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एसवाईएल पर पंजाब में फिर छिड़ी बहस, आप समेत पंजाब के सभी दल पानी न देने पर कायम

Thu, 08 Sep 2022 01:51 AM IST
Panchkula Bureau पंचकुला ब्‍यूरो
Updated Thu, 08 Sep 2022 01:51 AM IST
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Debate erupts again in Punjab on SYL, all parties in Punjab including AAP stand firm on not providing water
चंडीगढ़। पंजाब-हरियाणा के बीच लंबे समय से विवाद का कारण बनी सतलुज-यमुना लिंक (एसवाईएल) नहर के बारे में सुप्रीम कोर्ट के ताजा दिशानिर्देशों ने पंजाब में एक बार फिर इस मुद्दे को गरमा दिया है। राज्य के सभी सियासी दल एकसुर में हरियाणा को पंजाब का पानी देने का विरोध करने लगे हैं। इनमें सत्ताधारी आम आदमी पार्टी (आप) भी शामिल हो गई है।
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हालांकि आप सुप्रीमो अरविंद केजरीवाल द्वारा एसवाईएल पर हरियाणा का पक्ष लिए जाने से पंजाब आप के लिए मुश्किल खड़ी हो गई है। विपक्षी दल आप सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए उसे घेरने की तैयारी में भी जुट गए हैं। बुधवार को हरियाणा की हिसार में आयोजित आप सुप्रीमो अरविंद केजरीवाल की रैली में उपस्थित पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने हरियाणा को एसवाईएल का पानी देने या नहीं देने बारे तो कोई स्पष्ट बयान नहीं दिया लेकिन यह घोषणा कि अगर सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार केंद्र सरकार पंजाब और हरियाणा के मुख्यमंत्रियों की बैठक आयोजित करती है तो वह इसमें जरूर हिस्सा लेंगे। इस बीच, चंडीगढ़ में पंजाब आप के विभिन्न नेताओं ने एसवाईएल का विरोध करते हुए साफ कर दिया कि पंजाब की ओर से हरियाणा को पानी नहीं दिया जाएगा।
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पंजाब विधानसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस विधायक प्रताप बाजवा ने एक बयान में मुख्यमंत्री भगवंत मान को सचेत करते हुए कहा कि वह सूबे से जुड़े संवेदनशील मामलों को हलके में न लें क्योंकि यह पंजाबियों की जिंदगी का सवाल है। केंद्र सरकार द्वारा सुप्रीम कोर्ट में यह दावा कि पंजाब, हरियाणा के साथ एसवाईएल नहर के विवाद को सहयोग नहीं कर रहा है, को गलत नहीं समझना चाहिए क्योंकि पंजाब सरकार इसके प्रति गंभीर नहीं है। बाजवा ने कहा कि एसवाईएल, नदी जल, चंडीगढ़ और पंजाबी भाषी क्षेत्रों का स्थानांतरण और भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (बीबीएमबी) में पर्याप्त प्रतिनिधित्व लंबे समय से लंबित मुद्दे हैं जिन्हें प्राथमिकता के आधार पर हल किया जाना चाहिए।
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शिरोमणि अकाली दल (शिअद) के प्रधान सुखबीर बादल ने आप के संयोजक अरविंद केजरीवाल के उस बयान की निंदा की जिसमें उन्होंने कहा है कि एसवाईएल नहर का पानी हरियाणा को दिया जाना चाहिए। सुखबीर ने कहा कि पंजाब के मुख्यमंत्री द्वारा पंजाब विरोधी इस बयान का समर्थन नहीं किया जाना चाहिए। जिस तरह से केजरीवाल हरियाणा में चुनावी लाभ के लिए पंजाब के हितों को बेचने के लिए तैयार हैं, वहीं भगवंत मान अपनी कुर्सी बचाने के लिए पंजाब के हितों को बेचने लगे हैं। सुखबीर ने कहा कि जिस पार्टी को 92 सीटों का बहुमत दिया गया था, उसके द्वारा राज्य के हितों की बिक्री पंजाब के इतिहास में हैरान करने वाली है।
उन्होंने कहा कि पंजाबी कभी नहीं सोच सकते कि उनके चुने हुए मुख्यमंत्री अपनी नदियों के पानी पर हस्ताक्षर कर रहे हैं, लेकिन भगवंत मान सत्ता में बने रहने के लिए ऐसा करने के लिए तैयार हैं। शिअद अध्यक्ष ने भगवंत मान को हरियाणा सरकार के साथ एसवाईएल पर किसी भी बैठक में शामिल न होने की चेतावनी देते हुए कहा कि बातचीत तब होती है जब आपके पास देने के लिए कुछ होता है। उन्होंने कहा कि नदी के पानी पर चर्चा केवल रिपेरियन राज्यों के साथ की जा सकती है और चूंकि हरियाणा रिपेरियन राज्य नहीं है, इसीलिए उसे पंजाब के नदी जल में हिस्सेदारी का दावा करने का कोई अधिकार नहीं है।
पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ने कहा है कि एसवाईएल के मुद्दे पर हरियाणा के साथ पंजाब ‘जीने या मरने’ की कानूनी लड़ाई में आ चुका है। यह राज्य के किसानों, खास तौर पर मालवा क्षेत्र के लिए, जिंदगी और मौत का विषय है, जहां से मान खुद भी ताल्लुक रखते हैं और यहां मुख्यमंत्री हरियाणा के लोगों की मेहमाननवाजी का आनंद ले रहे थे। एसवाईएल के मुद्दे पर मान का हिसार में बयान उत्साह पूर्ण नहीं था। जिन्हें यह स्पष्ट तौर पर कहना चाहिए था कि पंजाब के पास देने के लिए कोई अतिरिक्त पानी नहीं है और इससे स्पष्ट संदेश जाना चाहिए था लेकिन उन्होंने अस्पष्ट रहने की कोशिश की। शायद वह सुझाव दे रहे थे कि पानी बांटा जा सकता है।

एसवाईएल के मुद्दे पर आक्रामक तेवरों के साथ मैदान में उतरे शिअद अध्यक्ष सुखबीर बादल ने बुधवार को कहा, ‘अकाली दल ने पंजाब के नदी जल की दृढ़ता से रक्षा की है और आगे भी करता ही रहेगा। हमारा दृढ़ विश्वास है कि राज्य के पास पानी की एक बूंद भी नहीं बची है। हम पानी की एक बूंद भी राज्य से बाहर हरियाणा में नहीं जाने देंगें।’ उन्होंने यह भी खुलासा किया कि कैसे पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ने एसवाईएल नहर (संपत्ति अधिकारों का पुनर्वास और पुनर्निधारण) विधेयक 2016 भी पारित किया था, ताकि नहर के निर्माण के लिए अधिगृहीत जमीन को मूल मालिकों को मुफ्त में वापस दिया जा सके। दिल्ली के मुख्यमंत्री पर निशाना साधते हुए सुखबीर बादल ने कहा कि यह पहली बार नहीं है जब केजरीवाल ने एसवाईएल मुद्दे पर अपने इरादे स्पष्ट किए हैं। इससे पहले दिल्ली के सीएम ने एक बयान जारी कर कहा था कि एसवाईएल के पानी पर हरियाणा और दिल्ली का बराबर अधिकार है।
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