कानून के अनुसार आरओ के खिलाफ उचित कदम उठाने और अपनी रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया जाता है।
जस्टिस विनोद एस भारद्वाज और जस्टिस हरप्रीत बराड़ की खंडपीठ ने रूपनगर जिले के रंगीलपुर ग्राम पंचायत के पूर्व सरपंच सुनील कुमार की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किए हैं। 4 अक्तूबर को याचिकाकर्ता ने आवश्यक वैधानिक शुल्क जमा करके अपना नामांकन पत्र प्रस्तुत किया था। 5 अक्तूबर को जांच की जानी थी, लेकिन जांच का परिणाम घोषित नहीं किया गया। हालांकि, आरओ ने सूचित किया कि याचिकाकर्ता के नामांकन पत्र को वित्त आयुक्त (पंजाब) की ओर से गठित एक उच्चस्तरीय जांच समिति द्वारा की गई सिफारिश के आधार पर खारिज कर दिया गया है। इसमें एडीसी (डी) एसएएस नगर, एडीसी (डी) एसबीएस नगर और कार्यकारी अभियंता, (पंचायती राज) रूपनगर शामिल हैं।
मामले की सुनवाई के दौरान राज्य सरकार के वकील किसी भी वैधानिक खंड का उल्लेख नहीं कर पाए, जिसके आधार पर उम्मीदवार के आवेदन को खारिज किया जा सकता है। राज्य के वकील किसी भी वैधानिक प्रावधान का उल्लेख करने में भी विफल रहे, जिसके अनुसार एक समिति द्वारा प्रस्तुत की जाने वाली जांच रिपोर्ट पर नामांकन पत्र की जांच की जानी आवश्यक है, जिसे राज्य अधिकारियों द्वारा गठित किया जा सकता है।
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आरओ के फैसले पर रोक लगाते हुए पीठ ने यह भी कहा कि यह फैसला आरओ की ओर से सामग्री व अयोग्यता के आधार पर लिया जाना चाहिए, जैसा कि पंजाब पंचायती राज अधिनियम 1994 की धारा 11 के संदर्भ में स्पष्ट है, न कि समिति के फैसले के आधार पर। निर्वाचन अधिकारी द्वारा लिया गया यह फैसला चौंकाने वाला है। हमारा मानना है कि यदि याचिकाकर्ता को अंतरिम राहत नहीं दी जाती है तो उसे अपूरणीय क्षति पहुंचेगी। नतीजतन, याचिकाकर्ता को इस याचिका के अंतिम परिणाम के अधीन चुनाव प्रक्रिया में भाग लेने की अनुमति है।
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जस्टिस विनोद एस भारद्वाज और जस्टिस हरप्रीत बराड़ की खंडपीठ ने रूपनगर जिले के रंगीलपुर ग्राम पंचायत के पूर्व सरपंच सुनील कुमार की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किए हैं। 4 अक्तूबर को याचिकाकर्ता ने आवश्यक वैधानिक शुल्क जमा करके अपना नामांकन पत्र प्रस्तुत किया था। 5 अक्तूबर को जांच की जानी थी, लेकिन जांच का परिणाम घोषित नहीं किया गया। हालांकि, आरओ ने सूचित किया कि याचिकाकर्ता के नामांकन पत्र को वित्त आयुक्त (पंजाब) की ओर से गठित एक उच्चस्तरीय जांच समिति द्वारा की गई सिफारिश के आधार पर खारिज कर दिया गया है। इसमें एडीसी (डी) एसएएस नगर, एडीसी (डी) एसबीएस नगर और कार्यकारी अभियंता, (पंचायती राज) रूपनगर शामिल हैं।
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मामले की सुनवाई के दौरान राज्य सरकार के वकील किसी भी वैधानिक खंड का उल्लेख नहीं कर पाए, जिसके आधार पर उम्मीदवार के आवेदन को खारिज किया जा सकता है। राज्य के वकील किसी भी वैधानिक प्रावधान का उल्लेख करने में भी विफल रहे, जिसके अनुसार एक समिति द्वारा प्रस्तुत की जाने वाली जांच रिपोर्ट पर नामांकन पत्र की जांच की जानी आवश्यक है, जिसे राज्य अधिकारियों द्वारा गठित किया जा सकता है।
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आरओ के फैसले पर रोक लगाते हुए पीठ ने यह भी कहा कि यह फैसला आरओ की ओर से सामग्री व अयोग्यता के आधार पर लिया जाना चाहिए, जैसा कि पंजाब पंचायती राज अधिनियम 1994 की धारा 11 के संदर्भ में स्पष्ट है, न कि समिति के फैसले के आधार पर। निर्वाचन अधिकारी द्वारा लिया गया यह फैसला चौंकाने वाला है। हमारा मानना है कि यदि याचिकाकर्ता को अंतरिम राहत नहीं दी जाती है तो उसे अपूरणीय क्षति पहुंचेगी। नतीजतन, याचिकाकर्ता को इस याचिका के अंतिम परिणाम के अधीन चुनाव प्रक्रिया में भाग लेने की अनुमति है।