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लुधियाना। डेहलों के गांव आलमगीर स्थित गुरुद्वारा मंजी साहिब के बाहर बलविंदर कौर की हत्या करने के आरोपी को चार साल बाद खन्ना पुलिस ने गिरफ्तार किया है। आरोपी की पहचान बरनाला के ठिकरीवाल निवासी सुरिंदर सिंह के रूप में हुई है।
18 अक्तूबर 2015 को गांव घव्वदी कलां स्थित गुरुद्वारा रविदासपुरा साहिब में श्री गुरु ग्रंथ साहिब के स्वरूप फाड़ने का मामला सामने आया था। बाद में पता चला कि गांव घव्वदी की रहने वाली सेवादार बलविंदर कौर ने ही स्वरूप फाड़े थे। पहले बलविंदर कौर का बड़ा बेटा रणजीत सिंह, गुरुद्वारा साहिब का प्रधान था। वह मौजूदा प्रधान को इस मामले में फंसाकर अपने बेटे रणजीत सिंह को दोबारा प्रधान बनाना चाहती थी। पुलिस जांच में सारा मामला खुल गया था। पुलिस ने आरोपी बलविंदर कौर को गिरफ्तार कर लिया था। इसके बाद पुलिस ने उसे जेल भेज दिया था। तीन महीने बाद बलविंदर कौर को अदालत से जमानत मिल गई थी। जमानत मिलने के बाद वह अपने गांव नहीं लौट सकी क्योंकि, गांव वालों ने उसके रहने पर पाबंदी लगा दी थी। इसलिए वह कभी अपनी बेटी के साथ रहती और कभी अपने किसी अन्य रिश्तेदारों के साथ रहती थी। 25 जुलाई 2016 को बलविंदर कौर को एक कॉल आई थी। कॉल करने वाले ने कहा था कि उसे फिर से गांव में रहने की इजाजत दी जाएगी। वह सुबह आलमगीर साहिब आकर उनसे मिल लें।
दोबारा गांव में बसने की चाह में 26 जुलाई 2016 को बलविंदर कौर गांव आलमगीर स्थित गुरुद्वारा श्री मंजी साहिब के बाहर पहुंच गई थी। उसके साथ उसका छोटा बेटा रणजोत सिंह भी था। इसी दौरान दो युवक बाइक पर आए और बलविंदर कौर की गोली मारकर हत्या कर दी। युवक रणजोत को भी मारना चाहते थे, मगर ट्रिगर जाम होने से वे सफल नहीं हो पाए।
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कोट्स
पुलिस ने आरोपी सुरिंदर सिंह को बस स्टैंड से काबू किया था। बाद में पता चला कि उस पर थाना डेहलों में हत्या का मामला दर्ज है। इसलिए आरोपी को थाना डेहलों की पुलिस के हवाले कर दिया गया है।
-गुरशरणदीप सिंह, एसएसपी (खन्ना)
क्या कहते हैं थाना प्रभारी
थाना डेहलों के एसएचओ धर्मबीर ने बताया कि बलविंदर कौर की हत्या में दो युवकों पर हत्या, साजिश और आर्म्स एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया था। फिर जांच में 11 और लोगों को नामजद किया गया था। इसमें से 12 को पुलिस ने काबू कर लिया था लेकिन एक आरोपी सुरिंदर सिंह फरार था। उसे भगौड़ा करार दिया हुआ था। वह अब पकड़ा गया है।
18 अक्तूबर 2015 को गांव घव्वदी कलां स्थित गुरुद्वारा रविदासपुरा साहिब में श्री गुरु ग्रंथ साहिब के स्वरूप फाड़ने का मामला सामने आया था। बाद में पता चला कि गांव घव्वदी की रहने वाली सेवादार बलविंदर कौर ने ही स्वरूप फाड़े थे। पहले बलविंदर कौर का बड़ा बेटा रणजीत सिंह, गुरुद्वारा साहिब का प्रधान था। वह मौजूदा प्रधान को इस मामले में फंसाकर अपने बेटे रणजीत सिंह को दोबारा प्रधान बनाना चाहती थी। पुलिस जांच में सारा मामला खुल गया था। पुलिस ने आरोपी बलविंदर कौर को गिरफ्तार कर लिया था। इसके बाद पुलिस ने उसे जेल भेज दिया था। तीन महीने बाद बलविंदर कौर को अदालत से जमानत मिल गई थी। जमानत मिलने के बाद वह अपने गांव नहीं लौट सकी क्योंकि, गांव वालों ने उसके रहने पर पाबंदी लगा दी थी। इसलिए वह कभी अपनी बेटी के साथ रहती और कभी अपने किसी अन्य रिश्तेदारों के साथ रहती थी। 25 जुलाई 2016 को बलविंदर कौर को एक कॉल आई थी। कॉल करने वाले ने कहा था कि उसे फिर से गांव में रहने की इजाजत दी जाएगी। वह सुबह आलमगीर साहिब आकर उनसे मिल लें।
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दोबारा गांव में बसने की चाह में 26 जुलाई 2016 को बलविंदर कौर गांव आलमगीर स्थित गुरुद्वारा श्री मंजी साहिब के बाहर पहुंच गई थी। उसके साथ उसका छोटा बेटा रणजोत सिंह भी था। इसी दौरान दो युवक बाइक पर आए और बलविंदर कौर की गोली मारकर हत्या कर दी। युवक रणजोत को भी मारना चाहते थे, मगर ट्रिगर जाम होने से वे सफल नहीं हो पाए।
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पुलिस ने आरोपी सुरिंदर सिंह को बस स्टैंड से काबू किया था। बाद में पता चला कि उस पर थाना डेहलों में हत्या का मामला दर्ज है। इसलिए आरोपी को थाना डेहलों की पुलिस के हवाले कर दिया गया है।
-गुरशरणदीप सिंह, एसएसपी (खन्ना)
क्या कहते हैं थाना प्रभारी
थाना डेहलों के एसएचओ धर्मबीर ने बताया कि बलविंदर कौर की हत्या में दो युवकों पर हत्या, साजिश और आर्म्स एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया था। फिर जांच में 11 और लोगों को नामजद किया गया था। इसमें से 12 को पुलिस ने काबू कर लिया था लेकिन एक आरोपी सुरिंदर सिंह फरार था। उसे भगौड़ा करार दिया हुआ था। वह अब पकड़ा गया है।