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पड़ोसी राज्यों के बोझ को कम करेगा ई-अस्पताल
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चंडीगढ़। शहर के अस्पतालों पर पड़ोसी राज्यों पर दबाव बढ़ता जा रहा है। इसे कम करने के लिए स्वास्थ्य विभाग अब ई-अस्पताल की योजना पर काम कर रहा है। इसके तहत कम गंभीर मरीज व नियमित इलाज कराने वाले मरीजों को अस्पताल आने की जरूरत नहीं होगी। ई-अस्पताल केंद्र सरकार की ई-संजीवनी की तर्ज पर ही काम करेगा, जहां मरीजों को डॉक्टर ऑनलाइन ही देखेंगे। रिपोर्ट को भी ऑनलाइन देखा जाएगा और दवाइयां भी बताईं जाएंगी।
यूनाइटेड नेशन डेवलपमेंट प्रोग्राम (यूएनडीपी) के कार्यक्रम में यूटी प्रशासन के स्वास्थ्य विभाग की भविष्य की योजनाओं के बारे में बताया है। स्वास्थ्य सचिव यशपाल गर्ग ने बताया कि जीएमसीएच-32 में ई-संजीवनी का लोग लाभ उठा रहे हैं। भविष्य में ई-अस्पताल शुरू करने की योजना है। इसको शुरू करने का उद्देश्य अस्पतालों में मरीजों की संख्या को कम करना है। अस्पताल में मरीज तभी आएं जब जरूरी हो। स्वास्थ्य सचिव ने पड़ोसी राज्यों के मरीजों के बढ़ते दबाव का भी जिक्र किया। योजना में स्वास्थ्य विभाग ने बताया है कि मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य केंद्र (एमसीएच) का विकेंद्रीकरण करना होगा। कम से कम पांच और एमसीएच केंद्रों की स्थापना की आवश्यकता है। इन्फ्रास्ट्रक्चर, मैनपावर, इक्विपमेंट और दवाइयों को एक साथ प्लान करने की जरूरत है। पेरीफेरी इलाकों को विशेष रूप से आपातकालीन सेवाओं को मजबूत करने की आवश्यकता है। कांट्रेक्ट से ज्यादा नियमित कर्मियों की भर्ती करनी होगी, ताकि स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर बनाया जा सके।
शहर में 10 हजार लोगों पर केवल 20 डॉक्टर
स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट में कहा गया है कि शहर में 10 हजार लोगों पर केवल 20 डॉक्टर, 11 के करीब नॉन ऑक्सीजन बेड, 4 के करीब वेंटिलेटर बेड, पांच आईसीयू बेड, 22 ऑक्सीजन बेड की व्यवस्था है। आंकड़े अन्य राज्यों से काफी बेहतर हैं लेकिन विभाग ने क्षमता को बढ़ाने की बात कही है। इसके अलावा 10 हजार लोगों पर 27 के करीब नर्सिंग स्टाफ है। रोजाना ओपीडी में आने वाले मरीजों की संख्या 6112 के करीब है। जीएमसीएच-32 और पीजीआई में एक-एक टेली मेडिसन की सुविधा उपलब्ध है, जबकि स्वास्थ्य केंद्रों में टेेली मेडिसन की सुविधा 29 के करीब है।
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भविष्य की योजनाएं
- ई-अस्पताल
- ई-कार्यालय
- टेली-परामर्श
- डिजिटल कनेक्टिविटी
- स्वास्थ्य और कल्याण केंद्रों में आपातकालीन, ओरल, मानसिक, नेत्र, ईएनटी सेवाएं और बुजुर्ग देखभाल सेवाओं की विस्तृत शृंखला शुरू करना
- लक्ष्य के अनुसार स्वास्थ्य सुविधाओं का राष्ट्रीय गुणवत्ता आश्वासन मानक (एनक्यूएएस) प्रमाणीकरण
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यूनाइटेड नेशन डेवलपमेंट प्रोग्राम (यूएनडीपी) के कार्यक्रम में यूटी प्रशासन के स्वास्थ्य विभाग की भविष्य की योजनाओं के बारे में बताया है। स्वास्थ्य सचिव यशपाल गर्ग ने बताया कि जीएमसीएच-32 में ई-संजीवनी का लोग लाभ उठा रहे हैं। भविष्य में ई-अस्पताल शुरू करने की योजना है। इसको शुरू करने का उद्देश्य अस्पतालों में मरीजों की संख्या को कम करना है। अस्पताल में मरीज तभी आएं जब जरूरी हो। स्वास्थ्य सचिव ने पड़ोसी राज्यों के मरीजों के बढ़ते दबाव का भी जिक्र किया। योजना में स्वास्थ्य विभाग ने बताया है कि मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य केंद्र (एमसीएच) का विकेंद्रीकरण करना होगा। कम से कम पांच और एमसीएच केंद्रों की स्थापना की आवश्यकता है। इन्फ्रास्ट्रक्चर, मैनपावर, इक्विपमेंट और दवाइयों को एक साथ प्लान करने की जरूरत है। पेरीफेरी इलाकों को विशेष रूप से आपातकालीन सेवाओं को मजबूत करने की आवश्यकता है। कांट्रेक्ट से ज्यादा नियमित कर्मियों की भर्ती करनी होगी, ताकि स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर बनाया जा सके।
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शहर में 10 हजार लोगों पर केवल 20 डॉक्टर
स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट में कहा गया है कि शहर में 10 हजार लोगों पर केवल 20 डॉक्टर, 11 के करीब नॉन ऑक्सीजन बेड, 4 के करीब वेंटिलेटर बेड, पांच आईसीयू बेड, 22 ऑक्सीजन बेड की व्यवस्था है। आंकड़े अन्य राज्यों से काफी बेहतर हैं लेकिन विभाग ने क्षमता को बढ़ाने की बात कही है। इसके अलावा 10 हजार लोगों पर 27 के करीब नर्सिंग स्टाफ है। रोजाना ओपीडी में आने वाले मरीजों की संख्या 6112 के करीब है। जीएमसीएच-32 और पीजीआई में एक-एक टेली मेडिसन की सुविधा उपलब्ध है, जबकि स्वास्थ्य केंद्रों में टेेली मेडिसन की सुविधा 29 के करीब है।
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भविष्य की योजनाएं
- ई-अस्पताल
- ई-कार्यालय
- टेली-परामर्श
- डिजिटल कनेक्टिविटी
- स्वास्थ्य और कल्याण केंद्रों में आपातकालीन, ओरल, मानसिक, नेत्र, ईएनटी सेवाएं और बुजुर्ग देखभाल सेवाओं की विस्तृत शृंखला शुरू करना
- लक्ष्य के अनुसार स्वास्थ्य सुविधाओं का राष्ट्रीय गुणवत्ता आश्वासन मानक (एनक्यूएएस) प्रमाणीकरण