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Panchkula News: मंडी बोर्ड कर्मचारियों की बर्खास्तगी अनुचित करार

Thu, 12 Feb 2026 01:36 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Thu, 12 Feb 2026 01:36 AM IST
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Dismissal of Mandi Board employees termed unfair
चंडीगढ़। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने पंजाब राज्य कृषि विपणन बोर्ड (मंडी बोर्ड) के तहत विभिन्न मार्केट कमेटियों में कार्यरत क्लास-तृतीय और चतुर्थ कर्मचारियों को बड़ी राहत देते हुए उनकी सेवाएं समाप्त करने के आदेश रद्द कर दिए हैं। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि वर्ष 2011 में की गई नियुक्तियां भले ही कुछ प्रक्रियात्मक खामियों से ग्रस्त हों लेकिन उन्हें अवैध नहीं कहा जा सकता और 14 वर्षों की निरंतर सेवा के बाद रद्द नहीं किया जा सकता।
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जस्टिस हरप्रीत सिंह बराड़ की एकल पीठ ने 18 संबंधित रिट याचिकाओं का निपटारा करते हुए यह फैसला सुनाया। प्रमुख याचिका संदीप सिंह और अन्य ने दायर की थी। इसमें 1 अगस्त 2025 को जारी उन आदेशों को चुनौती दी गई थी जिनके तहत मंडी बोर्ड के सचिव ने वर्ष 2011 में स्वीकृत नियुक्ति प्रस्तावों को रद्द कर दिया था। इन नियुक्तियों में ऑक्शन रिकॉर्डर, क्लर्क, चपरासी, चौकीदार और केयरटेकर जैसे पद शामिल थे।
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इससे पहले वर्ष 2012 में भी नियुक्तियां रद्द करने का प्रयास किया गया था जिसे हाईकोर्ट ने 2019 में निरस्त करते हुए नए सिरे से सुनवाई के निर्देश दिए थे। इसके बावजूद 2025 में पुनः कर्मचारियों की सेवाएं समाप्त कर दी गई थीं। हाईकोर्ट ने माना कि कर्मचारियों की नियुक्ति संबंधित मार्केट कमेटियों की ओर से विज्ञापन जारी कर, शैक्षणिक योग्यता के आधार पर मेरिट सूची बनाकर और प्रस्ताव पारित कर की गई थी।
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नियुक्तियां स्वीकृत पदों पर योग्य उम्मीदवारों को दी गई थीं और इनमें धोखाधड़ी या नियमों की पूर्ण अवहेलना का कोई प्रमाण नहीं मिला। कोर्ट ने कहा कि कर्मचारी 14 वर्षों से लगातार सेवा दे रहे हैं, कई वर्षों तक उन्होंने अंतरिम न्यायिक संरक्षण में काम किया है और अब उनकी आयु अधिक हो चुकी है।

न्यायालय ने कहा कि सार्वजनिक रोजगार स्थिरता और सुरक्षा का आश्वासन देता है और अनुभवी कर्मचारियों को इस चरण में हटाना राज्यहित के भी खिलाफ है। हाईकोर्ट ने 2025 के सभी रद्दीकरण आदेशों को निरस्त करते हुए निर्देश दिया कि कर्मचारियों को कार्य अवधि के अनुसार वेतन बकाया और अन्य लाभ छह सप्ताह में जारी किए जाएं।
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