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Panchkula News: मोरनी में चीड़ के जंगलों में लगी आग, सोता रहा वन विभाग
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संवाद न्यूज एजेंसी
मोरनी। मोरनी गांव के पास स्थित घने चीड़ के जंगल में रविवार को अचानक आग लग गई। आग की खबर फैलते ही स्थानीय लोग घबराहट में वन विभाग के कर्मचारियों से संपर्क करने की कोशिश करते रहे, लेकिन काफी देर तक कोई सहायता नहीं मिल पाई। स्थानीय लोगों के अनुसार, आग तेजी से फैलती रही और चीड़ के पेड़ों को भारी नुकसान पहुंचा है। आग लगने के कारणों का अब तक कोई पता नहीं चल पाया है।
पिछले साल भी इसी तरह की आग ने जंगलों में व्यापक तबाही मचाई थी, जिससे हजारों पेड़ नष्ट हो गए थे। इसके बावजूद वन विभाग ने इस बार जंगलों को आग से बचाने के लिए कोई ठोस इंतजाम नहीं किए।
गांववासियों का कहना है कि हर साल गर्मियों में जंगलों में आग लगने की घटनाएं आम हो गई हैं, लेकिन विभाग की ओर से न तो समय रहते कोई निगरानी की जाती है और न ही आग पर काबू पाने के लिए पर्याप्त उपकरण या टीम तैनात की जाती है। इस बार भी वही कहानी दोहराई गई, जिससे क्षेत्र में पर्यावरण को गहरा नुकसान हुआ है और लोगों की चिंता और गहरी हो गई है।
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स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं ने मांग की कि वन विभाग तत्काल प्रभाव से ठोस कदम उठाने में नाकाम साबित हुआ है। भविष्य में जंगलों को आग से बचाने के लिए ग्रामीणों के साथ मिलकर योजनाबद्ध तरीके से काम किया जाना चाहिए।
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मोरनी। मोरनी गांव के पास स्थित घने चीड़ के जंगल में रविवार को अचानक आग लग गई। आग की खबर फैलते ही स्थानीय लोग घबराहट में वन विभाग के कर्मचारियों से संपर्क करने की कोशिश करते रहे, लेकिन काफी देर तक कोई सहायता नहीं मिल पाई। स्थानीय लोगों के अनुसार, आग तेजी से फैलती रही और चीड़ के पेड़ों को भारी नुकसान पहुंचा है। आग लगने के कारणों का अब तक कोई पता नहीं चल पाया है।
पिछले साल भी इसी तरह की आग ने जंगलों में व्यापक तबाही मचाई थी, जिससे हजारों पेड़ नष्ट हो गए थे। इसके बावजूद वन विभाग ने इस बार जंगलों को आग से बचाने के लिए कोई ठोस इंतजाम नहीं किए।
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गांववासियों का कहना है कि हर साल गर्मियों में जंगलों में आग लगने की घटनाएं आम हो गई हैं, लेकिन विभाग की ओर से न तो समय रहते कोई निगरानी की जाती है और न ही आग पर काबू पाने के लिए पर्याप्त उपकरण या टीम तैनात की जाती है। इस बार भी वही कहानी दोहराई गई, जिससे क्षेत्र में पर्यावरण को गहरा नुकसान हुआ है और लोगों की चिंता और गहरी हो गई है।
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स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं ने मांग की कि वन विभाग तत्काल प्रभाव से ठोस कदम उठाने में नाकाम साबित हुआ है। भविष्य में जंगलों को आग से बचाने के लिए ग्रामीणों के साथ मिलकर योजनाबद्ध तरीके से काम किया जाना चाहिए।