{"_id":"67b24c3ec8cbb861eb06c23d","slug":"fake-website-of-mining-department-was-created-and-crores-of-rupees-were-defrauded-case-of-cyber-fraud-panchkula-news-c-71-1-mli1005-125654-2025-02-17","type":"story","status":"publish","title_hn":"Panchkula News: खनन विभाग की फर्जी वेबसाइट बना करोड़ों रुपये का लगाया चूना, साइबर फ्रॉड का केस","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Panchkula News: खनन विभाग की फर्जी वेबसाइट बना करोड़ों रुपये का लगाया चूना, साइबर फ्रॉड का केस
विज्ञापन
मोहाली। सरकार के खनन विभाग की वेबसाइट के नाम से मिलती-जुलती फर्जी वेबसाइट तैयार कर पंजाब सरकार के रेवेन्यू में करोड़ों रुपये का नुकसान पहुंचाने के आरोप में साइबर क्राइम पुलिस ने मामला दर्ज किया है। फर्जी वेबसाइट का पता चलने पर खनन विभाग के चीफ इंजीनियर डॉ. हरिंदरपाल सिंह बेदी ने साइबर पुलिस को शिकायत की थी। जांच के बाद अज्ञात के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है।
सूत्रों के अनुसार यह घोटाला 1000 करोड़ रुपये से भी अधिक का बताया जा रहा है। यह घोटाला पांच साल से चल रहा था। इस मामले में साइबर विंग की टेक्निकल टीम ने काफी सबूत एकत्र कर लिए हैं। आने वाले दिनों में एसडीओ, एक्सईएन और कंसल्टेंट स्तर के अधिकारियों पर गाज गिर सकती है।
जांच में सामने आया है कि सरकारी वेबसाइट के असल यूआरएल के अंत में पंजाब डॉट गोव डॉट इन था। माफिया ने मिलते-जुलते यूआरएल से फर्जी वेबसाइट बनाई जिसके अंत में पंजाब डॉट इन कर दिया। इसके बाद सरकारी वेबसाइट की गतिविधियों का डायवर्जन इन फर्जी वेबसाइट्स पर डाल दिया। यह भी बताया जा रहा है कि ठेकेदार को फायदा पहुंचाने के लिए ऐसा किया गया है। अवैध तौर से क्रशर व खड्डों से निकाले रेत-बजरी को इन्हीं डुप्लीकेट पर्चियों से टिप्पर में एक-जगह से दूसरी जगह भेजा जाता था।
विज्ञापन
एक पर्ची की करीब 200 डुप्लीकेट पर्चियां बनाई जाती थीं। सरकारी वेबसाइट पर रेत के लिए टिप्पर की पर्ची कटती थी। यह रॉयल्टी सरकार के खाते में जाती है। पर्ची के साथ ही टीएलएस सर्टिफिकेट भी मिलता था। जिस सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल कर सरकारी पर्ची कटती थी, उसमें डायवर्जन लगाया हुआ था। जैसे ही सरकारी पर्ची कटती थी, वह डायवर्जन बग उसकी डुप्लीकेट कॉपी फर्जी वेबसाइट पर अपलोड कर देता था। चेकिंग के दौरान एक अफसर को पर्ची पर सरकारी वेबसाइट के नाम पर शक हुआ। उसने अपने सीनियर को बात बताई। इसके बाद चेकिंग की गई तो इस तरह की कई पर्चियां मिलीं। इसके बाद मामला दर्ज करवाया गया।
विज्ञापन
सूत्रों के अनुसार यह घोटाला 1000 करोड़ रुपये से भी अधिक का बताया जा रहा है। यह घोटाला पांच साल से चल रहा था। इस मामले में साइबर विंग की टेक्निकल टीम ने काफी सबूत एकत्र कर लिए हैं। आने वाले दिनों में एसडीओ, एक्सईएन और कंसल्टेंट स्तर के अधिकारियों पर गाज गिर सकती है।
विज्ञापन
जांच में सामने आया है कि सरकारी वेबसाइट के असल यूआरएल के अंत में पंजाब डॉट गोव डॉट इन था। माफिया ने मिलते-जुलते यूआरएल से फर्जी वेबसाइट बनाई जिसके अंत में पंजाब डॉट इन कर दिया। इसके बाद सरकारी वेबसाइट की गतिविधियों का डायवर्जन इन फर्जी वेबसाइट्स पर डाल दिया। यह भी बताया जा रहा है कि ठेकेदार को फायदा पहुंचाने के लिए ऐसा किया गया है। अवैध तौर से क्रशर व खड्डों से निकाले रेत-बजरी को इन्हीं डुप्लीकेट पर्चियों से टिप्पर में एक-जगह से दूसरी जगह भेजा जाता था।
विज्ञापन
एक पर्ची की करीब 200 डुप्लीकेट पर्चियां बनाई जाती थीं। सरकारी वेबसाइट पर रेत के लिए टिप्पर की पर्ची कटती थी। यह रॉयल्टी सरकार के खाते में जाती है। पर्ची के साथ ही टीएलएस सर्टिफिकेट भी मिलता था। जिस सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल कर सरकारी पर्ची कटती थी, उसमें डायवर्जन लगाया हुआ था। जैसे ही सरकारी पर्ची कटती थी, वह डायवर्जन बग उसकी डुप्लीकेट कॉपी फर्जी वेबसाइट पर अपलोड कर देता था। चेकिंग के दौरान एक अफसर को पर्ची पर सरकारी वेबसाइट के नाम पर शक हुआ। उसने अपने सीनियर को बात बताई। इसके बाद चेकिंग की गई तो इस तरह की कई पर्चियां मिलीं। इसके बाद मामला दर्ज करवाया गया।