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Panchkula News: कूड़े के चार तरह के सेग्रीगेशन से बचेगा अलीपुर डंपिंग ग्राउंड, 40% कचरे का बोझ होगा कम
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पंचकूला। अलीपुर डंपिंग ग्राउंड में कूड़े का पहाड़ बनने से रोकने के लिए अब नगर निगम चार तरह के कूड़े के सेग्रीगेशन की तैयारी में है। अभी तक सिर्फ गीला-सूखा कचरा अलग किया जा रहा था, लेकिन नए सिस्टम में कचरे को चार श्रेणियों में बांटा जाएगा। इससे आने वाले समय में अलीपुर में कूड़े की क्षमता पर सीधा असर पड़ेगा। नगर निगम के अधिकारियों के अनुसार, नए नियमों के तहत हर घर से चार तरह का कचरा अलग-अलग लिया जाएगा।
अभी पंचकूला शहर से 200 टन कचरा रोज एकत्रित किया जाता है। नया सिस्टम लागू होने के बाद अलीपुर पर रोज का बोझ 200 टन से घटकर 40-50 टन रह जाएगा। यानी अलिपुर में डंपिंग ग्राउंड पर पड़ रहे 40 प्रतिशत कचरे का बोझ कम हो जाएगा। इससे डंपिंग ग्राउंड की लाइफ 3-4 साल से बढ़कर 12-15 साल हो जाएगी और कूड़े से उठने वाली बदबू और आग की घटनाएं भी 80% तक कम होंगी। उधर, सरकार की वेस्ट से बिजली बनाने की प्लानिंग है। दो साल में अंबाला कलस्टर के अंतर्गत आते पंचकूला सहित अन्य क्षेत्रों से रोज निकलने वाले वेस्ट के लिए एनर्जी प्लांट लगाया जाएगा। इससे कहीं भी डंप होने वाले कूड़े की समस्या से पूरी तरह छुटकारा मिल सकेगा।
ऐसे हो रही 200 टन कचरे की प्लानिंग
गीला कचरा - 55%: सब्जी-फलों के छिलके, बचा हुआ खाना। यह सबसे ज्यादा है। इससे खाद बनेगी।
सूखा कचरा - 30%: प्लास्टिक, कागज, गत्ता, कांच, धातु। यह रीसाइकिल होकर एमआरएफ सेंटर में जाएगा।
सेनेटरी वेस्ट - 10%: डायपर, सेनेटरी नैपकिन, पट्टियां, मास्क। इसे अलग पीले बैग में लेना होगा।
घरेलू हानिकारक कचरा - 5%: पेंट, कीटनाशक, ट्यूबलाइट, बैटरी, दवाइयां, केमिकल।
यदि चार तरह का सेग्रीगेशन 100% लागू हो गया तो -
- गीला कचरा (55%) सीधे कंपोस्ट प्लांट में जाएगा, लैंडफिल में नहीं।
- सूखा कचरा (30%) रीसाइकिल हो जाएगा।
- सिर्फ 15% सेनेटरी और हानिकारक कचरा ही प्रोसेस होगा।
निगम की तैयारी
- घर-घर में चार डस्टबिन: अभी दो डस्टबिन दिए गए हैं, अब चार रंग के डस्टबिन - हरा (गीला), नीला (सूखा), पीला (सेनेटरी), लाल/काला (हानिकारक) देने होंगे।
- कलेक्शन गाड़ियों में चार चैंबर: मौजूदा गाड़ियों में दो ही खाने हैं, उन्हें चार चैंबर वाली बनाना होगा या चार बार कलेक्शन करना होगा।
- एमआरएफ और कंपोस्ट प्लांट का विस्तार किया जाएगा। अभी अलिपुर में मैनुअल तरीके से वेस्ट को सेग्रिगेट किया जाता है। इन्सिनरेटर और हानिकारक के लिए होगी अलग स्टोरेज शेड।
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- सफाई कर्मचारियों की ट्रेनिंग: कर्मचारियों को चार तरह के कचरे की पहचान और हैंडलिंग की ट्रेनिंग देनी होगी, खासकर सेनेटरी और हानिकारक कचरे के लिए ग्लव्स-किट।
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अभी पंचकूला शहर से 200 टन कचरा रोज एकत्रित किया जाता है। नया सिस्टम लागू होने के बाद अलीपुर पर रोज का बोझ 200 टन से घटकर 40-50 टन रह जाएगा। यानी अलिपुर में डंपिंग ग्राउंड पर पड़ रहे 40 प्रतिशत कचरे का बोझ कम हो जाएगा। इससे डंपिंग ग्राउंड की लाइफ 3-4 साल से बढ़कर 12-15 साल हो जाएगी और कूड़े से उठने वाली बदबू और आग की घटनाएं भी 80% तक कम होंगी। उधर, सरकार की वेस्ट से बिजली बनाने की प्लानिंग है। दो साल में अंबाला कलस्टर के अंतर्गत आते पंचकूला सहित अन्य क्षेत्रों से रोज निकलने वाले वेस्ट के लिए एनर्जी प्लांट लगाया जाएगा। इससे कहीं भी डंप होने वाले कूड़े की समस्या से पूरी तरह छुटकारा मिल सकेगा।
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ऐसे हो रही 200 टन कचरे की प्लानिंग
गीला कचरा - 55%: सब्जी-फलों के छिलके, बचा हुआ खाना। यह सबसे ज्यादा है। इससे खाद बनेगी।
सूखा कचरा - 30%: प्लास्टिक, कागज, गत्ता, कांच, धातु। यह रीसाइकिल होकर एमआरएफ सेंटर में जाएगा।
सेनेटरी वेस्ट - 10%: डायपर, सेनेटरी नैपकिन, पट्टियां, मास्क। इसे अलग पीले बैग में लेना होगा।
घरेलू हानिकारक कचरा - 5%: पेंट, कीटनाशक, ट्यूबलाइट, बैटरी, दवाइयां, केमिकल।
यदि चार तरह का सेग्रीगेशन 100% लागू हो गया तो -
- गीला कचरा (55%) सीधे कंपोस्ट प्लांट में जाएगा, लैंडफिल में नहीं।
- सूखा कचरा (30%) रीसाइकिल हो जाएगा।
- सिर्फ 15% सेनेटरी और हानिकारक कचरा ही प्रोसेस होगा।
निगम की तैयारी
- घर-घर में चार डस्टबिन: अभी दो डस्टबिन दिए गए हैं, अब चार रंग के डस्टबिन - हरा (गीला), नीला (सूखा), पीला (सेनेटरी), लाल/काला (हानिकारक) देने होंगे।
- कलेक्शन गाड़ियों में चार चैंबर: मौजूदा गाड़ियों में दो ही खाने हैं, उन्हें चार चैंबर वाली बनाना होगा या चार बार कलेक्शन करना होगा।
- एमआरएफ और कंपोस्ट प्लांट का विस्तार किया जाएगा। अभी अलिपुर में मैनुअल तरीके से वेस्ट को सेग्रिगेट किया जाता है। इन्सिनरेटर और हानिकारक के लिए होगी अलग स्टोरेज शेड।
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- सफाई कर्मचारियों की ट्रेनिंग: कर्मचारियों को चार तरह के कचरे की पहचान और हैंडलिंग की ट्रेनिंग देनी होगी, खासकर सेनेटरी और हानिकारक कचरे के लिए ग्लव्स-किट।