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जांच में निर्दोष कर्मी की सेवा से बाहर रहने की अवधि नौकरी का हिस्सा: हाईकोर्ट

Thu, 21 Jan 2021 01:38 AM IST
Panchkula Bureau पंचकुला ब्‍यूरो
Updated Thu, 21 Jan 2021 01:38 AM IST
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Detection of innocent workers out of service is part of the job: High Court
चंडीगढ़। भ्रष्टाचार केआरोप में बर्खास्त हेेड कांस्टेबल रघबीर सिंह की याचिका पर सुनवाई करते हुए पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने यह स्पष्ट कर दिया कि यदि कर्मी के खिलाफ आपराधिक व विभागीय जांच में आरोप साबित नहीं होता है तो जिस अवधि में वह सेवा में नहीं था उस अवधि को उसकी सेवा अवधि मानकर उसका लाभ दिया जाना अनिवार्य है।
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याचिका दाखिल करते हुए रघबीर सिंह ने हाईकोर्ट को बताया कि दिसंबर 2012 को उसके खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधक कानून के तहत एफआईआर दर्ज की गई थी। एसएसपी मोहाली ने एफआईआर दर्ज होते ही उसे बर्खास्त कर दिया। इसके बाद जांच आरंभ हुई और पुलिस ने अदालत में अनट्रेस रिपोर्ट दाखिल कर दी। ट्रायल कोर्ट ने भी इसे स्वीकार कर लिया। इसके बाद याची ने सेवा बहाली के लिए मांगपत्र दिया, जिसे मंजूर करते हुए डीजीपी ने उसकी बहाली के आदेश जारी कर दिए। याची ने इसके बाद पंजाब सरकार से बर्खास्तगी की अवधि के वेतन की मांग की जिसे अस्वीकार कर दिया गया। इसके चलते याची ने हाईकोर्ट की शरण ली।
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पंजाब सरकार ने हाईकोर्ट में दलील रखी की काम नहीं तो वेतन नहीं के सिद्घांत पर याची का दावा खारिज किया गया है। साथ ही यह भी कहा कि जब कर्मी पर आपराधिक मामले की कार्रवाई हो तो उस अवधि के वेतन व अन्य लाभ का वह हकदार नहीं होता है। हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार की दलील खारिज करते हुए कहा कि आपराधिक मामले की कार्रवाई तब आरंभ होती है जब आरोप तय किए जाते हैं। इस मामले में तो अनट्रेस रिपोर्ट दाखिल की गई है ऐसे में याची पर कभी आपराधिक मामले की कार्रवाई चली ही नहीं।
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छह वर्ष के वेतन और वरिष्ठता का पात्र है याची
साथ ही हाईकोर्ट ने कहा कि इस मामले में 2018 में विभागीय जांच में भी याची निर्दोष पाया गया है। ऐसे में बर्खास्तगी के 6 वर्ष के वेतन और वरिष्ठता का वह पात्र है। हाईकोर्ट ने तीन माह केभीतर याची को वेतन की लंबित राशि जारी करने का आदेश दिया है। साथ ही याची के जूनियरों की प्रमोशन की तारीख से उसके प्रमोशन पर विचार करने का भी आदेश दिया है।
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