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सब कुछ अनलॉक, फिर भी किसान सब्जी मंडी की अनुमति नहीं
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पंचकूला। आज सब कुछ अनलॉक हो चुका है। धीरे-धीरे लोग अपने रोटी रोजगार की तलाश में भी जुट गए हैं, लेकिन कोविड-19 महामारी की मार आज भी पंचकूला के किसान सब्जी मंडी के फुटकर विक्रेताओं को झेलनी पड़ रही है। पंचकूला के आढ़तियों के सामने दो जून की रोटी का संकट खड़ा हो गया है। इस समस्या से निजात पाने के लिए किसान सब्जी मंडी के फुटकर विक्रेताओं ने मेयर कुलभूषण गोयल को ज्ञापन सौंप मंडियों को खोलने की मांग कर चुके हैं। लेकिन, नतीजा सिफर रहा।
प्रशासनिक और विभागीय उपेक्षा के कारण कुछ सब्जी विक्रेता आत्महत्या को भी विवश हो रहे हैं। इनमें सब्जी उत्पादक किसान तथा पंचकूला में चार अलग-अलग सेक्टरों में अस्थाई मंडियां लगाकर फल और सब्जी बेचकर अपनी आजीविका चलाते हैं। साथ ही इस कार्य से जुड़े छोटे ट्रांसपोर्ट कारोबारी भी अब हाथ पर हाथ रखकर बैठे हैं। किसान सब्जी मंडी के फुटकर विक्रेताओं का आरोप है कि प्रशासन तानाशाही की वजह से सब कुछ खो चुके हैं। अब इनके पास दो जून की रोटी का भी संकट खड़ा हो गया है। इस व्यवसाय से जुड़े लोगों का कहना है कि कई बार उपायुक्त, विधायक एवं हरियाणा विधानसभा के स्पीकर ज्ञानचंद गुप्ता, नगर निगम के मेयर कुलभूषण गोयल ही नहीं हरियाणा मार्केटिंग बोर्ड के मुख्य प्रशासक से मिलकर मंडी लगाने की स्वीकृति देने की गुहार लगा चुके हैं।
शहर में अलग-अलग दिन और अलग-अलग जगह फल और सब्जी बिक्री की मंडी लगाने की जो व्यवस्था 1991 से सफलतापूर्वक चल रही थी अब उस व्यवस्था में कोविड-19 में संक्रमण का नाम लेकर न केवल बंद करने की साजिश की जा रही है, बल्कि अव्यवहारिक और असंगत तरीके से क्रियान्वित कर पहले से इस रोजगार में लगे पेशेवर मेहनतकश लोगों की रोजी रोटी छीनने के मार्ग को अवरुद्ध किया जा रहा है। करीब 1000 लोग मंडियों के इस व्यवसाय से प्रत्यक्ष परोक्ष रूप से जुडे़ हुए हैं। रोजगार की व्यवस्था न होने के कारण आज पंचकूला के किसान सब्जी मंडी के फुटकर विक्रेता अपने घर का खर्च भी नहीं चला पा रहे हैं। जबकि, चंडीगढ़ के सेक्टर-26 में भी कोविड के कारण मंडी को बंद नहीं किया गया था। सेक्टर-26 मंडी आज भी पूरी क्षमता के साथ खुली हुई है।
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पंचकूला के किसान सब्जी मंडी के फुटकर विक्रेताओं का कहना है कि जब सेक्टर-26 की मंडी खुल सकती है और तो पंचकूला के चार सेक्टरों की मंडी खोलने में प्रशासन और विभागीय अधिकारियों ने क्यों अपनी आंखें बंद कर ली हैं। पंचकूला के किसान सब्जी मंडी के फुटकर विक्रेता का कहना है कि सभी फुटकर विक्रेताओं ने टीकाकरण भी करा लिया है और पंचकूला के 80 प्रतिशत लोगों ने भी टीकाकरण करा लिया है।
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प्रशासनिक और विभागीय उपेक्षा के कारण कुछ सब्जी विक्रेता आत्महत्या को भी विवश हो रहे हैं। इनमें सब्जी उत्पादक किसान तथा पंचकूला में चार अलग-अलग सेक्टरों में अस्थाई मंडियां लगाकर फल और सब्जी बेचकर अपनी आजीविका चलाते हैं। साथ ही इस कार्य से जुड़े छोटे ट्रांसपोर्ट कारोबारी भी अब हाथ पर हाथ रखकर बैठे हैं। किसान सब्जी मंडी के फुटकर विक्रेताओं का आरोप है कि प्रशासन तानाशाही की वजह से सब कुछ खो चुके हैं। अब इनके पास दो जून की रोटी का भी संकट खड़ा हो गया है। इस व्यवसाय से जुड़े लोगों का कहना है कि कई बार उपायुक्त, विधायक एवं हरियाणा विधानसभा के स्पीकर ज्ञानचंद गुप्ता, नगर निगम के मेयर कुलभूषण गोयल ही नहीं हरियाणा मार्केटिंग बोर्ड के मुख्य प्रशासक से मिलकर मंडी लगाने की स्वीकृति देने की गुहार लगा चुके हैं।
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शहर में अलग-अलग दिन और अलग-अलग जगह फल और सब्जी बिक्री की मंडी लगाने की जो व्यवस्था 1991 से सफलतापूर्वक चल रही थी अब उस व्यवस्था में कोविड-19 में संक्रमण का नाम लेकर न केवल बंद करने की साजिश की जा रही है, बल्कि अव्यवहारिक और असंगत तरीके से क्रियान्वित कर पहले से इस रोजगार में लगे पेशेवर मेहनतकश लोगों की रोजी रोटी छीनने के मार्ग को अवरुद्ध किया जा रहा है। करीब 1000 लोग मंडियों के इस व्यवसाय से प्रत्यक्ष परोक्ष रूप से जुडे़ हुए हैं। रोजगार की व्यवस्था न होने के कारण आज पंचकूला के किसान सब्जी मंडी के फुटकर विक्रेता अपने घर का खर्च भी नहीं चला पा रहे हैं। जबकि, चंडीगढ़ के सेक्टर-26 में भी कोविड के कारण मंडी को बंद नहीं किया गया था। सेक्टर-26 मंडी आज भी पूरी क्षमता के साथ खुली हुई है।
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पंचकूला के किसान सब्जी मंडी के फुटकर विक्रेताओं का कहना है कि जब सेक्टर-26 की मंडी खुल सकती है और तो पंचकूला के चार सेक्टरों की मंडी खोलने में प्रशासन और विभागीय अधिकारियों ने क्यों अपनी आंखें बंद कर ली हैं। पंचकूला के किसान सब्जी मंडी के फुटकर विक्रेता का कहना है कि सभी फुटकर विक्रेताओं ने टीकाकरण भी करा लिया है और पंचकूला के 80 प्रतिशत लोगों ने भी टीकाकरण करा लिया है।