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सर काट कर हत्या कर जलाने के मामले में आरोपी बरी
Updated Sun, 18 Nov 2018 01:25 AM IST
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व्यक्ति का सर काट बॉडी जलाने के मामले में चार लोग बरी
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। 25 जनवरी 2017 को नेपाल निवासी धन बहादुर की सर काट कर उसकी बॉडी जलाने के मामले में जिला अदालत ने चार लोगों को सबूतों के आभाव में बरी कर दिया है। कोर्ट में पुलिस ने आरोपियों पर लगे आरोपों को साबित नही कर सकी। बरी होने वालों की पहचान भीम बहादुर (28), किरन सिंह(35), दिल बहादुर (30) और शेर बहादुर (30) के रूप में हुई है। दायर मामले के अनुसार गांव मक्खन माजरा के जंगल से 25 जनवरी 2017 को धन बहादुर की आधी जली बॉडी पुलिस को बरामद हुई थी। सुलतान सिंह नामक एक व्यक्ति ने इसकी सूचना पुलिस को दी थी। पुलिस की शुरुआती जांच में सामने आया था कि धन बहादुर और किरन सिंह शिमला में सेब के बाग में काम करता था। किनर उक्त तीन साथियों के साथ मिलकर धन बहादुर की हत्या की थी। इसके बाद पुलिस ने उक्त चार लोगों को गिरफ्तार किया था। पूछताछ में किरन ने बताया था कि वह अपने उक्त तीन साथियों व धन बहादुर के साथ बस में शिमला से चंडीगढ़ आया था। उन्हें पता चला था कि मृतक अपने साथ काफी रुपये लेकर आया था। इसके बाद रास्ते में उसने साथियों के साथ मिलकर उससे पैसे लूटने की योजना बनाई और उसे दड़वा रेलवे स्टेशन के पास शराब के ठेके में ले गए और शराब पी। इसके बाद वह गांव मक्खन माजरा की चल पड़े, रास्ते में उन लोगों ने धन बहादुर के साथ हाथापाई कर चाकुओं से वार कर उसकी हत्या कर 40 हजार नगदी भी लूट ली। इसके बाद उसकी बॉडी को मक्खन माजरा के जंगल में दफन करने पहुंचे थे। इसके बाद पुलिस जांच में मृतक के मोबाइल के जरिए वह किरन सिंह तक पहुंची। किरन को गिरफ्तार करने के बाद पुलिस मामले में अन्य आरोपियों तक पहुंची। उन सभी के खिलाफ हत्या व अन्य धारा के तहत मामला दर्ज किया गया था।
इस लिए किया गया बरी
बरी होने वाले व्यक्ति के वकील ने बताया कि मामले में गवाह गुरविंदर सिंह ट्रायल के दौरान अपने बयानों से पलट गया था। इसके चलते बॉडी जली होने के कारण मृतक की पहचान नहीं हो पाई थी। साथ ही रिपोर्ट में भी शराब की पुष्टी नहीं हो पाई। इसके अलावा डॉक्टरों ने भी मृतक की पहचान नहीं की थी। धन बहादुर के बेटे ने भी अपने बयानों में कहा था कि पुलिस ने उनको बाडी सौंपी थी, लेकिन उन्हें इसकी पहचान नहीं हुई थी कि वह बॉडी उनके पिता की है। इस वजह से उन सभी पर आरोप साबित नहीं हो सके, जिसके चलते कोर्ट ने उन्हें बरी कर दिया।
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अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। 25 जनवरी 2017 को नेपाल निवासी धन बहादुर की सर काट कर उसकी बॉडी जलाने के मामले में जिला अदालत ने चार लोगों को सबूतों के आभाव में बरी कर दिया है। कोर्ट में पुलिस ने आरोपियों पर लगे आरोपों को साबित नही कर सकी। बरी होने वालों की पहचान भीम बहादुर (28), किरन सिंह(35), दिल बहादुर (30) और शेर बहादुर (30) के रूप में हुई है। दायर मामले के अनुसार गांव मक्खन माजरा के जंगल से 25 जनवरी 2017 को धन बहादुर की आधी जली बॉडी पुलिस को बरामद हुई थी। सुलतान सिंह नामक एक व्यक्ति ने इसकी सूचना पुलिस को दी थी। पुलिस की शुरुआती जांच में सामने आया था कि धन बहादुर और किरन सिंह शिमला में सेब के बाग में काम करता था। किनर उक्त तीन साथियों के साथ मिलकर धन बहादुर की हत्या की थी। इसके बाद पुलिस ने उक्त चार लोगों को गिरफ्तार किया था। पूछताछ में किरन ने बताया था कि वह अपने उक्त तीन साथियों व धन बहादुर के साथ बस में शिमला से चंडीगढ़ आया था। उन्हें पता चला था कि मृतक अपने साथ काफी रुपये लेकर आया था। इसके बाद रास्ते में उसने साथियों के साथ मिलकर उससे पैसे लूटने की योजना बनाई और उसे दड़वा रेलवे स्टेशन के पास शराब के ठेके में ले गए और शराब पी। इसके बाद वह गांव मक्खन माजरा की चल पड़े, रास्ते में उन लोगों ने धन बहादुर के साथ हाथापाई कर चाकुओं से वार कर उसकी हत्या कर 40 हजार नगदी भी लूट ली। इसके बाद उसकी बॉडी को मक्खन माजरा के जंगल में दफन करने पहुंचे थे। इसके बाद पुलिस जांच में मृतक के मोबाइल के जरिए वह किरन सिंह तक पहुंची। किरन को गिरफ्तार करने के बाद पुलिस मामले में अन्य आरोपियों तक पहुंची। उन सभी के खिलाफ हत्या व अन्य धारा के तहत मामला दर्ज किया गया था।
इस लिए किया गया बरी
बरी होने वाले व्यक्ति के वकील ने बताया कि मामले में गवाह गुरविंदर सिंह ट्रायल के दौरान अपने बयानों से पलट गया था। इसके चलते बॉडी जली होने के कारण मृतक की पहचान नहीं हो पाई थी। साथ ही रिपोर्ट में भी शराब की पुष्टी नहीं हो पाई। इसके अलावा डॉक्टरों ने भी मृतक की पहचान नहीं की थी। धन बहादुर के बेटे ने भी अपने बयानों में कहा था कि पुलिस ने उनको बाडी सौंपी थी, लेकिन उन्हें इसकी पहचान नहीं हुई थी कि वह बॉडी उनके पिता की है। इस वजह से उन सभी पर आरोप साबित नहीं हो सके, जिसके चलते कोर्ट ने उन्हें बरी कर दिया।
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