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Panchkula News: किसान धान की पराली को जलाए बिना उसकी उचित देखभाल करें
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संवाद न्यूज एजेंसी
अमृतसर । पराली न जलाए बिना और उर्वरकों का उपयोग करके गेहूं की बुवाई करने के संबंध में, एसएसपी ग्रामीण मनिंदर सिंह ने उप-मंडल राजासांसी, थाना लोपोके के अंतर्गत आने वाले गांव बेहरवाल और आसपास के गांवों जैसे नंदली, नूरपुर, बराड़, कोलेवाल, बच्चीविंड और कामस्के के किसानों और गणमान्य लोगों से पराली न जलाने के संबंध में बातचीत।
मंगलवार दोपहर आयोजित शिविर के दौरान किसानों से पराली न जलाने की अपील भी की। एसएसपी मनिंदर सिंह ने किसानों को बताया कि पराली जलाने से उनकी भूमि की उर्वरा शक्ति नष्ट हो रही है। किसानों को ऐसा नहीं करना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि पराली को खेत में ही सोख लिया जाए और गेहूं की बुवाई की जाए, तो मिट्टी को उपजाऊ करने वाले पदार्थ बढ़ जाते हैं और मिट्टी की ताकत बढ़ती है। गेहूं की फसल में प्रयोग होने वाले डीएपी उर्वरक के स्थान पर वैकल्पिक स्रोतों का प्रयोग किया जा रहा है। डीएपी उर्वरक का प्रयोग मुख्य रूप से गेहूं की फसल में फास्फोरस तत्व की पूर्ति के लिए किया जाता है। इसमें 46 प्रतिशत फास्फोरस तथा 18 प्रतिशत नाइट्रोजन होता है। उन्होंने कहा कि इस उर्वरक के विकल्प के रूप में कुछ अन्य उर्वरकों का भी प्रयोग किया जा सकता है। उन्होंने किसानों से अपील की है कि जिन किसानों ने सब्सिडी के माध्यम से पराली प्रबंधन मशीनें खरीदी हैं, वे अपने प्रयोग के बाद इन मशीनों को अन्य किसानों को भी किराये पर दें ताकि पराली का अधिक से अधिक प्रबंधन किया जा सके तथा मशीनों का अधिक से अधिक उपयोग किया जा सके। एसएसपी ने कहा कि धान की कटाई के बाद पराली को जलाने से बचना चाहिए क्योंकि पराली जलाने से न केवल पर्यावरण प्रदूषित होता है बल्कि मिट्टी में मौजूद मित्र कीट व कई सूक्ष्म जीव भी मर जाते हैं, जिससे मिट्टी की उर्वरा शक्ति कम हो जाती है।
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अमृतसर । पराली न जलाए बिना और उर्वरकों का उपयोग करके गेहूं की बुवाई करने के संबंध में, एसएसपी ग्रामीण मनिंदर सिंह ने उप-मंडल राजासांसी, थाना लोपोके के अंतर्गत आने वाले गांव बेहरवाल और आसपास के गांवों जैसे नंदली, नूरपुर, बराड़, कोलेवाल, बच्चीविंड और कामस्के के किसानों और गणमान्य लोगों से पराली न जलाने के संबंध में बातचीत।
मंगलवार दोपहर आयोजित शिविर के दौरान किसानों से पराली न जलाने की अपील भी की। एसएसपी मनिंदर सिंह ने किसानों को बताया कि पराली जलाने से उनकी भूमि की उर्वरा शक्ति नष्ट हो रही है। किसानों को ऐसा नहीं करना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि पराली को खेत में ही सोख लिया जाए और गेहूं की बुवाई की जाए, तो मिट्टी को उपजाऊ करने वाले पदार्थ बढ़ जाते हैं और मिट्टी की ताकत बढ़ती है। गेहूं की फसल में प्रयोग होने वाले डीएपी उर्वरक के स्थान पर वैकल्पिक स्रोतों का प्रयोग किया जा रहा है। डीएपी उर्वरक का प्रयोग मुख्य रूप से गेहूं की फसल में फास्फोरस तत्व की पूर्ति के लिए किया जाता है। इसमें 46 प्रतिशत फास्फोरस तथा 18 प्रतिशत नाइट्रोजन होता है। उन्होंने कहा कि इस उर्वरक के विकल्प के रूप में कुछ अन्य उर्वरकों का भी प्रयोग किया जा सकता है। उन्होंने किसानों से अपील की है कि जिन किसानों ने सब्सिडी के माध्यम से पराली प्रबंधन मशीनें खरीदी हैं, वे अपने प्रयोग के बाद इन मशीनों को अन्य किसानों को भी किराये पर दें ताकि पराली का अधिक से अधिक प्रबंधन किया जा सके तथा मशीनों का अधिक से अधिक उपयोग किया जा सके। एसएसपी ने कहा कि धान की कटाई के बाद पराली को जलाने से बचना चाहिए क्योंकि पराली जलाने से न केवल पर्यावरण प्रदूषित होता है बल्कि मिट्टी में मौजूद मित्र कीट व कई सूक्ष्म जीव भी मर जाते हैं, जिससे मिट्टी की उर्वरा शक्ति कम हो जाती है।
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