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हाईकोर्ट ने पूछा : बंदरों से लोगों को बचाने के लिए क्या किया, बताए हरियाणा सरकार
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चंडीगढ़। गुरुग्राम, फरीदाबाद और नूंह में बंदरों के हमले की बढ़ती घटनाओं पर चिंता जताते हुए पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार से पूछा है कि लोगों को बंदरों के आतंक से बचाने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं।
याचिका दाखिल करते हुए अनिरुद्ध सिंह ने कहा कि वह गुरुग्राम, फरीदाबाद और फिरोजपुर झिरका के लोगों की भलाई के लिए काम करते हैं। बीते कुछ समय में यहां बंदरों का आतंक तेजी से बढ़ा है। इसका सबसे बड़ा कारण खाने का उपलब्ध होना और सुरक्षित माहौल है। इसके कारण बंदरों के झुंड शहरों में ही नहीं बल्कि गांवों में भी आतंक मचा रहे हैं। याची ने कहा कि इनके कारण आम लोगों के दैनिक जीवन में बड़ी समस्याएं पैदा होने लगी है। अक्सर बंदर छोटे बच्चों, बुजुर्गों व महिलाओं को निशाना बनाते हैं।
याची ने बताया कि बंदरों को कंट्रोल न करने के कारण बच्चों का स्कूल जाना और महिलाओं व बुजुर्गों का घर से बाहर निकलना मुश्किल हो गया है। इनके आतंक से निजात दिलाने की जिम्मेदारी नगर निगम और नगर पालिका की है, लेकिन रिप्रेजेंटेशन देने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। इससे पहले हाईकोर्ट ने मामले को गंभीर मानते हुए हरियाणा सरकार सहित, फरीदाबाद नगर निगम कमिश्नर, फिरोजपुर जिरका म्यूनिसिपल कमेटी और स्थानीय निकाय विभाग के निदेशक सहित चीफ वाइल्ड लाईफ वार्डन को नोटिस जारी करते हुए जवाब मांगा था। अब अगली सुनवाई पर हरियाणा सरकार को इस बारे में शपथपत्र सौंपना होगा।
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ड्रग इंस्पेक्टर भर्ती मामले में हाईकोर्ट की पूर्ण पीठ का फैसला सुरक्षित
26 ड्रग इंस्पेक्टर की भर्ती प्रक्रिया में डिग्री के साथ ही अनुभव की शर्त रखने को चुनौती देने वाली याचिका पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट की पूर्ण पीठ ने फैसला सुरक्षित कर लिया है। इससे पहले खंडपीठ ने भर्ती पर रोक लगाते हुए याचिका को पूर्ण पीठ के समक्ष सुनवाई के लिए रेफर कर दिया था।
पलवल निवासी कृष्ण कुमार ने याचिका दाखिल करते हुए हाईकोर्ट को बताया कि 26 ड्रग इंस्पेक्टर की भर्ती के लिए हरियाणा लोक सेवा आयोग ने अक्तूबर 2019 को परीक्षा आयोजित की थी, जिसका परिणाम 12 दिसंबर को घोषित कर दिया गया। इसके बाद आयोग ने जून 2020 को दूसरे स्तर का परिणाम घोषित किया। दोनों परिणाम के अनुरूप सफल उम्मीदवारों को दस्तावेजों की जांच के लिए बुलाया गया, जिसमें याची भी शामिल हुआ। इसकेबाद याची को आयोग की ओर से 7 जुलाई को पत्र भेज कहा गया कि याची के पास अनुभव नहीं है इस लिए उसका आवेदन अस्वीकार किया जा रहा है। याची ने मांगपत्र देकर इसका विरोध किया, लेकिन इस पर कोई कार्रवाई तक नहीं की गई।
भर्ती के लिए केवल बी फार्मा की डिग्री जरूरी
याची ने हाईकोर्ट को बताया कि ड्रग इंस्पेक्टर भर्ती के लिए केंद्र सरकार नियम बनाती है और नियम के अनुसार भर्ती के लिए केवल बी फार्मा डिग्री की जरूरी होती है। अनुभव की आवश्यकता तभी होती है जब अफसर दवा उत्पादक कंपनियों के निरीक्षण के लिए नियुक्त किया जाता है। मामले को अहम मानते हुए हाईकोर्ट की खंडपीठ ने इसे तीन जजों की पूर्ण पीठ के लिए रेफर कर दिया था। अब पूर्ण पीठ ने सभी पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद याचिका पर फैसला सुरक्षित कर लिया है।
