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Panchkula News: पीजीआई के 40 किलोमीटर के दायरे में स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर बनाने की मांग
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चंडीगढ़। पीजीआई चंडीगढ़ के 40 किलोमीटर के दायरे में हरियाणा और पंजाब के क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधाएं बेहतर बनाने की मांग वाली याचिका पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार, हरियाणा सरकार, पंजाब सरकार, यूटी प्रशासन और पीजीआई को जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है।
याचिका दाखिल करते हुए मोहाली निवासी राम कुमार सैनी ने एडवोकेट मुनीष भारद्वाज के माध्यम से हाईकोर्ट को बताया कि 2008 में पीजीआई में लापरवाही से मौत को लेकर एक जनहित याचिका दाखिल की गई थी। इस याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने एक कमेटी गठित की थी, जिसने सिफारिश की थी कि यदि पीजीआई के 40 किलोमीटर क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधाएं बेहतर बनाई जाएं तो इस पर दबाव कम किया जा सकता है।
हाईकोर्ट ने 2012 में याचिका का निपटारा करते हुए हरियाणा, पंजाब, हिमाचल व चंडीगढ़ के साथ मिलकर इसका अनुपालन करने का आदेश दिया था। इस आदेश के बावजूद जब कुछ नहीं हुआ तो याची ने हाईकोर्ट की 2017 में शरण ली थी। पीजीआई ने दलील दी थी कि इन राज्यों के स्वास्थ्य प्रणाली में सुधार के लिए पीजीआई दखल नहीं दे सकता।
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इसके बाद हाईकोर्ट ने 2022 में याचिका का निपटारा करते हुए याची को पीजीआई के साथ मिलकर हल निकालने का आदेश दिया था। याची ने बताया कि इतने लंबे समय से वह इस दिशा में काम कर रहा है, लेकिन इसका पालन नहीं हो सका। याची ने इस मामले में केंद्र सरकार व पीजीआई को प्रतिवादी बनाया था। हाईकोर्ट ने कहा कि इसमें हरियाणा, पंजाब व चंडीगढ़ प्रशासन को पक्ष बनाना जरूरी है ताकि आदेश का सही पालन करवाया जा सके। याची ने इन सभी को याचिका में प्रतिवादी के तौर पर शामिल कर दिया।
पीजीआई पर उत्तर भारत के मरीजों का भार
याची ने बताया कि पीजीआई चंडीगढ़ पर न केवल ट्राइसिटी के लोगों का बल्कि जम्मू, कश्मीर, हिमाचल, उत्तराखंड, हरियाणा व पंजाब सहित पूरे उत्तर भारत के मरीजों का भी भार है। पीजीआई पर बोझ कम करने का सबसे बेहतर तरीका है कि इसके नजदीक के क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाएं बेहतर की जाएं। अक्सर लोग अपने जिले को छोड़कर सीधे पीजीआई का रुख करते हैं और यदि उनके क्षेत्र में सुविधाएं बेहतर होंगी तो वे ऐसा नहीं करेंगे और पीजीआई में लोगों को बेहतर इलाज मिलेगा।
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याचिका दाखिल करते हुए मोहाली निवासी राम कुमार सैनी ने एडवोकेट मुनीष भारद्वाज के माध्यम से हाईकोर्ट को बताया कि 2008 में पीजीआई में लापरवाही से मौत को लेकर एक जनहित याचिका दाखिल की गई थी। इस याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने एक कमेटी गठित की थी, जिसने सिफारिश की थी कि यदि पीजीआई के 40 किलोमीटर क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधाएं बेहतर बनाई जाएं तो इस पर दबाव कम किया जा सकता है।
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हाईकोर्ट ने 2012 में याचिका का निपटारा करते हुए हरियाणा, पंजाब, हिमाचल व चंडीगढ़ के साथ मिलकर इसका अनुपालन करने का आदेश दिया था। इस आदेश के बावजूद जब कुछ नहीं हुआ तो याची ने हाईकोर्ट की 2017 में शरण ली थी। पीजीआई ने दलील दी थी कि इन राज्यों के स्वास्थ्य प्रणाली में सुधार के लिए पीजीआई दखल नहीं दे सकता।
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इसके बाद हाईकोर्ट ने 2022 में याचिका का निपटारा करते हुए याची को पीजीआई के साथ मिलकर हल निकालने का आदेश दिया था। याची ने बताया कि इतने लंबे समय से वह इस दिशा में काम कर रहा है, लेकिन इसका पालन नहीं हो सका। याची ने इस मामले में केंद्र सरकार व पीजीआई को प्रतिवादी बनाया था। हाईकोर्ट ने कहा कि इसमें हरियाणा, पंजाब व चंडीगढ़ प्रशासन को पक्ष बनाना जरूरी है ताकि आदेश का सही पालन करवाया जा सके। याची ने इन सभी को याचिका में प्रतिवादी के तौर पर शामिल कर दिया।
पीजीआई पर उत्तर भारत के मरीजों का भार
याची ने बताया कि पीजीआई चंडीगढ़ पर न केवल ट्राइसिटी के लोगों का बल्कि जम्मू, कश्मीर, हिमाचल, उत्तराखंड, हरियाणा व पंजाब सहित पूरे उत्तर भारत के मरीजों का भी भार है। पीजीआई पर बोझ कम करने का सबसे बेहतर तरीका है कि इसके नजदीक के क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाएं बेहतर की जाएं। अक्सर लोग अपने जिले को छोड़कर सीधे पीजीआई का रुख करते हैं और यदि उनके क्षेत्र में सुविधाएं बेहतर होंगी तो वे ऐसा नहीं करेंगे और पीजीआई में लोगों को बेहतर इलाज मिलेगा।