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Punjab News: हाईकोर्ट ने कहा- भगोड़े का पावर ऑफ अटॉर्नी से याचिका दाखिल करना सिस्टम को शॉर्ट सर्किट करने जैसा

Tue, 31 Oct 2023 10:25 AM IST
चंडीगढ़ ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: चंडीगढ़ ब्यूरो Updated Tue, 31 Oct 2023 10:25 AM IST
सार

हाईकोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ताओं की जमानत सुप्रीम कोर्ट तक रद्द कर चुका है। याचिकाकर्ता केवल इसमें ही नहीं बल्कि कई अन्य मामलों में भी भगोड़ा करार दिया जा चुका है। ऐसे में यदि विदेश में बैठे भगोड़े आरोपी को पावर ऑफ अटॉर्नी के माध्यम से याचिका दाखिल करने की अनुमति दी गई तो आरोपियों के लिए देश से भागना और अदालत के सामने पेश होने से बचने में आसानी होगी।

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Fugitive filing petition with power of attorney is like short circuiting the system says High Court
सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

समझौते को आधार बनाकर किसी भगोड़े को पावर ऑफ अटाॅर्नी के जरिये याचिका दायर करने की अनुमति नहीं दी जा सकती। खास तौर पर तब जब वह कई मामलों में फरार चल रहा हो तो ऐसा करने को सिस्टम को शॉर्ट सर्किट करने का प्रयास माना जाएगा। हाईकोर्ट ने समझौते के आधार पर एफआईआर रद्द करने की मांग को लेकर दाखिल याचिका को खारिज कर दिया।

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सुखविंदर सिंह, परमजीत सिंह, अमरजीत कौर और करनैल सिंह के खिलाफ करोड़ाें रुपये की धोखाधड़ी के आरोप में कपूरथला में 2014 में मामला दर्ज किया गया था। सुखविंदर सिंह व दो अन्य को भगोड़ा घोषित कर दिया गया था। सुखविंदर ने पावर ऑफ अटॉर्नी के माध्यम से दाखिल याचिका में हाईकोर्ट को बताया कि उस पर आरोप है कि वह अपने साथियों के साथ सौ करोड़ रुपये से अधिक की हेराफेरी कर अमेरिका भाग गया।
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याची का शिकायतकर्ता के साथ समझौता हो गया है। समझौते के अनुसार वह शिकायतकर्ता को पांच करोड़ रुपये का भुगतान कर चुका है। ऐसे में याची के खिलाफ होने वाली सभी कार्रवाई रद्द की जानी चाहिए। हाईकोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ताओं की जमानत सुप्रीम कोर्ट तक रद्द कर चुका है।
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याचिकाकर्ता केवल इसमें ही नहीं बल्कि कई अन्य मामलों में भी भगोड़ा करार दिया जा चुका है। ऐसे में यदि विदेश में बैठे भगोड़े आरोपी को पावर ऑफ अटॉर्नी के माध्यम से याचिका दाखिल करने की अनुमति दी गई तो आरोपियों के लिए देश से भागना और अदालत के सामने पेश होने से बचने में आसानी होगी।


इसका असर यह होगा कि अदालती कार्यवाही में देरी होगी। याची के खिलाफ गंभीर आरोप हैं और ऐसी कोई परिस्थितियां नहीं हैं जिसके चलते पावर ऑफ अटॉर्नी से याचिका दाखिल करने की अनुमति दी जाए। ऐसी अनुमति तभी दी जा सकती है जब याची नाबालिग, पागल, दिव्यांग या किसी विशेष परिस्थिति के चलते व्यक्तिगत तौर पर पेश होने में सक्षम न हो। ऐसे में हाईकोर्ट ने इस याचिका को खारिज कर दिया।

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