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याचिका दाखिल करते हुए अनिरुद्ध सिंह ने कहा कि वह गुरुग्राम, फरीदाबाद और फिरोजपुर झिरका के लोगों की भलाई के लिए काम करते हैं। बीते कुछ समय में यहां बंदरों का आतंक तेजी से बढ़ा है। इसका सबसे बड़ा कारण खाने का उपलब्ध होना और सुरक्षित माहौल है। इसके कारण बंदरों के झुंड शहरों में ही नहीं बल्कि गांवों में भी आतंक मचा रहे हैं। याची ने कहा कि इनके कारण आम लोगों के दैनिक जीवन में बड़ी समस्याएं पैदा होने लगी है। अक्सर बंदर छोटे बच्चों, बुजुर्गों व महिलाओं को निशाना बनाते हैं।
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याची ने बताया कि बंदरों को कंट्रोल न करने के कारण बच्चों का स्कूल जाना और महिलाओं व बुजुर्गों का घर से बाहर निकलना मुश्किल हो गया है। इनके आतंक से निजात दिलाने की जिम्मेदारी नगर निगम और नगर पालिका की है, लेकिन रिप्रेजेंटेशन देने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। इससे पहले हाईकोर्ट ने मामले को गंभीर मानते हुए हरियाणा सरकार सहित, फरीदाबाद नगर निगम कमिश्नर, फिरोजपुर जिरका म्यूनिसिपल कमेटी और स्थानीय निकाय विभाग के निदेशक सहित चीफ वाइल्ड लाईफ वार्डन को नोटिस जारी करते हुए जवाब मांगा था। अब अगली सुनवाई पर हरियाणा सरकार को इस बारे में शपथपत्र सौंपना होगा।
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ड्रग इंस्पेक्टर भर्ती मामले में हाईकोर्ट की पूर्ण पीठ का फैसला सुरक्षित
26 ड्रग इंस्पेक्टर की भर्ती प्रक्रिया में डिग्री के साथ ही अनुभव की शर्त रखने को चुनौती देने वाली याचिका पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट की पूर्ण पीठ ने फैसला सुरक्षित कर लिया है। इससे पहले खंडपीठ ने भर्ती पर रोक लगाते हुए याचिका को पूर्ण पीठ के समक्ष सुनवाई के लिए रेफर कर दिया था।
पलवल निवासी कृष्ण कुमार ने याचिका दाखिल करते हुए हाईकोर्ट को बताया कि 26 ड्रग इंस्पेक्टर की भर्ती के लिए हरियाणा लोक सेवा आयोग ने अक्तूबर 2019 को परीक्षा आयोजित की थी, जिसका परिणाम 12 दिसंबर को घोषित कर दिया गया। इसके बाद आयोग ने जून 2020 को दूसरे स्तर का परिणाम घोषित किया। दोनों परिणाम के अनुरूप सफल उम्मीदवारों को दस्तावेजों की जांच के लिए बुलाया गया, जिसमें याची भी शामिल हुआ। इसकेबाद याची को आयोग की ओर से 7 जुलाई को पत्र भेज कहा गया कि याची के पास अनुभव नहीं है इस लिए उसका आवेदन अस्वीकार किया जा रहा है। याची ने मांगपत्र देकर इसका विरोध किया, लेकिन इस पर कोई कार्रवाई तक नहीं की गई।
भर्ती के लिए केवल बी फार्मा की डिग्री जरूरी
याची ने हाईकोर्ट को बताया कि ड्रग इंस्पेक्टर भर्ती के लिए केंद्र सरकार नियम बनाती है और नियम के अनुसार भर्ती के लिए केवल बी फार्मा डिग्री की जरूरी होती है। अनुभव की आवश्यकता तभी होती है जब अफसर दवा उत्पादक कंपनियों के निरीक्षण के लिए नियुक्त किया जाता है। मामले को अहम मानते हुए हाईकोर्ट की खंडपीठ ने इसे तीन जजों की पूर्ण पीठ के लिए रेफर कर दिया था। अब पूर्ण पीठ ने सभी पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद याचिका पर फैसला सुरक्षित कर लिया है।