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Panchkula News: सिविल अस्पताल और एमसीएच में डॉक्टरों की कमी का संकट गहराया

Mon, 05 Oct 2026 02:04 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Mon, 05 Oct 2026 02:04 AM IST
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Crisis of doctor shortage deepens at Civil Hospital and MCH.
पंचकूला। सेक्टर-6 स्थित 300 बेड के सिविल अस्पताल और 200 बेड के मदर एंड चाइल्ड हॉस्पिटल में डॉक्टरों की कमी का संकट गहराया हुआ है। प्रदेश में नए मेडिकल अफसरों की नियुक्ति के बाद जिला स्वास्थ्य विभाग को नई ज्वाइनिंग की उम्मीद है। अस्पताल प्रबंधन ने इमरजेंसी ट्रायज सिस्टम मजबूत करने के लिए एडवांस लाइफ सपोर्ट प्रशिक्षित डॉक्टरों की मांग की है, ताकि गोल्डन ऑवर में गंभीर मरीजों की जान बचाने में मदद मिल सके। तीन दिन पहले प्रबंधन ने महानिदेशक स्वास्थ्य विभाग हरियाणा को पत्र भेजकर नॉन-स्पेशलिस्ट डॉक्टरों और गायनेकोलॉजिस्ट की मांग की थी, लेकिन अब तक कोई ठोस जवाब नहीं मिला है।
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प्रदेश सरकार ने नए मेडिकल अफसरों के नियुक्ति पत्र जारी किए हैं, लेकिन पंचकूला सिविल अस्पताल प्रशासन को अभी यह जानकारी नहीं है कि जिले को कितने डॉक्टर और कितने स्पेशलिस्ट मिलेंगे। स्वास्थ्य विभाग ने नियुक्ति को लेकर कोई सूचना या गाइडलाइन नहीं भेजी है। अस्पताल सूत्रों के अनुसार, डॉक्टरों और मेडिकल स्टाफ की कमी दूर करने की मांग नई नहीं है। पिछले दो साल से प्रबंधन इमरजेंसी, बाल रोग, हड्डी रोग और गायनी विभाग में स्टाफ की कमी को लेकर महानिदेशक को पत्र भेजता रहा है।
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इमरजेंसी में मरीजों का दबाव सबसे ज्यादा है। ट्रॉमा, हार्ट अटैक, ब्रेन स्ट्रोक और दुर्घटना के गंभीर मामलों के लिए 24 घंटे डॉक्टरों की जरूरत होती है, लेकिन मौजूदा स्टाफ पर नाइट ड्यूटी और ओपीडी का दोहरा बोझ है।
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अब सभी की निगाहें सोमवार पर टिकी हैं, जब जिला-वार अलॉटमेंट लिस्ट जारी होने की उम्मीद है। मांग के अनुसार डॉक्टर मिलने पर इमरजेंसी में थ्रोम्बोलिसिस, ट्रॉमा रिससिटेशन और वेंटिलेटर मैनेजमेंट जैसी सेवाएं बेहतर हो सकती हैं। एमसीएच में 24 घंटे सिजेरियन सुविधा और एनआईसीयू कवर भी मजबूत होगा। पीएमओ डॉ. आरएस चौहान ने कहा कि अभी तक एक भी नए डॉक्टर ने अस्पताल में ज्वाइन नहीं किया है। स्थिति सोमवार को स्पष्ट होगी।

कहां कितने डॉक्टरों की कमी
इमरजेंसी (300 बेड अस्पताल): नॉन-स्पेशलिस्ट मेडिकल ऑफिसरों पर दोहरी ड्यूटी का बोझ है। इससे ट्रायज और नाइट कवर प्रभावित हो रहा है।
एमसीएच (200 बेड): 10 गायनेकोलॉजिस्ट की जरूरत है। हाई-रिस्क डिलीवरी और सिजेरियन सेवाओं पर दबाव है।
पीडियाट्रिक्स: बाल रोग विशेषज्ञों की कमी से एनआईसीयू की क्रिटिकल केयर प्रभावित हो रही है।
ऑर्थो: हड्डी रोग विशेषज्ञों की कमी से ओपीडी में बैकलॉग बढ़ रहा है और फ्रैक्चर व जोड़ के मरीजों को इंतजार करना पड़ रहा है।
एमसीएच की स्थिति चिंताजनक
एमसीएच में हाई-रिस्क प्रेग्नेंसी, खून की कमी वाली गर्भवती महिलाओं और समय से पहले प्रसव के मामले रोज आते हैं। गायनी और बाल रोग वार्डों के शिफ्ट होने के बाद चार से ज्यादा गायनेकोलॉजिस्ट की जरूरत है। मरीजों के दबाव के कारण सिजेरियन और इमरजेंसी डिलीवरी सेवाओं पर असर पड़ रहा है।
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