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Panchkula News: गलियों में बचपन की शरारतों से शुरू हुई दोस्ती, दोस्त को बनाया डिप्टी कलेक्टर

Sun, 03 Aug 2025 12:05 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Sun, 03 Aug 2025 12:05 AM IST
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Friendship started with childhood pranks in the streets, friend was made Deputy Collector
पंचकूला। दोस्ती का रिश्ता खून के रिश्ते से बढ़कर है। मुश्किल समय में ही सच्चे रिश्तों की पहचान होती है। मूलरूप से कुरुक्षेत्र के रहने वाले राकेश कुमार और हरीचंद की कहानी कुछ ऐसी ही है। शांति नगर की गलियों में बचपन की शरारतों से शुरू हुई ये दोस्ती, हरीचंद के परिवार की आर्थिक तंगी के कारण और भी मजबूत हो गई। जहां हरीचंद का परिवार रोजमर्रा की जरूरतों के लिए संघर्ष कर रहा था, वहीं राकेश ने चुपचाप दोस्ती का फर्ज निभाया। वह अपनी जेब खर्च से जगदीप की फीस भरते, किताबें खरीदते और कभी भी अकेला महसूस नहीं होने दिया। जब हरीचंद हिचकता तो राकेश मुस्कुराता कहता, ‘जब तक तू बड़ा अफसर नहीं बन जाता, तेरे सारे खर्चे की जिम्मेदारी मेरी है। हरीचंद अपनी मेहनत और राकेश की दोस्ती के सहारे डिप्टी कलेक्टर बने। 65 साल के राकेश कुमार रामगढ़ और 65 साल के ही हरीचंद पंचकूला के सेक्टर-28 में रहते हैं।
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भावुक हरीचंद बोले- उस वक्त राकेश न होता तो आज दिहाड़ीदार मजदूर होता

हरीचंद अब सेवानिवृत्त हो चुके हैं। वे अपनी सफलता का श्रेय अपने दोस्त राकेश को देते हैं। हरीचंद भावुक होकर कहते हैं, अगर उस वक्त राकेश न होता तो शायद आज मैं दिहाड़ीदार मजदूर होता। उसकी मदद ने मुझे सिर्फ शिक्षा ही नहीं दी बल्कि जीवन में आगे बढ़ने का हौसला भी दिया। राकेश ने भी कभी नहीं सोचा था कि उसकी छोटी सी मदद एक पूरे जीवन को बदल देगी।
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पैसे से नहीं, नीयत से निभाई जाती है दोस्ती

सच्चा मित्र वही होता है जो मुश्किल समय में साथ खड़ा हो। दोस्ती का यह बंधन पैसे से नहीं बल्कि नीयत से निभाया जाता है। संघर्षों में साथ देने वाला दोस्त जीवन की सबसे बड़ी पूंजी होता है। एक छोटी सी मदद किसी का पूरा जीवन बदल सकती है और यह कर्ज हमेशा के लिए दिल में रहता है। राकेश और हरीचंद की दोस्ती एक-दूसरे के प्रति सच्ची भावना की मिसाल है।
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फिर लौटी वो यादें...दोनों खो गए

फ्रेंडशिप डे के मौके पर हरीचंद भावुक हो उठे। दोस्ती की बात करते ही बोले- आज मैं जो कुछ भी हूं, अपने दोस्त की वजह से हूं। दोनों दोस्त आज अपने घर पर थे। पुरानी यादें और बातें-बाते करते-करते दोनों की आंखें भर आईं। वहीं, राकेश कुमार ने कहा कि दोस्ती हमेशा दिल से होती है। दोस्ती सिर्फ साथ बैठने या बात करने का नाम नहीं। दोस्ती दो दिलों की एक सोच है।
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