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हरियाणा : हाईकोर्ट ने बिना अनुमति चल रहे बूचड़खानों पर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से किया जवाब तलब
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चंडीगढ़। प्रदेश में तीन बूचड़खाने नगर निगम और परिषद द्वारा चलाए जाने की जानकारी पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को नोटिस जारी कर पूछा है कि क्या इसके लिए उनकी अनुमति जरूरी नहीं है। उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर निवासी जावेद ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करते हुए हरियाणा गोवंश संरक्षण एवं संवर्धन कानून के तहत दर्ज किए गए मामले में नियमित जमानत की हाईकोर्ट से मांग की थी।
याची ने बताया कि एक्ट के अनुसार उस पर 9 जून 2020 को एफआईआर दर्ज की गई थी और तब से वह यमुनानगर की जेल में है। उस पर बीफ के कारोबार में लिप्त होने का आरोप लगाया गया है जबकि इससे उसका कोई लेना देना ही नहीं है। इस मामले में नियमित जमानत के लिए उसने ट्रायल कोर्ट में भी याचिका दाखिल की थी, लेकिन उसकी याचिका को खारिज कर दिया गया। अब याची के पास हाईकोर्ट की शरण लेने के अतिरिक्त कोई विकल्प नहीं बचा था। इसलिए यह याचिका दाखिल की गई है।
याचिका पर सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने अब हरियाणा के स्थानीय निकाय विभाग से प्रदेश में मौजूद बूचड़खानों की संख्या का आंकड़ा मांगा था। साथ ही यह भी पूछा था कि इसकी मंजूरी देने के लिए प्रदेश में क्या प्रावधान हैं। हरियाणा सरकार ने हाईकोर्ट को बताया कि राज्य में तीन बूचड़खाने हैं जो करनाल, रेवाड़ी और झज्जर में मौजूद हैं। इन्हें नगर निगम और परिषद चला रहे हैं और इनके लिए लाइसेंस लेने की जरूरत नहीं है। हाईकोर्ट ने इस पर हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को नोटिस जारी कर पूछा है कि नगर निगम/परिषद और कमेटी द्वारा चलाए जा रहे बूचड़खानों के लिए पर्यावरण स्वीकृति लेने की जरूरत है या नहीं।
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याची ने बताया कि एक्ट के अनुसार उस पर 9 जून 2020 को एफआईआर दर्ज की गई थी और तब से वह यमुनानगर की जेल में है। उस पर बीफ के कारोबार में लिप्त होने का आरोप लगाया गया है जबकि इससे उसका कोई लेना देना ही नहीं है। इस मामले में नियमित जमानत के लिए उसने ट्रायल कोर्ट में भी याचिका दाखिल की थी, लेकिन उसकी याचिका को खारिज कर दिया गया। अब याची के पास हाईकोर्ट की शरण लेने के अतिरिक्त कोई विकल्प नहीं बचा था। इसलिए यह याचिका दाखिल की गई है।
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याचिका पर सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने अब हरियाणा के स्थानीय निकाय विभाग से प्रदेश में मौजूद बूचड़खानों की संख्या का आंकड़ा मांगा था। साथ ही यह भी पूछा था कि इसकी मंजूरी देने के लिए प्रदेश में क्या प्रावधान हैं। हरियाणा सरकार ने हाईकोर्ट को बताया कि राज्य में तीन बूचड़खाने हैं जो करनाल, रेवाड़ी और झज्जर में मौजूद हैं। इन्हें नगर निगम और परिषद चला रहे हैं और इनके लिए लाइसेंस लेने की जरूरत नहीं है। हाईकोर्ट ने इस पर हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को नोटिस जारी कर पूछा है कि नगर निगम/परिषद और कमेटी द्वारा चलाए जा रहे बूचड़खानों के लिए पर्यावरण स्वीकृति लेने की जरूरत है या नहीं।
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