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जमानत याचिकाओं में नहीं निपटाए जा सकते वित्तीय विवाद: हाईकोर्ट

Fri, 25 Oct 2024 02:53 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Fri, 25 Oct 2024 02:53 AM IST
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Financial disputes cannot be settled in bail petitions: High Court
चंडीगढ़। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने यह स्पष्ट कर दिया कि समझौता राशि की वसूली न होने के कारण धोखाधड़ी के मामले में आरोपी की जमानत रद्द नहीं की जा सकती। हाईकोर्ट ने कहा कि अदालतें जमानत याचिका में वसूली के दावों पर विचार नहीं कर सकती। हाईकोर्ट ने जमानत रद्द करने से इन्कार करते हुए कहा कि इस मामले में तो जांच एजेंसी ने आरोपी से हिरासत में पूछताछ की मांग भी नहीं की थी। चंडीगढ़ निवासी जसपाल सिंह मलिक ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करते हुए 20 लाख रुपये की धोखाधड़ी के आरोप में एफआईआर में आरोपी को मिली अग्रिम जमानत को रद्द करने की मांग की थी। आरोपी को 15 लाख आरटीजीएस के जरिये और पांच लाख रुपये अलग से दिए गए थे। मलिक ने कहा कि दस्तावेजी सबूतों के होने और आरोपी से कोई वसूली नहीं होने के बावजूद ट्रायल कोर्ट ने आरोपी को अग्रिम जमानत पर रिहा कर दिया। याची ने दलील दी कि आरोपी ने विवाद को निपटाने के लिए 15 लाख का चेक जारी किया, लेकिन चेक बाउंस हो गया।
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सभी पक्षों को सुनने के बाद हाईकोर्ट ने इस बात पर जोर दिया कि आरोपी को दी गई जमानत को रद्द करना केवल उन मामलों तक सीमित होना चाहिए जिनमें आरोपी ने जांच में हस्तक्षेप, गवाहों को धमकाने या सबूतों के साथ छेड़छाड़ करके रियायत का दुरुपयोग किया हो। अभियुक्त को दी गई जमानत केवल ठोस साक्ष्य या परिस्थितियों में महत्वपूर्ण परिवर्तन के आधार पर रद्द की जानी चाहिए। इसलिए सांविधानिक अधिकारों की आधारशिला व्यक्तिगत स्वतंत्रता को मनमाने ढंग से रद्द नहीं किया जाना चाहिए।
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हाईकोर्ट ने कहा कि वर्तमान मामले में याचिकाकर्ता अभियुक्त की जमानत का कोई दुरुपयोग या इसकी शर्तों के उल्लंघन करने का कोई सबूत पेश करने में विफल रहा। हाईकोर्ट ने कहा कि जमानत याचिकाओं में अदालतों का काम यह निर्धारित करना है कि जमानत देने के लिए कानूनी शर्तें पूरी हुई हैं या नहीं, न कि पक्षों के बीच वित्तीय विवादों को सुलझाना। साथ ही शिकायतकर्ता के वसूली के दावों को लागू करने के बजाय अदालतें न्याय सुनिश्चित करने और कानूनी मानकों को बनाए रखने पर ध्यान केंद्रित करें। इन टिप्पणियों के साथ ही हाईकोर्ट ने जमानत रद्द करने से इन्कार करते हुए याचिका को खारिज कर दिया।
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