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एसबीआई गोल्ड लोन घोटाले की जांच के लिए पुलिस की विशेष टीम गठित
Updated Fri, 13 Apr 2018 10:04 PM IST
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गोल्ड लोन घोटाले की जांच को विशेष टीम
स्टेट बैंक ऑफ इंडिया शाखा की खंगाली जा रही सीसीटीवी फुटेज
अमर उजाला ब्यूरो
होशियारपुर।
स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की बुल्लोवाल शाखा में हुए गोल्ड लोन घोटाले की जांच के लिए पुलिस ने विशेष टीम का गठन किया है। जांच के दौरान स्टेट बैंक ऑफ इंडिया शाखा की सीसीटीवी फुटेज खंगाली जा रही है।
मामले का खुलासा करने वाले व्हिसल ब्लोअर आरटीआई अवेयरनेसस फोरम पंजाब के चेयरमैन राजीव वशिष्ट के मुताबिक एक और बात जो प्रारंभिक तौर पर सामने आई है कि घोटाले में ठगी का शिकार हुए लोगों में से अधिकतर ने तो अपना कोई सोना गिरवी रखा ही नहीं था। बल्कि वह तो फाइनेंसर के पास अपनी निजी जरूरतों के लिए छोटे-मोटे कर्ज लेने पहुंचे थे, जिसने उन्हें यह आश्वासन दिया कि वह बैंक से अपना सोना रखकर लोन ले लेगा और उसी से वह उनको पैसे दे देगा। गारंटी के तौर पर उन्हें उक्त गोल्ड लोन का कर्जदार बनना होगा। इस तरह लोगों ने निधड़क होकर बैंक से लोन भी लिए और अपनी जरूरत के कुछ हजार रुपये लेने के बाद लोन की बाकी रकम बिना किसी शक फाइनेंसर को थमा दी। मामले में रिजर्व बैंक की गाइडलाइन के अनुसार शाखा के हेड कैशियर और अकाउंटेंट पर भी गाज गिरनी तय मानी जा रही है। फिलहाल दोनों को भी बुल्लोवालशाखा से तबादला कर दिया गया है।
सूत्रों के मुताबिक मामले जांच के ौरान बैंक की पिछली छह माह की सीसीटीवी फुटेज भी खंगाली जा रही है। फुटेज में करीब 50 कर्जदारों के लोन लेते वक्त उनके वहां रहने की पुष्टि करती है। एसएसपी जे इलांचेझियन ने बताया कि उन्होंने मामले की जांच के लिए एसपी हेडक्वार्टर के नेतृत्व में टीम का गठन किया है। टीम में डीएसपीडी और एस एच ओ बुल्लोवाल सदस्य हैं। उन्होंने बताया कि यह टीम गोल्ड लोन घोटाले से जुड़ी सभी शिकायतों को ध्यान में रखकर जांच करेगी। उन्होंने बताया कि जांच टीम का दायरा कर्जदारों के खिलाफ मैनेजर की ओर से की गई शिकायत और बैंक मैनेजर सुनार और फाइनेंसर के खिलाफ की गई कर्जदारों की शिकायत के साथ-साथ मामले से जुड़े अन्य तथ्यों पर भी आधारित रहेगा।
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स्टेट बैंक ऑफ इंडिया शाखा की खंगाली जा रही सीसीटीवी फुटेज
अमर उजाला ब्यूरो
होशियारपुर।
स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की बुल्लोवाल शाखा में हुए गोल्ड लोन घोटाले की जांच के लिए पुलिस ने विशेष टीम का गठन किया है। जांच के दौरान स्टेट बैंक ऑफ इंडिया शाखा की सीसीटीवी फुटेज खंगाली जा रही है।
मामले का खुलासा करने वाले व्हिसल ब्लोअर आरटीआई अवेयरनेसस फोरम पंजाब के चेयरमैन राजीव वशिष्ट के मुताबिक एक और बात जो प्रारंभिक तौर पर सामने आई है कि घोटाले में ठगी का शिकार हुए लोगों में से अधिकतर ने तो अपना कोई सोना गिरवी रखा ही नहीं था। बल्कि वह तो फाइनेंसर के पास अपनी निजी जरूरतों के लिए छोटे-मोटे कर्ज लेने पहुंचे थे, जिसने उन्हें यह आश्वासन दिया कि वह बैंक से अपना सोना रखकर लोन ले लेगा और उसी से वह उनको पैसे दे देगा। गारंटी के तौर पर उन्हें उक्त गोल्ड लोन का कर्जदार बनना होगा। इस तरह लोगों ने निधड़क होकर बैंक से लोन भी लिए और अपनी जरूरत के कुछ हजार रुपये लेने के बाद लोन की बाकी रकम बिना किसी शक फाइनेंसर को थमा दी। मामले में रिजर्व बैंक की गाइडलाइन के अनुसार शाखा के हेड कैशियर और अकाउंटेंट पर भी गाज गिरनी तय मानी जा रही है। फिलहाल दोनों को भी बुल्लोवालशाखा से तबादला कर दिया गया है।
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सूत्रों के मुताबिक मामले जांच के ौरान बैंक की पिछली छह माह की सीसीटीवी फुटेज भी खंगाली जा रही है। फुटेज में करीब 50 कर्जदारों के लोन लेते वक्त उनके वहां रहने की पुष्टि करती है। एसएसपी जे इलांचेझियन ने बताया कि उन्होंने मामले की जांच के लिए एसपी हेडक्वार्टर के नेतृत्व में टीम का गठन किया है। टीम में डीएसपीडी और एस एच ओ बुल्लोवाल सदस्य हैं। उन्होंने बताया कि यह टीम गोल्ड लोन घोटाले से जुड़ी सभी शिकायतों को ध्यान में रखकर जांच करेगी। उन्होंने बताया कि जांच टीम का दायरा कर्जदारों के खिलाफ मैनेजर की ओर से की गई शिकायत और बैंक मैनेजर सुनार और फाइनेंसर के खिलाफ की गई कर्जदारों की शिकायत के साथ-साथ मामले से जुड़े अन्य तथ्यों पर भी आधारित रहेगा।
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