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बागवानी फसलों को बरसात, प्राकृतिक आपदा से नुकसान पर किसानों को होगी भरपाई
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चंडीगढ़। हरियाणा सरकार बागवानी फसलों को बरसात, प्राकृतिक आपदा से हुए नुकसान की भरपाई करेगी। इसके लिए मुख्यमंत्री बागवानी बीमा योजना (एमबीबीवाई) लाई गई है। मुख्यमंत्री मनोहर लाल की अध्यक्षता में बुधवार को हुई मंत्रिमंडल बैठक में इस आश्वासन आधारित योजना के क्रियान्वयन को स्वीकृति दी गई।
मुख्यमंत्री ने बैठक के बाद बताया कि योजना के तहत बागवानों को खराब फसलों का मुआवजा मिलेगा। 21 फल, सब्जियां और मसाला फसलें इसके दायरे में आएंगी। किसानों के हितों की रक्षा के मद्देनजर सरकार ने विशेष रूप से यह योजना बनाई है। बागवानी किसानों को विभिन्न कारण से भारी वित्तीय नुकसान उठाना पड़ता है। अचानक बीमारी फैलने, कीटों के संक्रमण, बेमौसम बारिश, ओलावृष्टि, सूखा, पाला, अत्यधिक तापमान जैसे अनेक अजैविक कारक इनमें शामिल हैं। योजना में ओलावृष्टि, पाला, वर्षा, बाढ़, आग आदि जैसे मापदंड लिए गए हैं।
ये रहेगा बीमा योजना का स्वरूप
किसानों को सब्जी एवं मसाला फसलों की 30,000 रुपये और फल फसलों की 40,000 रुपये की बीमा राशि के विरुद्घ केवल 2.5 प्रतिशत यानि 750 रुपये और 1000 रुपये अदा करने होंगे।
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दावा मुआवजा, सर्वेक्षण और नुकसान की 4 श्रेणियों 25, 50, 75 और 100 प्रतिशत की सीमा पर आधारित होगा। यह योजना वैकल्पिक होगी और पूरे राज्य में लागू होगी।
-किसानों को मेरी फसल मेरा ब्योरा (एमएफएमबी) पोर्टल पर अपनी फसल और क्षेत्र का पंजीकरण करते समय इस योजना का विकल्प चुनना होगा।
- मौसमवार फसल पंजीकरण की अवधि समय-समय पर निर्धारित एवं अधिसूचित की जाएगी। यह योजना व्यक्तिगत क्षेत्र पर लागू की जाएगी यानि फसल हानि का आकलन व्यक्तिगत क्षेत्र स्तर पर किया जाएगा।
- राज्य सरकार 10 करोड़ रुपये का बजट रखेगी और प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (पीएमएफबीवाई) के तहत राज्य और जिला स्तरीय समितियां निगरानी, समीक्षा और विवादों का समाधान करेंगी।
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मुख्यमंत्री ने बैठक के बाद बताया कि योजना के तहत बागवानों को खराब फसलों का मुआवजा मिलेगा। 21 फल, सब्जियां और मसाला फसलें इसके दायरे में आएंगी। किसानों के हितों की रक्षा के मद्देनजर सरकार ने विशेष रूप से यह योजना बनाई है। बागवानी किसानों को विभिन्न कारण से भारी वित्तीय नुकसान उठाना पड़ता है। अचानक बीमारी फैलने, कीटों के संक्रमण, बेमौसम बारिश, ओलावृष्टि, सूखा, पाला, अत्यधिक तापमान जैसे अनेक अजैविक कारक इनमें शामिल हैं। योजना में ओलावृष्टि, पाला, वर्षा, बाढ़, आग आदि जैसे मापदंड लिए गए हैं।
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ये रहेगा बीमा योजना का स्वरूप
किसानों को सब्जी एवं मसाला फसलों की 30,000 रुपये और फल फसलों की 40,000 रुपये की बीमा राशि के विरुद्घ केवल 2.5 प्रतिशत यानि 750 रुपये और 1000 रुपये अदा करने होंगे।
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दावा मुआवजा, सर्वेक्षण और नुकसान की 4 श्रेणियों 25, 50, 75 और 100 प्रतिशत की सीमा पर आधारित होगा। यह योजना वैकल्पिक होगी और पूरे राज्य में लागू होगी।
-किसानों को मेरी फसल मेरा ब्योरा (एमएफएमबी) पोर्टल पर अपनी फसल और क्षेत्र का पंजीकरण करते समय इस योजना का विकल्प चुनना होगा।
- मौसमवार फसल पंजीकरण की अवधि समय-समय पर निर्धारित एवं अधिसूचित की जाएगी। यह योजना व्यक्तिगत क्षेत्र पर लागू की जाएगी यानि फसल हानि का आकलन व्यक्तिगत क्षेत्र स्तर पर किया जाएगा।
- राज्य सरकार 10 करोड़ रुपये का बजट रखेगी और प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (पीएमएफबीवाई) के तहत राज्य और जिला स्तरीय समितियां निगरानी, समीक्षा और विवादों का समाधान करेंगी।