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देश के 17 राज्यों में 80 करोड़ की दवा सप्लाई करने वाले पिता-पुत्र गिरफ्तार, दिल्ली से दबोचे गए

Sat, 29 Aug 2020 12:38 PM IST
पंचकुला ब्‍यूरो अमर उजाला, चंडीगढ़
अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: पंचकुला ब्‍यूरो Updated Sat, 29 Aug 2020 12:38 PM IST
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Father and son arrested for supplying drugs worth 80 crores in 17 states of the country
सांकेतिक तस्वीर
देश में फार्मास्युटिकल ऑपियॉइड्स के अवैध निर्माण-डायवर्जन-सप्लाई करने वाले पिता-पुत्र को दिल्ली से गिरफ्तार कर पंजाब पुलिस ने बड़ी सफलता हासिल की है। पंजाब पुलिस ने नीतू डिसकेयर प्राइवेट लिमिटेड, नरेला, दिल्ली के कृष्ण कुमार अरोड़ा और उनके बेटे गौरव अरोड़ा को गिरफ्तार किया है।
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बाप बेटे अवैध रूप से 18-20 करोड़ टेबलेट, कैप्सूल और सिरप की आपूर्ति देश के 17 राज्यों में कर रहे थे। मथुरा गिरोह और आगरा गिरोह सहित विभिन्न ड्रग सप्लाई गिरोहों के माध्यम से पंजाब पुलिस ने यह खुलासा किया है।
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डीजीपी पंजाब दिनकर गुप्ता ने बताया कि यह कुख्यात जोड़ी कार्ट फार्मा ड्रग कार्टेल की मास्टरमाइंड थी, जो कुल अवैध फार्मा ओपियोड ड्रग व्यापार के प्रमुख हिस्से (लगभग 60-70 प्रतिशत) को नियंत्रित करती है। दोनों को 27 अगस्त को बरौला पुलिस टीम द्वारा राजौरी गार्डन दिल्ली से गिरफ्तार किया गया था।
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इसमें एसएसपी बरनाला शालदीप गोयल की देखरेख में कार्यरत डा. प्रज्ञा जैन आईपीएस एएसपी मेहल कलां शामिल थे। डीजीपी ने बताया कि बरनाला पुलिस द्वारा मई और जुलाई माह में मथुरा और आगरा गिरोह का खुलासा किया जा चुका है।

अब तक 36 की हो चुकी है गिरफ्तारी

डीजीपी पंजाब ने कहा कि 5 राज्यों से अब तक 36 ड्रग मनी आय और 36 आरोपी व्यक्तियों की गिरफ्तारी। जांच के दौरान नेउत्से फार्मास्युटिकल प्राइवेट लिमिटेड, नरेला, दिल्ली सहित विभिन्न फार्मास्युटिकल निर्माण कंपनियों की भागीदारी का खुलासा हुआ है। ये कंपनियां कुछ दवाइयों में कुछ ऐसे ड्रग्स का प्रयोग कर रही थीं कि जिनका औषधीय नशा के रूप में प्रयोग किया जाता है।

कोटे से अधिक करते थे निर्माण
बाप बेटे मंजूर किए गए कोटे के ऊपर और ऊपर फार्मा ड्रग्स का निर्माण कर रहे थे। डीजीपी ने बताया कि दोनों अपने कई सहयोगियों के साथ थोक और फुटकर फार्मास्युटिकल फर्मों के जरिए यह कार्य कर रहे थे। ये नकली फर्म मुख्य रूप से एनआरएक्स दवाओं की खरीद और बिक्री करती थीं। दोनों शातिर बाप बेटे इन फ्रंट फर्मों को कानून पचड़ों और प्रवर्तन एजेंसियों की जांच से बचने के लिए 3-4 महीने के बाद बंद कर देते थे।

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