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लागू करने से पहले योजना पर ट्रायल करे सरकार, परिणामों के आधार पर हो फेरबदल
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चंडीगढ़। अग्निपथ योजना को लेकर पश्चिमी कमान के पूर्व आर्मी कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) केजे सिंह ने सवाल उठाने के साथ-साथ सुझाव भी दिए हैं। सिंह का कहना है कि बेशक सरकार ने योजना घोषित कर दी है, लेकिन इसे लागू करने से पहले इसका परीक्षण होना चाहिए। परीक्षण के दौरान जो भी परिणाम सामने आए, उसके आधार पर योजना में फेरबदल किया जाए। योजना को लेकर पूर्व सैनिकों की चिंता वाजिब है। वह खुद इसको लेकर चिंता में हैं कि आखिर किस प्रकार से यह लागू हो सकेगी। सरकार को चाहिए कि शंकाओं को दूर करते हुए पूर्व सैनिकों की इस चिंता का समाधान करे।
अमर उजाला से विशेष बातचीत में लेफ्टिनेंट जनरल सिंह ने कहा कि इस योजना को और पारदर्शी व बेहतर बनाया जा सकता था। इसके लिए सरकार को पूर्व सैनिकों के साथ लंबा मंथन करना चाहिए था। चार साल की नौकरी का समय कम है, इसे कम से कम 7 साल किया जाना चाहिए क्योंकि चार साल में तो छह माह ट्रेनिंग के और एक साल के करीब उसकी छुट्टी होगी। ऐसे में सैनिक के हिस्से मात्र ढाई साल ही बचे। दूसरा मात्र छह माह की ट्रेनिंग में एक सैनिक को पूरी तरह से तैयार नहीं किया जा सकता। प्रशिक्षण का समय 9 माह या एक साल किया जाए।
लेफ्टिनेंट जनरल सिंह ने कहा कि सरकार चार साल के बाद सैनिक को केवल बैंकों के बाहर गार्ड लगाने के लिए तैयार न करे। उनके भविष्य और सेना की छवि को देखते हुए उनको सम्मानजनक हो। इसके लिए केंद्रीय सुरक्षा बलों और कारपोरेट जगत में उनकी नौकरी सुरक्षित की जाए। तीन साल से देश में सेना में भर्ती नहीं होने के चलते ओवरएज हुए लाखों युवाओं को लेकर इस योजना में स्पष्ट नहीं है। उनको भी आयु सीमा में छूट दी जाए।
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भर्ती में पारदर्शिता बहुत महत्वपूर्ण है
सिंह का कहना है कि भर्ती के लिए सबसे जरूरी है पारदर्शिता है। इस समय भी सेना में भर्ती को लेकर कुछ माफिया काम कर रहे हैं। योजना में किस प्रकार से पारदर्शिता बरती जाए, यह काफी महत्वपूर्ण है। योजना के विरोध में हिंसा की कड़ी निंदा करते हुए लेफ्टिनेंट जनरल ने कहा कि ऐसा करके युवा अपना भविष्य खराब कर रहे हैं, क्योंकि ऐसे युवाओं को सेना नौकरी का मौका नहीं देती है। तुरंत प्रभाव से हिंसा बंद होनी चाहिए।
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अमर उजाला से विशेष बातचीत में लेफ्टिनेंट जनरल सिंह ने कहा कि इस योजना को और पारदर्शी व बेहतर बनाया जा सकता था। इसके लिए सरकार को पूर्व सैनिकों के साथ लंबा मंथन करना चाहिए था। चार साल की नौकरी का समय कम है, इसे कम से कम 7 साल किया जाना चाहिए क्योंकि चार साल में तो छह माह ट्रेनिंग के और एक साल के करीब उसकी छुट्टी होगी। ऐसे में सैनिक के हिस्से मात्र ढाई साल ही बचे। दूसरा मात्र छह माह की ट्रेनिंग में एक सैनिक को पूरी तरह से तैयार नहीं किया जा सकता। प्रशिक्षण का समय 9 माह या एक साल किया जाए।
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लेफ्टिनेंट जनरल सिंह ने कहा कि सरकार चार साल के बाद सैनिक को केवल बैंकों के बाहर गार्ड लगाने के लिए तैयार न करे। उनके भविष्य और सेना की छवि को देखते हुए उनको सम्मानजनक हो। इसके लिए केंद्रीय सुरक्षा बलों और कारपोरेट जगत में उनकी नौकरी सुरक्षित की जाए। तीन साल से देश में सेना में भर्ती नहीं होने के चलते ओवरएज हुए लाखों युवाओं को लेकर इस योजना में स्पष्ट नहीं है। उनको भी आयु सीमा में छूट दी जाए।
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भर्ती में पारदर्शिता बहुत महत्वपूर्ण है
सिंह का कहना है कि भर्ती के लिए सबसे जरूरी है पारदर्शिता है। इस समय भी सेना में भर्ती को लेकर कुछ माफिया काम कर रहे हैं। योजना में किस प्रकार से पारदर्शिता बरती जाए, यह काफी महत्वपूर्ण है। योजना के विरोध में हिंसा की कड़ी निंदा करते हुए लेफ्टिनेंट जनरल ने कहा कि ऐसा करके युवा अपना भविष्य खराब कर रहे हैं, क्योंकि ऐसे युवाओं को सेना नौकरी का मौका नहीं देती है। तुरंत प्रभाव से हिंसा बंद होनी चाहिए।