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डीडीए को ग्रुप-ए अधिकारी का दर्जा, सेवा नियम किए संशोधित
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चंडीगढ़। हरियाणा सरकार ने डीडीए (उप जिला न्यायवादी) रैंक के सरकारी वकीलों को ग्रुप-ए अधिकारी का दर्जा दे दिया है। सेवा नियमों में संशोधन के बाद अब अभियोजन विभाग में नियमित तौर पर नियुक्त डीडीए को ग्रुप-ए अधिकारी माना जाएगा। 25 फरवरी 2022 को न्याय प्रशासन विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव राजीव अरोड़ा ने इस संबंध में गजट अधिसूचना जारी कर दी है।
सरकार ने हरियाणा राज्य अभियोजन विभाग विधिक सेवा (ग्रुप ए) सेवा नियम, 2013 में संशोधन कर डीडीए को ग्रुप-ए नियमों में शामिल किया गया है। साथ ही डीडीए के सभी 187 पदों को ग्रुप-ए सेवा नियमों, 2013 के परिशिष्ट (अपेंडिक्स) ए में भी शामिल कर लिया गया है। इसके अलावा निदेशक, अभियोजन के भी निवर्तमान एक पद के बजाय दो पद सृजित कर दिए गए हैं। एक निदेशक, अभियोजन (सामान्य ) और दूसरा निदेशक, अभियोजन (विशेष ) होगा। ऐसा इसलिए किया गया ताकि विभाग के मौजूदा निदेशक पांच वर्ष से विभागाध्यक्ष पद पर तैनात हैं। उनके स्थान पर नए विभागाध्यक्ष का चयन किया जाना है। चूंकि, जून 2018 के हरियाणा सरकार के निर्णय अनुसार कोई भी विभागाध्यक्ष अधिकतम तीन वर्ष तक ही पद पर रह सकता है। विभाग के एक अतिरिक्त निदेशक ने हाईकोर्ट में याचिका डाली थी, जिस पर सरकार को नई व्यवस्था करना पड़ी। निदेशक, अभियोजन सामान्य अब विभागाध्यक्ष होंगे।
पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के एडवोकेट हेमंत कुमार ने बताया कि 9 अगस्त 2019 को न्याय प्रशासन विभाग की तत्कालीन प्रशासनिक सचिव नवराज संधू ने डीडीए को ग्रुप (ए) अधिकारी घोषित करने संबंधी निर्णय लिया था। जिसकी अधिसूचना 14 महीने बाद 6 अक्तूबर 2020 को सरकारी गजट में की गई। जिसमें उल्लेख था कि डीडीए के पद हरियाणा राज्य अभियोजन विभाग विधिक सेवा (ग्रुप बी) सेवा नियम, 2001 के अंतर्गत ग्रुप (बी) में थे, उन्हें ग्रुप (ए) का पद घोषित किया जाता है। डीडीए के पदों के लिए लागू 2001 ग्रुप (बी) सेवा नियमों को ग्रुप-ए सेवा नियम पढ़ा जाए। इसके अतिरिक्त डीडीए पदों के लिए शेष सेवा नियम ग्रुप (बी) के ज्यों के त्यों लागू रहेंगे। हेमंत ने बताया कि उन्होंने इस पर एतराज जताया था। उन्होंने सरकार को लिखा कि डीडीए के पदों को कानूनी एवं आधिकारिक रूप से ग्रुप (ए) अधिकारी बनाना है तो इनके पदों को अक्तूबर, 2013 से अभियोजन विभाग की विधिक सेवा के ग्रुप (ए) सेवा नियमों में डाला जाए।
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सरकार ने हरियाणा राज्य अभियोजन विभाग विधिक सेवा (ग्रुप ए) सेवा नियम, 2013 में संशोधन कर डीडीए को ग्रुप-ए नियमों में शामिल किया गया है। साथ ही डीडीए के सभी 187 पदों को ग्रुप-ए सेवा नियमों, 2013 के परिशिष्ट (अपेंडिक्स) ए में भी शामिल कर लिया गया है। इसके अलावा निदेशक, अभियोजन के भी निवर्तमान एक पद के बजाय दो पद सृजित कर दिए गए हैं। एक निदेशक, अभियोजन (सामान्य ) और दूसरा निदेशक, अभियोजन (विशेष ) होगा। ऐसा इसलिए किया गया ताकि विभाग के मौजूदा निदेशक पांच वर्ष से विभागाध्यक्ष पद पर तैनात हैं। उनके स्थान पर नए विभागाध्यक्ष का चयन किया जाना है। चूंकि, जून 2018 के हरियाणा सरकार के निर्णय अनुसार कोई भी विभागाध्यक्ष अधिकतम तीन वर्ष तक ही पद पर रह सकता है। विभाग के एक अतिरिक्त निदेशक ने हाईकोर्ट में याचिका डाली थी, जिस पर सरकार को नई व्यवस्था करना पड़ी। निदेशक, अभियोजन सामान्य अब विभागाध्यक्ष होंगे।
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पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के एडवोकेट हेमंत कुमार ने बताया कि 9 अगस्त 2019 को न्याय प्रशासन विभाग की तत्कालीन प्रशासनिक सचिव नवराज संधू ने डीडीए को ग्रुप (ए) अधिकारी घोषित करने संबंधी निर्णय लिया था। जिसकी अधिसूचना 14 महीने बाद 6 अक्तूबर 2020 को सरकारी गजट में की गई। जिसमें उल्लेख था कि डीडीए के पद हरियाणा राज्य अभियोजन विभाग विधिक सेवा (ग्रुप बी) सेवा नियम, 2001 के अंतर्गत ग्रुप (बी) में थे, उन्हें ग्रुप (ए) का पद घोषित किया जाता है। डीडीए के पदों के लिए लागू 2001 ग्रुप (बी) सेवा नियमों को ग्रुप-ए सेवा नियम पढ़ा जाए। इसके अतिरिक्त डीडीए पदों के लिए शेष सेवा नियम ग्रुप (बी) के ज्यों के त्यों लागू रहेंगे। हेमंत ने बताया कि उन्होंने इस पर एतराज जताया था। उन्होंने सरकार को लिखा कि डीडीए के पदों को कानूनी एवं आधिकारिक रूप से ग्रुप (ए) अधिकारी बनाना है तो इनके पदों को अक्तूबर, 2013 से अभियोजन विभाग की विधिक सेवा के ग्रुप (ए) सेवा नियमों में डाला जाए।
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