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Panchkula News: डॉक्टरों की सलाह, दिल का लोग ठंड में रखे ख्याल
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अस्पताल में बढ़ी हृदय रोगियों की ओपीडी, रो दो से तीन मरीज इमरजेंसी में ले रहे इलाज विशेषज्ञों ने दी सलाह, रहता है गंभीर बीमारियों का खतरा, ऐसी ठंड में घर से न निकलें हृदय रोगी
माई सिटी रिपोर्टर
पंचकूला। कड़ाके की ठंड के चलते हृदय संबंधी मरीजों को ज्यादा दिक्कतें झेलनी पड़ रही हैं। नतीजतन सेक्टर-6 सिविल अस्पताल में ओपीडी भी बढ़ रही है। विशेषज्ञों के अनुसार तो ठंड का ऐसे मरीजों को प्रतिकूल असर पड़ता है। सर्दी में इन रोगियों की धड़कन कम होने का खतरा बढ़ जाता है। छाती में दर्द भी महसूस होता है। डॉक्टर ऐसे में लोगों को ठंड से बचने की सलाह दे रहे हैं।
नागरिक अस्पताल में स्थिति यह है कि रोज दो से तीन हार्ट के मरीजों को इमरजेंसी में भर्ती करवाना पड़ रहा है। डॉक्टर हृदय रोगियों को अधिकतर समय घर में ही रहने की सलाह दे रहे हैं। इन रोगियों में धड़कन कम होने का खतरा रहता है। छाती का दर्द भी मरीजों को हो रहा है। पंचकूला हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. अनिल सूद ने बताया कि कड़ाके की ठंड ने बुजुर्गों में हाइपोथर्मिया, बेल्स पल्सी और ब्रोंकाइटिस का खतरा बढ़ा दिया है। ये सर्दी में होने वाली भयंकर बीमारी है। इसमें शरीर का तापमान गिर जाता है। सांस लेने में दिक्कत होती है।
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पंचकूला एमडी मेडिसिन डॉ. अश्वनी भटनागर ने बताया कि सर्दी में हृदयघात, हाइपोथर्मिया, बेल्स पाल्सी व ब्रोंकाइटिस का खतरा अधिक रहता है। सामान्य भाषा में कहें तो यह वायरल संक्रमण है, जो फेफड़ों में सूजन का कारण बनता है। श्वास लेने में दिक्कत, गले में खराश, बुखार और पसलियों में घरघराहट और डिहाइड्रेशन हो सकता है। लापरवाही बरतने पर अस्पताल में भर्ती होने की नौबत आ जाती है। 50 से अधिक आयु के बाद बेल्स पाल्सी यानी फेशियल पैरालिसिस और हार्ट अटैक का खतरा ज्यादा रहता है। कान के पास से सेवेंथ क्रेनियल नस गुजरती है, जो तेज ठंड होने पर सिकुड़ जाती है। इसकी वजह से यह बीमारी होती है। ठंड से बचाव ही उपाय है। अस्पताल में खांसी-जुकाम-बुखार के मरीज बढ़े हैं।
ये बरतें सावधानियां
-शरीर को ढकने वाले पर्याप्त गर्म कपड़े पहनें
- प्रतिदिन एक घंटे धूप का आनंद लें
- हर बार गुनगुना पानी पीएं
- तेलीय खाद्य पदार्थों का सेवन न करें
- स्वच्छ वातावरण में व्यायाम करें
- बासी और ठंडा भेाजन न खाएं
- कोल्ड ड्रिंक और आइसक्रीम से परहेज करें
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माई सिटी रिपोर्टर
पंचकूला। कड़ाके की ठंड के चलते हृदय संबंधी मरीजों को ज्यादा दिक्कतें झेलनी पड़ रही हैं। नतीजतन सेक्टर-6 सिविल अस्पताल में ओपीडी भी बढ़ रही है। विशेषज्ञों के अनुसार तो ठंड का ऐसे मरीजों को प्रतिकूल असर पड़ता है। सर्दी में इन रोगियों की धड़कन कम होने का खतरा बढ़ जाता है। छाती में दर्द भी महसूस होता है। डॉक्टर ऐसे में लोगों को ठंड से बचने की सलाह दे रहे हैं।
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नागरिक अस्पताल में स्थिति यह है कि रोज दो से तीन हार्ट के मरीजों को इमरजेंसी में भर्ती करवाना पड़ रहा है। डॉक्टर हृदय रोगियों को अधिकतर समय घर में ही रहने की सलाह दे रहे हैं। इन रोगियों में धड़कन कम होने का खतरा रहता है। छाती का दर्द भी मरीजों को हो रहा है। पंचकूला हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. अनिल सूद ने बताया कि कड़ाके की ठंड ने बुजुर्गों में हाइपोथर्मिया, बेल्स पल्सी और ब्रोंकाइटिस का खतरा बढ़ा दिया है। ये सर्दी में होने वाली भयंकर बीमारी है। इसमें शरीर का तापमान गिर जाता है। सांस लेने में दिक्कत होती है।
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पंचकूला एमडी मेडिसिन डॉ. अश्वनी भटनागर ने बताया कि सर्दी में हृदयघात, हाइपोथर्मिया, बेल्स पाल्सी व ब्रोंकाइटिस का खतरा अधिक रहता है। सामान्य भाषा में कहें तो यह वायरल संक्रमण है, जो फेफड़ों में सूजन का कारण बनता है। श्वास लेने में दिक्कत, गले में खराश, बुखार और पसलियों में घरघराहट और डिहाइड्रेशन हो सकता है। लापरवाही बरतने पर अस्पताल में भर्ती होने की नौबत आ जाती है। 50 से अधिक आयु के बाद बेल्स पाल्सी यानी फेशियल पैरालिसिस और हार्ट अटैक का खतरा ज्यादा रहता है। कान के पास से सेवेंथ क्रेनियल नस गुजरती है, जो तेज ठंड होने पर सिकुड़ जाती है। इसकी वजह से यह बीमारी होती है। ठंड से बचाव ही उपाय है। अस्पताल में खांसी-जुकाम-बुखार के मरीज बढ़े हैं।
ये बरतें सावधानियां
-शरीर को ढकने वाले पर्याप्त गर्म कपड़े पहनें
- प्रतिदिन एक घंटे धूप का आनंद लें
- हर बार गुनगुना पानी पीएं
- तेलीय खाद्य पदार्थों का सेवन न करें
- स्वच्छ वातावरण में व्यायाम करें
- बासी और ठंडा भेाजन न खाएं
- कोल्ड ड्रिंक और आइसक्रीम से परहेज करें