{"_id":"6aaaf42b8729c46166060e54","slug":"delays-by-departments-become-a-hurdle-for-the-iccc-project-panchkula-news-c-87-1-pk11015-141442-2026-09-17","type":"story","status":"publish","title_hn":"Panchkula News: आईसीसीसी प्रोजेक्ट में विभागों की लेटलतीफी बनी रोड़ा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Panchkula News: आईसीसीसी प्रोजेक्ट में विभागों की लेटलतीफी बनी रोड़ा
विज्ञापन
209 करोड़ के कमांड सेंटर की डीपीआर अब तक तैयार नहीं, अधिकतर विभागों ने दफ्तरों में लगे सीसीटीवी कैमरों की रिपोर्ट नहीं सौंपी
जून 2025 में मंजूरी के बाद नौ महीने में काम शुरू करने का था लक्ष्य, अब मौजूदा कैमरों को जोड़ने या नया नेटवर्क तैयार करने पर भी मंथन
संवाद न्यूज एजेंसी
पंचकूला। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में मंजूरी मिलने के एक साल से अधिक समय बाद भी पंचकूला के 208.92 करोड़ रुपये के महत्वाकांक्षी इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर (आईसीसीसी) का काम कागजों से आगे नहीं बढ़ पाया है। अधिकतर विभागों की ओर से दफ्तरों में लगे सीसीटीवी कैमरों और उनकी जरूरतों की रिपोर्ट नहीं सौंपे जाने के कारण डीपीआर तैयार करने में देरी हो रही है। पंचकूला मेट्रोपॉलिटन डेवलपमेंट अथॉरिटी (पीएमडीए) अब भी विभागों से जरूरी तकनीकी जानकारी जुटा रही है।
आईसीसीसी के जरिये शहर में कुशल सार्वजनिक सेवा वितरण, रियल टाइम निगरानी और आपातकालीन प्रतिक्रिया को एकीकृत करने की योजना है। प्रोजेक्ट का काम आवंटित होने के नौ महीने के भीतर लागू किए जाने की उम्मीद थी, लेकिन जून 2025 में मंजूरी मिलने के बावजूद अभी तक डीपीआर ही तैयार नहीं हो सकी है। अधिकारियों के अनुसार विभागों से संपर्क कर उनकी जरूरत और तकनीकी सुझाव लिए जा रहे हैं। सभी सुझावों को शामिल करने के बाद रिपोर्ट उच्च अधिकारियों को भेजी जाएगी, ताकि बाद में किसी तरह की तकनीकी अड़चन न आए।
एआई से लेकर ट्रैफिक निगरानी तक होगा फोकस
आईसीसीसी में एआई आधारित वीडियो एनालिटिक्स के साथ सीसीटीवी निगरानी, एडेप्टिव ट्रैफिक कंट्रोल सिस्टम (एटीसीएस), ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन (एएनपीआर), रेड लाइट वायलेशन डिटेक्शन (आरएलवीडी) और ऑटोमैटिक ट्रैफिक काउंटर एंड क्लासिफिकेशन (एटीसीसी) शामिल होंगे। इसके अलावा इमरजेंसी कॉल बॉक्स, पब्लिक एड्रेस सिस्टम और हरियाणा पुलिस की डायल-112 हेल्पलाइन को भी इससे जोड़ा जाएगा। स्ट्रीट लाइटिंग और सॉलिड वेस्ट की रियल टाइम निगरानी के साथ वाटर ट्रीटमेंट और सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट के लिए एससीएडीए सिस्टम, केंद्रीकृत नागरिक शिकायत निवारण और साइबर सुरक्षा भी प्रोजेक्ट का हिस्सा होंगे।
विज्ञापन
नगर निगम के 475 कैमरे, सभी नहीं कर रहे काम
वर्तमान में नगर निगम की ओर से शहर में 475 सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं, हालांकि इनमें से सभी चालू नहीं हैं। इसके अलावा पुलिस करीब 100 नए कैमरे लगा रही है। आईसीसीसी प्रोजेक्ट के तहत जरूरत और व्यवहार्यता के आधार पर 200 से 300 अतिरिक्त कैमरे लगाए जाने की संभावना है। इनके जरिये ट्रैफिक जंक्शन, सरकारी प्रतिष्ठान, जरूरी सेवाओं और अन्य महत्वपूर्ण स्थानों को कवर किया जाएगा।
पुराने कैमरे जुड़ेंगे या बनेगा नया नेटवर्क
पीएमडीए को शहरी स्थानीय निकाय विभाग से पहले ही एक डीपीआर मिल चुकी है, लेकिन मौजूदा जरूरतों के आधार पर इसका नए सिरे से मूल्यांकन किया जा रहा है। अब यह भी तय किया जा रहा है कि शहर में पहले से लगे कैमरों को आईसीसीसी से जोड़ा जा सकता है या केंद्र के लिए नया कैमरा नेटवर्क तैयार करना अधिक व्यवहारिक होगा। वहीं, कालका को इसी चरण में शामिल करने या दूसरे चरण में लाने पर भी विचार किया जा रहा है।
अभी अलग-अलग विभाग संभाल रहे व्यवस्था
फिलहाल शहर का प्रबंधन अलग-अलग विभागों के मैनुअल और बिखरे हुए सिस्टम से चल रहा है। ट्रैफिक निगरानी भी काफी हद तक फील्ड पुलिसकर्मियों पर निर्भर है। आईसीसीसी बनने के बाद स्ट्रीट लाइटिंग, कचरा प्रबंधन, जल आपूर्ति और ट्रैफिक जैसी सेवाओं की रियल टाइम निगरानी एकीकृत प्लेटफॉर्म से की जा सकेगी।
