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हरियाणा : धनेश अदलखा पर राज्य फार्मेसी काउंसिल चेयरमैन पद पर कब्जे का आरोप
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चंडीगढ़। हरियाणा राज्य फार्मेसी काउंसिल के प्रधान पद पर धनेश अदलखा के आसीन को होने अवैध बताते हुए दाखिल याचिका पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने स्वास्थ्य विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव, हरियाणा फार्मेसी काउंसिल के रजिस्ट्रार व अन्य को नोटिस जारी करते हुए जवाब तलब कर लिया है। रोहतक निवासी नीरज कुमार शर्मा ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करते हुए बताया कि हरियाणा राज्य फार्मेसी काउंसिल में फार्मेसी काउंसिल के सदस्यों द्वारा प्रधान का चुनाव किया जाता है। सरकार के पास प्रधान नियुक्त करने का कोई अधिकार नहीं है।
फार्मेसी एक्ट 1948 और स्टेट फार्मेसी काउंसिल नियम 1951 की अवहेलना करते हुए अदलखा पिछले काफी समय से अवैध रूप से काउंसिल के प्रधान पद पर कब्जा किए बैठे हैं। काउंसिल के चुनाव वर्ष 2014 में 5 साल के लिए हुए थे जिसमें कुल 14 सदस्य चुने गए थे। 6 सदस्य चुनाव जीतकर आए थे और 5 सरकार की ओर से मनोनीत किए गए थे। तीन सदस्य एक्स ऑफिशियो मेंबर थे।
2017 में सरकार ने पंकज जैन को प्रधान नियुक्त कर दिया गया, उनकी मृत्यु के बाद सोहन लाल कांसल प्रधान बन गए और मार्च 2019 तक इस पद पर रहे। इसके बाद धनेश अदलखा काउंसिल के प्रधान सरकार द्वारा नियुक्त कर दिए गए और सोहनलाल कंसल को उप प्रधान बना दिया गया। इस काउंसिल का कार्यकाल मार्च 2019 में समाप्त हो चुका है। जिसके चलते धनेश अदलखा ने वर्ष 2020 में काउंसिल के निर्वाचित सदस्य पद से त्यागपत्र दे दिया था। इसके बाद वह सदस्य नहीं रहे। फिर सरकार द्वारा पांच सदस्य मनोनीत कर दिए गए, जिसमें धनेश अदलखा भी शामिल हैं। नियम के अनुसार नए सदस्य चुनाव के बाद नियुक्त किए जाने चाहिए थे, लेकिन सरकार ने चुनाव से पहले ही सदस्य मनोनीत कर दिए।
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फार्मेसी एक्ट 1948 और स्टेट फार्मेसी काउंसिल नियम 1951 की अवहेलना करते हुए अदलखा पिछले काफी समय से अवैध रूप से काउंसिल के प्रधान पद पर कब्जा किए बैठे हैं। काउंसिल के चुनाव वर्ष 2014 में 5 साल के लिए हुए थे जिसमें कुल 14 सदस्य चुने गए थे। 6 सदस्य चुनाव जीतकर आए थे और 5 सरकार की ओर से मनोनीत किए गए थे। तीन सदस्य एक्स ऑफिशियो मेंबर थे।
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2017 में सरकार ने पंकज जैन को प्रधान नियुक्त कर दिया गया, उनकी मृत्यु के बाद सोहन लाल कांसल प्रधान बन गए और मार्च 2019 तक इस पद पर रहे। इसके बाद धनेश अदलखा काउंसिल के प्रधान सरकार द्वारा नियुक्त कर दिए गए और सोहनलाल कंसल को उप प्रधान बना दिया गया। इस काउंसिल का कार्यकाल मार्च 2019 में समाप्त हो चुका है। जिसके चलते धनेश अदलखा ने वर्ष 2020 में काउंसिल के निर्वाचित सदस्य पद से त्यागपत्र दे दिया था। इसके बाद वह सदस्य नहीं रहे। फिर सरकार द्वारा पांच सदस्य मनोनीत कर दिए गए, जिसमें धनेश अदलखा भी शामिल हैं। नियम के अनुसार नए सदस्य चुनाव के बाद नियुक्त किए जाने चाहिए थे, लेकिन सरकार ने चुनाव से पहले ही सदस्य मनोनीत कर दिए।
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