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दिल्ली शिक्षा मॉडल पानी का बुलबुला -परगट
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चंडीगढ़। पंजाब और दिल्ली के शिक्षा मॉडलों की तुलना के संदर्भ में पंजाब के शिक्षा मंत्री परगट सिंह ने बुधवार को आप के दिल्ली मॉडल को पानी का बुलबुला बताया। उन्होंने सवाल किया कि दिल्ली के 1060 में से 760 स्कूलों में प्रिंसिपल के पद खाली क्यों हैं। दिल्ली के 1844 स्कूलों में से 479 वाइस प्रिंसिपल के पद क्यों खाली हैं। दिल्ली के स्कूलों में 41 प्रतिशत नॉन टीचिंग स्टाफ के पद खाली क्यों हैं।
पंजाब भवन में पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहा कि सरहदी राज्य पंजाब का दिल्ली के साथ मुकाबला ही गलत है। पंजाब एक कृषि प्रधान ग्रामीण राज्य है। दिल्ली महानगर है। गांवों खास कर अंतरराष्ट्रीय सरहद के साथ लगते गांवों में मानक शिक्षा पहुंचाना हमेशा एक चुनौती रहा है। दोनों का मुकाबला ही तर्कसंगत नहीं। पंजाब का मुकाबला हरियाणा और राजस्थान आदि राज्यों के साथ करना बनता है।
उन्होंने कहा कि दिल्ली के शिक्षा मंत्री की तरफ से जिस तरीके से एक स्कूल में दाखिल होकर स्टोर रूम को दिखा कर राजसी रोटियां सेकने की भद्दी साजिश रची है, उसकी वह आशा नहीं करते थे। वह तो एक सेहतमंद बहस में विश्वास रखते हैं। उन्होेंने कहा कि कोविड की संभावित तीसरी लहर के मौके पर आप नेताओं की भीड़ ने आज स्कूली बच्चों के स्वस्थ्य को खतरे में डाल दिया जिसको भविष्य में कभी बर्दाश्त नहीं किया जायेगा।
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41000 कक्षाएं हो चुकी हैं स्मार्ट
परगट सिंह ने कहा कि पिछले 5 साल की पंजाब सरकार की तरफ से किए शिक्षा सुधार की बात करें तो पंजाब के करीब 13000 स्कूलों में 41000 कमरे स्मार्ट क्लास रूम बन चुके हैं। इसके मुकाबले दिल्ली के कुल स्कूल ही 1000 हैं।
शिक्षक-विद्यार्थी अनुपात में पंजाब बेहतर
पंजाब में विद्यार्थी और शिक्षकों के अनुपात में पंजाब दिल्ली से बेहतर है। पंजाब में शिक्षक-विद्यार्थी अध्यापक अनुपात 24:1है, जबकि इसके मुकाबले दिल्ली का अनुपात 35:1 का है। पंजाब में सिर्फ 4 प्रतिशत स्कूलों में आरटीई के सिफारिशों के अनुपात से कम अध्यापक हैं, जबकि दिल्ली में यह संख्या 15 प्रतिशत है।
3 साल में दाखिलों में रिकार्ड विस्तार
शिक्षा मंत्री ने कहा कि पंजाब में पिछले 3 साल में लगातार सरकारी स्कूलों में बच्चों की संख्या में रिकार्ड तोड़ विस्तार हुआ है, जो भारत के इतिहास में सबसे बड़ा विस्तार है। बच्चों की बढ़ रही तादाद इस बात का साक्ष्य है कि बच्चों और उनके माता-पिता का सरकारी प्रणाली में विश्वास बढ़ा है। पंजाब के दसवीं और बारहवीं के बच्चों का नतीजा पिछले तीन साल से लगातार बेहतर आ रहा है।
4 साल में 9000 शिक्षकों की भर्ती
शिक्षा मंत्री ने बताया कि पंजाब भारत का एकमात्र राज्य है, जिसने सर्व शिक्षा अभियान के अध्यापकों को पक्का किया गया है। पंजाब ने पिछले 4 साल में 9000 के करीब नए अध्यापक भर्ती किए हैं और दिसंबर के अंत तक यह भर्ती 20000 हो जाएगी। पंजाब ने अपने अध्यापकों को प्रशिक्षण देने के लिए इंडियन स्कूल आफ बिजनेस और कनाडा भेजा है। पंजाब में अध्यापकों की बदलियां पूरी तरह के साथ पारदर्शी और ऑनलाइन तरीके से हुईं।
परगट सिंह के ये हैं सवाल
- परगट सिंह ने सवाल किया है कि शीला दीक्षित और केजरीवाल के समय में दिल्ली की शिक्षा का क्या मुकाबला था।
- अगर दिल्ली मॉडल इतना बढ़िया है तो दिल्ली के सरकारी स्कूलों में बच्चों की संख्या कम क्यों रही है और प्राइवेट स्कूलों में बढ़ क्यों रही है।
- दिल्ली के सरकारी स्कूलों का 10वीं का नतीजा शीला दीक्षित की सरकार की अपेक्षा बुरा क्यों आता है।
- दिल्ली सरकार ने पिछले 6 सालों में कितने नए सरकारी स्कूल खोले हैं।
- दिल्ली में 22 हजार से अधिक गेस्ट फैकल्टी अध्यापकों को कब पक्का करेंगे।