कोट
पंचकूला में इंटीग्रेटेड कमांड कंट्रोल सेंटर बनाने के लिए पीएमडीए लगातार विभागों के संपर्क में है और डीपीआर तैयार की जा रही है। सभी विभागों की राय और तकनीकी बिंदुओं पर एकमत होने के बाद सेंटर का संचालन शुरू हो जाएगा।
गुलशन कुमार, एसडीई, पीएमडीए
विज्ञापन
जून 2025 में मंजूरी के बाद नौ महीने में काम शुरू करने का था लक्ष्य, अब मौजूदा कैमरों को जोड़ने या नया नेटवर्क तैयार करने पर भी मंथन
संवाद न्यूज एजेंसी
पंचकूला। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में मंजूरी मिलने के एक साल से अधिक समय बाद भी पंचकूला के 208.92 करोड़ रुपये के महत्वाकांक्षी इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर (आईसीसीसी) का काम कागजों से आगे नहीं बढ़ पाया है। अधिकतर विभागों की ओर से दफ्तरों में लगे सीसीटीवी कैमरों और उनकी जरूरतों की रिपोर्ट नहीं सौंपे जाने के कारण डीपीआर तैयार करने में देरी हो रही है। पंचकूला मेट्रोपॉलिटन डेवलपमेंट अथॉरिटी (पीएमडीए) अब भी विभागों से जरूरी तकनीकी जानकारी जुटा रही है।
आईसीसीसी के जरिये शहर में कुशल सार्वजनिक सेवा वितरण, रियल टाइम निगरानी और आपातकालीन प्रतिक्रिया को एकीकृत करने की योजना है। प्रोजेक्ट का काम आवंटित होने के नौ महीने के भीतर लागू किए जाने की उम्मीद थी, लेकिन जून 2025 में मंजूरी मिलने के बावजूद अभी तक डीपीआर ही तैयार नहीं हो सकी है। अधिकारियों के अनुसार विभागों से संपर्क कर उनकी जरूरत और तकनीकी सुझाव लिए जा रहे हैं। सभी सुझावों को शामिल करने के बाद रिपोर्ट उच्च अधिकारियों को भेजी जाएगी, ताकि बाद में किसी तरह की तकनीकी अड़चन न आए।
विज्ञापन
एआई से लेकर ट्रैफिक निगरानी तक होगा फोकस
आईसीसीसी में एआई आधारित वीडियो एनालिटिक्स के साथ सीसीटीवी निगरानी, एडेप्टिव ट्रैफिक कंट्रोल सिस्टम (एटीसीएस), ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन (एएनपीआर), रेड लाइट वायलेशन डिटेक्शन (आरएलवीडी) और ऑटोमैटिक ट्रैफिक काउंटर एंड क्लासिफिकेशन (एटीसीसी) शामिल होंगे। इसके अलावा इमरजेंसी कॉल बॉक्स, पब्लिक एड्रेस सिस्टम और हरियाणा पुलिस की डायल-112 हेल्पलाइन को भी इससे जोड़ा जाएगा। स्ट्रीट लाइटिंग और सॉलिड वेस्ट की रियल टाइम निगरानी के साथ वाटर ट्रीटमेंट और सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट के लिए एससीएडीए सिस्टम, केंद्रीकृत नागरिक शिकायत निवारण और साइबर सुरक्षा भी प्रोजेक्ट का हिस्सा होंगे।
विज्ञापन
नगर निगम के 475 कैमरे, सभी नहीं कर रहे काम
वर्तमान में नगर निगम की ओर से शहर में 475 सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं, हालांकि इनमें से सभी चालू नहीं हैं। इसके अलावा पुलिस करीब 100 नए कैमरे लगा रही है। आईसीसीसी प्रोजेक्ट के तहत जरूरत और व्यवहार्यता के आधार पर 200 से 300 अतिरिक्त कैमरे लगाए जाने की संभावना है। इनके जरिये ट्रैफिक जंक्शन, सरकारी प्रतिष्ठान, जरूरी सेवाओं और अन्य महत्वपूर्ण स्थानों को कवर किया जाएगा।
पुराने कैमरे जुड़ेंगे या बनेगा नया नेटवर्क
पीएमडीए को शहरी स्थानीय निकाय विभाग से पहले ही एक डीपीआर मिल चुकी है, लेकिन मौजूदा जरूरतों के आधार पर इसका नए सिरे से मूल्यांकन किया जा रहा है। अब यह भी तय किया जा रहा है कि शहर में पहले से लगे कैमरों को आईसीसीसी से जोड़ा जा सकता है या केंद्र के लिए नया कैमरा नेटवर्क तैयार करना अधिक व्यवहारिक होगा। वहीं, कालका को इसी चरण में शामिल करने या दूसरे चरण में लाने पर भी विचार किया जा रहा है।
अभी अलग-अलग विभाग संभाल रहे व्यवस्था
फिलहाल शहर का प्रबंधन अलग-अलग विभागों के मैनुअल और बिखरे हुए सिस्टम से चल रहा है। ट्रैफिक निगरानी भी काफी हद तक फील्ड पुलिसकर्मियों पर निर्भर है। आईसीसीसी बनने के बाद स्ट्रीट लाइटिंग, कचरा प्रबंधन, जल आपूर्ति और ट्रैफिक जैसी सेवाओं की रियल टाइम निगरानी एकीकृत प्लेटफॉर्म से की जा सकेगी।
कोट
पंचकूला में इंटीग्रेटेड कमांड कंट्रोल सेंटर बनाने के लिए पीएमडीए लगातार विभागों के संपर्क में है और डीपीआर तैयार की जा रही है। सभी विभागों की राय और तकनीकी बिंदुओं पर एकमत होने के बाद सेंटर का संचालन शुरू हो जाएगा।
गुलशन कुमार, एसडीई, पीएमडीए