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शराब पर कोविड सेस के आदेश पर पुनर्विचार कर रही है सरकार:हरियाणा
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चंडीगढ़। पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट में हरियाणा सरकार ने कहा कि शराब की बिक्री पर कोविड सेस लगाने पर पुनर्विचार कर रही है। हरियाणा सरकार ने इस पर फैसला लेनेेे के लिए समय देने की मांग की है, जिस पर कोर्ट ने सुनवाई 7 अगस्त तक स्थगित कर दी।
हरियाणा वाइन्स द्वारा कोविड सेस लगाने के खिलाफ दायर याचिका में कंपनी ने हाईकोर्ट को बताया कि 2020 -21 की एक्साइज पॉलिसी के तहत लगाई गई बोली के बाद उन्हें ठेके अलॉट हुए हैं। ठेके अलॉट किए जाते समय इस सेस का कोई जिक्र तक नहीं था, लेकिन सरकार ने 6 मई को अपनी इस एक्साइज पॉलिसी में संशोधन कर कोविड-19 सेस लगाने का निर्णय लिया। याचिकाकर्ता कंपनी का आरोप है कि जब पॉलिसी के तहत उन्हें पहले ही ठेके अलॉट हो चुके हैं और उनका सरकार से समझौता हो चूका है तो बाद में सरकार सिर्फ अपने स्तर पर पॉलिसी में बदलाव कैसे कर सकती है।
अलग से डाला जा रहा बोझ
याचिकाकर्ता कंपनी का आरोप है कि वह पॉलिसी के तहत पहले ही अपनी लाइसेंस फीस जमा करवा चुके हैं जिसमें सभी टेक्स पहले ही शामिल हैं। ऐसे में अब इस कोविड सेस का उन पर अलग से बोझ डाला जा रहा है, जबकि अगर यह सेस लगाना ही था तो इसे फर्स्ट पॉइंट ऑफ़ सेल यानी कि होलसेलर पर लगाना चाहिए। जबकि सरकार ने यह सेस रिटेलर्स पर लगा दिया है। इस सेस को लगाने के बाद एमआरपी भी नहीं बढ़ाई गई है। तय है कि कोविड सेस का बोझ सिर्फ रिटेलर्स पर पड़ रहा है। ऐसे में इस पर रोक लगाने की हाईकोर्ट से मांग की गई है।
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हरियाणा वाइन्स द्वारा कोविड सेस लगाने के खिलाफ दायर याचिका में कंपनी ने हाईकोर्ट को बताया कि 2020 -21 की एक्साइज पॉलिसी के तहत लगाई गई बोली के बाद उन्हें ठेके अलॉट हुए हैं। ठेके अलॉट किए जाते समय इस सेस का कोई जिक्र तक नहीं था, लेकिन सरकार ने 6 मई को अपनी इस एक्साइज पॉलिसी में संशोधन कर कोविड-19 सेस लगाने का निर्णय लिया। याचिकाकर्ता कंपनी का आरोप है कि जब पॉलिसी के तहत उन्हें पहले ही ठेके अलॉट हो चुके हैं और उनका सरकार से समझौता हो चूका है तो बाद में सरकार सिर्फ अपने स्तर पर पॉलिसी में बदलाव कैसे कर सकती है।
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अलग से डाला जा रहा बोझ
याचिकाकर्ता कंपनी का आरोप है कि वह पॉलिसी के तहत पहले ही अपनी लाइसेंस फीस जमा करवा चुके हैं जिसमें सभी टेक्स पहले ही शामिल हैं। ऐसे में अब इस कोविड सेस का उन पर अलग से बोझ डाला जा रहा है, जबकि अगर यह सेस लगाना ही था तो इसे फर्स्ट पॉइंट ऑफ़ सेल यानी कि होलसेलर पर लगाना चाहिए। जबकि सरकार ने यह सेस रिटेलर्स पर लगा दिया है। इस सेस को लगाने के बाद एमआरपी भी नहीं बढ़ाई गई है। तय है कि कोविड सेस का बोझ सिर्फ रिटेलर्स पर पड़ रहा है। ऐसे में इस पर रोक लगाने की हाईकोर्ट से मांग की गई है।
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