- दिल्ली के स्कूलों में अध्यापकों के 42 प्रतिशत स्थायी पद क्यों खाली हैं।
- दिल्ली ने कितने सर्व शिक्षा अभियान वाले अध्यापक पक्के किए हैं।
- दिल्ली के 1060 में से 760 स्कूलों में प्रिंसिपल के पद क्यों खाली हैं।
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पंजाब भवन में पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहा कि सरहदी राज्य पंजाब का दिल्ली के साथ मुकाबला ही गलत है। पंजाब एक कृषि प्रधान ग्रामीण राज्य है। दिल्ली महानगर है। गांवों खास कर अंतरराष्ट्रीय सरहद के साथ लगते गांवों में मानक शिक्षा पहुंचाना हमेशा एक चुनौती रहा है। दोनों का मुकाबला ही तर्कसंगत नहीं। पंजाब का मुकाबला हरियाणा और राजस्थान आदि राज्यों के साथ करना बनता है।
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उन्होंने कहा कि दिल्ली के शिक्षा मंत्री की तरफ से जिस तरीके से एक स्कूल में दाखिल होकर स्टोर रूम को दिखा कर राजसी रोटियां सेकने की भद्दी साजिश रची है, उसकी वह आशा नहीं करते थे। वह तो एक सेहतमंद बहस में विश्वास रखते हैं। उन्होेंने कहा कि कोविड की संभावित तीसरी लहर के मौके पर आप नेताओं की भीड़ ने आज स्कूली बच्चों के स्वस्थ्य को खतरे में डाल दिया जिसको भविष्य में कभी बर्दाश्त नहीं किया जायेगा।
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41000 कक्षाएं हो चुकी हैं स्मार्ट
परगट सिंह ने कहा कि पिछले 5 साल की पंजाब सरकार की तरफ से किए शिक्षा सुधार की बात करें तो पंजाब के करीब 13000 स्कूलों में 41000 कमरे स्मार्ट क्लास रूम बन चुके हैं। इसके मुकाबले दिल्ली के कुल स्कूल ही 1000 हैं।
शिक्षक-विद्यार्थी अनुपात में पंजाब बेहतर
पंजाब में विद्यार्थी और शिक्षकों के अनुपात में पंजाब दिल्ली से बेहतर है। पंजाब में शिक्षक-विद्यार्थी अध्यापक अनुपात 24:1है, जबकि इसके मुकाबले दिल्ली का अनुपात 35:1 का है। पंजाब में सिर्फ 4 प्रतिशत स्कूलों में आरटीई के सिफारिशों के अनुपात से कम अध्यापक हैं, जबकि दिल्ली में यह संख्या 15 प्रतिशत है।
3 साल में दाखिलों में रिकार्ड विस्तार
शिक्षा मंत्री ने कहा कि पंजाब में पिछले 3 साल में लगातार सरकारी स्कूलों में बच्चों की संख्या में रिकार्ड तोड़ विस्तार हुआ है, जो भारत के इतिहास में सबसे बड़ा विस्तार है। बच्चों की बढ़ रही तादाद इस बात का साक्ष्य है कि बच्चों और उनके माता-पिता का सरकारी प्रणाली में विश्वास बढ़ा है। पंजाब के दसवीं और बारहवीं के बच्चों का नतीजा पिछले तीन साल से लगातार बेहतर आ रहा है।
4 साल में 9000 शिक्षकों की भर्ती
शिक्षा मंत्री ने बताया कि पंजाब भारत का एकमात्र राज्य है, जिसने सर्व शिक्षा अभियान के अध्यापकों को पक्का किया गया है। पंजाब ने पिछले 4 साल में 9000 के करीब नए अध्यापक भर्ती किए हैं और दिसंबर के अंत तक यह भर्ती 20000 हो जाएगी। पंजाब ने अपने अध्यापकों को प्रशिक्षण देने के लिए इंडियन स्कूल आफ बिजनेस और कनाडा भेजा है। पंजाब में अध्यापकों की बदलियां पूरी तरह के साथ पारदर्शी और ऑनलाइन तरीके से हुईं।
परगट सिंह के ये हैं सवाल
- परगट सिंह ने सवाल किया है कि शीला दीक्षित और केजरीवाल के समय में दिल्ली की शिक्षा का क्या मुकाबला था।
- अगर दिल्ली मॉडल इतना बढ़िया है तो दिल्ली के सरकारी स्कूलों में बच्चों की संख्या कम क्यों रही है और प्राइवेट स्कूलों में बढ़ क्यों रही है।
- दिल्ली के सरकारी स्कूलों का 10वीं का नतीजा शीला दीक्षित की सरकार की अपेक्षा बुरा क्यों आता है।
- दिल्ली सरकार ने पिछले 6 सालों में कितने नए सरकारी स्कूल खोले हैं।
- दिल्ली में 22 हजार से अधिक गेस्ट फैकल्टी अध्यापकों को कब पक्का करेंगे।
- दिल्ली के स्कूलों में अध्यापकों के 42 प्रतिशत स्थायी पद क्यों खाली हैं।
- दिल्ली ने कितने सर्व शिक्षा अभियान वाले अध्यापक पक्के किए हैं।
- दिल्ली के 1060 में से 760 स्कूलों में प्रिंसिपल के पद क्यों खाली हैं।