590 करोड़ के घोटाले में एक्शन: हरियाणा के दो वरिष्ठ IAS सस्पेंड, सीबीआई ने दर्ज की एफआईआर
निलंबन की अवधि के दौरान दोनों अधिकारियों का मुख्यालय चंडीगढ़ स्थित मुख्य सचिव कार्यालय तय किया गया है।
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आईडीएफसी बैंक में सरकारी धन के गबन के मामले में सीबीआई की दिल्ली शाखा ने बुधवार रात विभिन्न धाराओं में केस दर्ज कर लिया है। अब इस पूरे मामले की जांच सीबीआई करेगी।
जांच एजेंसी ने फिलहाल अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। उधर, राज्य सरकार ने इस मामले में दो आईएएस अधिकारी प्रदीप कुमार और राम कुमार सिंह को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।
दोनों ही अधिकारी उन विभागों में कार्यरत रहे थे, जहां सरकारी फंड का गबन हुआ है। निलंबन से पहले प्रदीप कुमार राज्य परिवहन निदेशक के रूप में और राम कुमार सिंह विशेष सचिव, राजस्व व पंचकूला मेट्रोपॉलिटन डेवलपमेंट अथॉरिटी के अतिरिक्त सीईओ के रूप में तैनात थे।
यह मामला मूल रूप से 23 फरवरी 2026 को पंचकूला के एसीबी पुलिस थाने में दर्ज एफआईआर नंबर 4 से जुड़ा है। इसमें भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 (संशोधित 2018) और भारतीय न्याय संहिता 2023 की विभिन्न धाराओं के तहत आरोप लगाए गए हैं। सीबीआई ने यह एफआईआर हरियाणा सरकार की सिफारिश के बाद केंद्र सरकार की ओर से जारी अधिसूचना के बाद दर्ज की है। एफआईआर के मुताबिक इस मामले में सरकारी धन को निजी क्षेत्र के बैंकों के माध्यम से शेल कंपनियों स्वास्तिक देश प्रोजेक्ट, एसआरआर प्लानिंग गुरुस प्राइवेट लिमिटेड, कैप को फिनटेक सर्विसेज और आरएस ट्रेडर्स व अन्य व्यक्तियों के खाते में ट्रांसफर किए गए। इस घोटाले से सरकारी खजाने को 550 करोड़ से अधिक का नुकसान हुआ है। इस मामले की जांच अधिकारी सीबीआई के एडिशनल एसपी पुष्पल पॉल रहेंगे।
आईएएस अधिकारियों के सुपरविजन में लापरवाही सामने आई
जांच में आईएएस अधिकारियों के सुपरविजन में लापरवाही सामने आई थी। अधिकारियों के मुताबिक दोनों अधिकारियों ने विभाग के फंड को चेक करने की जहमत नहीं उठाई। आईएएस प्रदीप कुमार हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्य सचिव के रूप में 31 अगस्त, 2022 से 10 दिसंबर, 2025 तक नियुक्त रहे थे। इस दौरान बोर्ड का पैसा आईडीएफसी बैंक में जमा कराया गया था। इसी तरह राम कुमार सिंह दस जुलाई 2025 से 28 जनवरी 2026 तक पंचकूला नगर निगम के आयुक्त के रूप में कार्यरत थे और पंचकूला नगर निगम का पैसा भी आईडीएफसी बैंक में जमा था।
निलंबन अवधि के दौरान दोनों अधिकारियों को भारतीय प्रशासनिक सेवा (अनुशासन और अपील) नियम 1969 के तहत निर्वाह भत्ता प्राप्त होगा और उनका मुख्यालय हरियाणा के मुख्य सचिव कार्यालय चंडीगढ़ में होगा। प्रदीप कुमार और राम कुमार सिंह दोनों राज्य सिविल सेवा से भारतीय प्रशासनिक सेवा में पदोन्नत हुए थे। भारतीय प्रशासनिक सेवा (अनुशासन और अपील) नियम 1969 के नियम 3(1)(a) के तहत, अगर किसी अधिकारी के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्यवाही विचाराधीन या लंबित हो, तो राज्य सरकार या केंद्रीय सरकार उसे निलंबित कर सकती है।
जुलाई 2025 से फरवरी 2026 के बीच सामने आई थी गड़बड़ियां
यह गड़बड़ियां जुलाई 2025 से फरवरी 2026 के बीच कई चरणों में सामने आईं। सबसे पहले, जब शहरी स्थानीय निकाय और विकास और पंचायती विभागों ने खातों को बंद करने या फिक्सड डिपाजिट बैलेंस की जांच करने की कोशिश की, तो उन्हें फर्जी बैंक स्टेटमेंट और गायब फंड मिले। मार्च 2026 में मुख्य षड्यंत्रकर्ताओं की गिरफ्तारी और इन निजी बैंकों के हरियाणा सरकार द्वारा डि-एंपैनल किए जाने के बाद जांच ने रफ्तार पकड़ी। इस मामले में अभी तक दस ज्यादा आरोपी गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे भेजा जा चुका है।
एफआईआर दर्ज करने के बाद आईएएस अधिकारियों का ट्रांसफर व निलंबन
इस मामले में सीबीआई ने 8 अप्रैल बुधवार को शाम चार बजे एफआईआर दर्ज की थी। जब यह जानकारी राज्य सरकार के पास पहुंची तो आला अधिकारियों ने इस मामले में संलिप्त अधिकारियों पर कार्रवाई शुरू कर दी। सरकार ने बुधवार देर रात
आईएएस अधिकारी प्रदीप कुमार व आरके सिंह को निलंबित कर दिया गया। अन्य अधिकारियों का तबादला कर दिया। वरिष्ठ आईएएस डा. साकेत कुमार, विनीत गर्ग, पंकज गर्ग और मोहम्मद शाइन से सभी प्रमुख विभाग लेकर उन्हे वे डिपार्टमेंट सौंप दिए गए, जिन्हें सजा के तौर पर माना जाता है। डा. साकेत कुमार को मुख्यमंत्री के अतिरिक्त प्रधान सचिव के पद से हटाकर अर्काइव्स विभाग, पंकज अग्रवाल से सिंचाई व खनन विभाग लेकर आर्किटेक्चर विभाग, विनीत गर्ग से प्रदूषण बोर्ड के चेयरमैन का पद लेकर प्रिंटिंग व स्टेशनरी विभाग व मोहम्मद शाइन से वित्त विभाग व पब्लिक हेल्थ लेकर हाउसिंग फॉर आल दिया गया है।