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Panchkula News: लेबरफेड डिपार्टमेंट के पांच कर्मियों ने फर्जी हस्ताक्षर और बिल बनाकर विभाग को 30.98 लाख का चूना लगाया
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पंचकूला। हरियाणा स्टेट कार्पोरेशन लेबर कंस्ट्रक्शन फेडरेशन लिमिटेड (लेबरफेड डिपार्टमेंट) के पांच कर्मचारियों द्वारा फर्जी हस्ताक्षर और बिल बनाकर विभाग को 30.98 लाख रुपये का चूना लगाने का मामला सामने आया है। शक के आधार पर विभागीय जांच में धोखाधड़ी उजागर हुई। इसके बाद आरोपियों ने गबन की गई राशि जमा करने को कहा तो उन्होंने विभाग के बैंक खाते में रकम जमा करवा दी। सेक्टर-5 थाना पुलिस ने लेबरफेड डिपार्टमेंट के एमडी वीरेंद्र कुमार की शिकायत पर ललित कुमार, राकेश कुमार, मनीष कुमार, हरदेवेंद्र सिंह और जगतार सिंह के खिलाफ धोखाधड़ी व अन्य धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है।
पुलिस के अनुसार, एमडी वीरेंद्र कुमार ने दी शिकायत बताया कि 2022-23 में पांचों कर्मचारियों ने फर्जी बिल और अधिकारियों के फर्जी साइन कर लाखों रुपये की धोखाधड़ी की। अकाउंटेंट ललित ने 16.36 लाख, क्लर्क राकेश कुमार ने 5.20 लाख, कंप्यूटर ऑपरेटर मनीष ने 30 हजार, डिप्टी सुपरिटेंडेंट हरदेव सिंह ने 7.67 लाख और चपरासी जगतार सिंह ने 1.45 लाख रुपये विभाग के बैंक खाते से फर्जी बिल और अधिकारियों के फर्जी साइन कर निकलवाए थे। विभाग के ऑडिट विंग ने 2022-23 और 2023-24 का बही खाता मिलाया तो 30.98 लाख रुपये की गड़बड़ी मिली। उसके बाद रिकवरी के लिए पांचों कर्मियों को नोटिस जारी किया गया। नोटिस के अनुसार पांचों कर्मियों ने अपनी गलती मानकर पूरा पैसा बैंक खाते में जमा करवा दिए। इसके बाद पुलिस में कर्मचारियों के खिलाफ शिकायत दी गई।
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पुलिस के अनुसार, एमडी वीरेंद्र कुमार ने दी शिकायत बताया कि 2022-23 में पांचों कर्मचारियों ने फर्जी बिल और अधिकारियों के फर्जी साइन कर लाखों रुपये की धोखाधड़ी की। अकाउंटेंट ललित ने 16.36 लाख, क्लर्क राकेश कुमार ने 5.20 लाख, कंप्यूटर ऑपरेटर मनीष ने 30 हजार, डिप्टी सुपरिटेंडेंट हरदेव सिंह ने 7.67 लाख और चपरासी जगतार सिंह ने 1.45 लाख रुपये विभाग के बैंक खाते से फर्जी बिल और अधिकारियों के फर्जी साइन कर निकलवाए थे। विभाग के ऑडिट विंग ने 2022-23 और 2023-24 का बही खाता मिलाया तो 30.98 लाख रुपये की गड़बड़ी मिली। उसके बाद रिकवरी के लिए पांचों कर्मियों को नोटिस जारी किया गया। नोटिस के अनुसार पांचों कर्मियों ने अपनी गलती मानकर पूरा पैसा बैंक खाते में जमा करवा दिए। इसके बाद पुलिस में कर्मचारियों के खिलाफ शिकायत दी गई।
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