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Panchkula News: सरकारी जमीन पर 40 साल से कब्जा, 21 ट्रक बॉडी बिल्डरों पर दो लाख जुर्माना
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चंडीगढ़। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने सरकारी जमीन पर करीब चार दशक से चले आ रहे अवैध कब्जे के मामले में कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने 21 बस और ट्रक बॉडी बिल्डरों की याचिका खारिज कर दी। याचिकाकर्ताओं पर दो लाख रुपये का हर्जाना लगाया गया है।
हाईकोर्ट ने फतेहगढ़ साहिब के उपायुक्त को सरकारी जमीन से अतिक्रमण एक सप्ताह में हटाने का निर्देश दिया। उपायुक्त को अनुपालन रिपोर्ट भी दाखिल करनी होगी। राज्य सरकार ने वर्ष 1984 में फतेहगढ़ साहिब में अनाज मंडी के लिए जमीन का अधिग्रहण किया था। 21 याचिकाकर्ता इसी जमीन पर बस और ट्रक की बॉडी बनाने का काम करते रहे। उन्होंने लंबे समय तक वहां कब्जा बनाए रखा।
यह मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा था। सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को नौ एकड़ जमीन बाजार दर पर देने का निर्देश दिया था। वित्तीय आयुक्त ने वर्ष 1998 में इस जमीन की कीमत करीब 4.28 करोड़ रुपये निर्धारित की। याचिकाकर्ताओं को यह रकम जमा करने के लिए कहा गया था।
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बेदखली की कार्रवाई :
याचिकाकर्ताओं ने निर्धारित रकम जमा नहीं की। उन्होंने अधिग्रहित जमीन भी खाली नहीं की। इसके बाद सरकारी जमीन खाली कराने की कार्रवाई शुरू हुई। वर्ष 2014 में कलेक्टर ने बेदखली के आदेश पारित किए।
पर्याप्त अवसरों के बावजूद :
कलेक्टर के बेदखली आदेशों को बाद की न्यायिक कार्रवाई में भी बरकरार रखा गया। मामला दोबारा हाईकोर्ट पहुंचा। अदालत ने कहा कि वर्ष 1991 से पर्याप्त अवसर मिलने के बावजूद उन्होंने न तो रकम जमा की और न ही जमीन खाली की। हाईकोर्ट ने सभी 21 याचिकाकर्ताओं पर संयुक्त रूप से दो लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। यह रकम दो महीने के भीतर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के वकील परिवार कल्याण कोष में जमा करनी होगी।
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हाईकोर्ट ने फतेहगढ़ साहिब के उपायुक्त को सरकारी जमीन से अतिक्रमण एक सप्ताह में हटाने का निर्देश दिया। उपायुक्त को अनुपालन रिपोर्ट भी दाखिल करनी होगी। राज्य सरकार ने वर्ष 1984 में फतेहगढ़ साहिब में अनाज मंडी के लिए जमीन का अधिग्रहण किया था। 21 याचिकाकर्ता इसी जमीन पर बस और ट्रक की बॉडी बनाने का काम करते रहे। उन्होंने लंबे समय तक वहां कब्जा बनाए रखा।
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यह मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा था। सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को नौ एकड़ जमीन बाजार दर पर देने का निर्देश दिया था। वित्तीय आयुक्त ने वर्ष 1998 में इस जमीन की कीमत करीब 4.28 करोड़ रुपये निर्धारित की। याचिकाकर्ताओं को यह रकम जमा करने के लिए कहा गया था।
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बेदखली की कार्रवाई :
याचिकाकर्ताओं ने निर्धारित रकम जमा नहीं की। उन्होंने अधिग्रहित जमीन भी खाली नहीं की। इसके बाद सरकारी जमीन खाली कराने की कार्रवाई शुरू हुई। वर्ष 2014 में कलेक्टर ने बेदखली के आदेश पारित किए।
पर्याप्त अवसरों के बावजूद :
कलेक्टर के बेदखली आदेशों को बाद की न्यायिक कार्रवाई में भी बरकरार रखा गया। मामला दोबारा हाईकोर्ट पहुंचा। अदालत ने कहा कि वर्ष 1991 से पर्याप्त अवसर मिलने के बावजूद उन्होंने न तो रकम जमा की और न ही जमीन खाली की। हाईकोर्ट ने सभी 21 याचिकाकर्ताओं पर संयुक्त रूप से दो लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। यह रकम दो महीने के भीतर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के वकील परिवार कल्याण कोष में जमा करनी होगी।