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डीसी धारा 163 लगाते हुए कानून का अनुसरण करें, लगाने का कारण दर्ज करें: हाईकोर्ट
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चंडीगढ़। पंजाब भर में विभिन्न डीसी द्वारा आईपीसी की धारा 144 और भारतीय न्याय संहिता की धारा 163 का मनमाने तरीके से इस्तेमाल करने का आरोप लगाते हुए पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में जनहित याचिका दाखिल की गई है। हाईकोर्ट ने याचिका का निपटारा करते हुए कानून के अनुरूप इनका इस्तेमाल करने का कारण आदेश में दर्ज करने का निर्देश दिया है।
याचिका दाखिल करते हुए बठिंडा निवासी हरमिलाप सिंह ग्रेवाल ने एडवोकेट निखिल सराफ के माध्यम से हाईकोर्ट को बताया कि कानून-व्यवस्था संभालने व अन्य प्रशासनिक उद्देश्यों से जिलों के डीसी को आईपीसी की धारा 144 जो अब बीएनएस की धारा 163 हो चुकी है इसे लगाने का अधिकार दिया गया है। इस आदेश के तहत 4 या इससे अधिक लोगों के एकत्रित होने पर उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने का प्रावधान है।
याची ने कहा कि इस अधिकार का प्रयोग विशिष्ट परिस्थितियों में किया जाना चाहिए लेकिन पंजाब में जिलों के डीसी इसे मनमाने तरीके से लगा रहे हैं। कई जिलों में तो पिछले दो साल से धारा 144 का लगातार इस्तेमाल हो रहा है। इस प्रकार इस धारा के लगातार इस्तेमाल से मासूम लोगों को आपराधिक मामलों में फंसाने की संभावना बढ़ जाती है। डीसी को दो माह के लिए इसे लगाने का अधिकार है और इसे छह माह तक बढ़ाया जा सकता है लेकिन इसके लिए कारण दर्ज करना जरूरी है। पंजाब में बिना कोई कारण दर्ज किए महीनों तक इसे लगाया जा रहा है। हाईकोर्ट ने याची पक्ष की दलीलों को सुनने के बाद याचिका का निपटारा कर दिया।
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याचिका दाखिल करते हुए बठिंडा निवासी हरमिलाप सिंह ग्रेवाल ने एडवोकेट निखिल सराफ के माध्यम से हाईकोर्ट को बताया कि कानून-व्यवस्था संभालने व अन्य प्रशासनिक उद्देश्यों से जिलों के डीसी को आईपीसी की धारा 144 जो अब बीएनएस की धारा 163 हो चुकी है इसे लगाने का अधिकार दिया गया है। इस आदेश के तहत 4 या इससे अधिक लोगों के एकत्रित होने पर उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने का प्रावधान है।
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याची ने कहा कि इस अधिकार का प्रयोग विशिष्ट परिस्थितियों में किया जाना चाहिए लेकिन पंजाब में जिलों के डीसी इसे मनमाने तरीके से लगा रहे हैं। कई जिलों में तो पिछले दो साल से धारा 144 का लगातार इस्तेमाल हो रहा है। इस प्रकार इस धारा के लगातार इस्तेमाल से मासूम लोगों को आपराधिक मामलों में फंसाने की संभावना बढ़ जाती है। डीसी को दो माह के लिए इसे लगाने का अधिकार है और इसे छह माह तक बढ़ाया जा सकता है लेकिन इसके लिए कारण दर्ज करना जरूरी है। पंजाब में बिना कोई कारण दर्ज किए महीनों तक इसे लगाया जा रहा है। हाईकोर्ट ने याची पक्ष की दलीलों को सुनने के बाद याचिका का निपटारा कर दिया।
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