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डेरे की संपत्ति निजी जागीर नहीं, यह सार्वजनिक चरित्र की : हाईकोर्ट

Wed, 25 Feb 2026 01:53 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Wed, 25 Feb 2026 01:53 AM IST
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Dera property is not a private fiefdom, it is of public character: High Court
चंडीगढ़। लुधियाना के जोहालां के डेरा निर्मल कुटिया से जुड़े बहुचर्चित प्रकरण में अहम फैसला सुनाते हुए पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि डेरा की संपत्ति किसी व्यक्ति की निजी जागीर नहीं, बल्कि सार्वजनिक चरित्र से युक्त धार्मिक संस्थान की संपत्ति है। अदालत ने अपीलीय अदालत के उस आदेश को बरकरार रखा, जिसमें डेरा प्रमुख बाबा जीत सिंह को आय-व्यय और संपत्तियों का पूरा लेखा-जोखा प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया था।
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अदालत दो पुनरीक्षण याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई कर रही थी, जो संत जसपाल सिंह और बाबा जीत सिंह द्वारा दायर की गई थीं। विवाद डेरा निधियों के कथित कुप्रबंधन और संपत्तियों के दुरुपयोग के आरोपों से संबंधित है। अदालत ने टिप्पणी की कि जिस संपत्ति पर विवाद है, वह किसी भी पक्षकार की व्यक्तिगत संपत्ति नहीं है। डेरा एक सार्वजनिक धार्मिक संस्था है और उसकी संपत्तियां साधुओं व श्रद्धालुओं के हित में नियोजित हैं। ऐसे में न्यायालय का दायित्व है कि इन संपत्तियों का दुरुपयोग या कुप्रबंधन न हो।
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याचिका में आरोप लगाया गया कि जून 2021 में डेरा निधि से मर्सिडीज-बेंज कार खरीदी गई, जबकि इससे पहले वर्ष 2005 में एक अन्य मर्सिडीज और अगस्त 2017 में टोयोटा लैंड क्रूजर भी कथित तौर पर डेरा के पैसों से खरीदी गई। आरोप है कि बाबा ने निजी सुरक्षा कर्मियों पर भी डेरा की धनराशि खर्च की और अपने प्रभाव का प्रदर्शन किया।
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याचिकाकर्ता ने यह भी कहा कि बाबा ने कई मौकों पर अपनी त्रुटियां स्वीकार कर सुधार का आश्वासन दिया लेकिन बाद में कथित रूप से सांसारिक विलासिता में लिप्त रहे, जो एक साधु और डेरा प्रमुख की मर्यादा के विपरीत है। यह भी आरोप है कि जिन चल-अचल संपत्तियों का रिकॉर्ड उनके व्यक्तिगत नाम पर है, वे वास्तव में डेरा की भेंट और चढ़ावे से अर्जित की गई थीं। हाईकोर्ट ने माना कि ट्रायल कोर्ट ने आय, व्यय, दान, बैंक खातों और संपत्तियों से जुड़े अभिलेख मंगाने से इन्कार कर त्रुटि की। इन दस्तावेजों का विवाद के निपटारे में केंद्रीय महत्व है। हालांकि अदालत ने रिसीवर नियुक्त करने की मांग खारिज करने के अपीलीय आदेश को बरकरार रखा लेकिन खातों का खुलासा आवश्यक बताया।
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