फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Chandigarh ›   Panchkula News ›   Courts should know the history of the accused before sentencing in check bounce cases: High Court

चेक बाउंस के मामलों में सजा सुनाने से पहले आरोपी का इतिहास जाने अदालतें: हाईकोर्ट

Tue, 23 Jul 2024 05:33 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Tue, 23 Jul 2024 05:33 AM IST
विज्ञापन
Courts should know the history of the accused before sentencing in check bounce cases: High Court
चंडीगढ़। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने अधीनस्थ सभी अदालतों को आदेश दिया है कि चेक बाउंस मामलों में दोषी करार दिए जाने के बाद के सजा सुनाने से पहले आरोपी का इतिहास जान लें। यदि कैदी पहले से जेल में है तो सुनाई जाने वाली सजा पहले से चल रही सजा के साथ चलेगी या इसके समाप्त होने के बाद शुरू होगी इस पर विवेक के अनुरूप निर्णय लिया जाए। याचिका दाखिल करते हुए चंडीगढ़ निवासी मनोज जैन ने हाईकोर्ट को बताया कि चेक बाउंस के 10 मामलों में उसे विभिन्न अवधि की सजा सुनाई गई है। 3 मामलों को छोड़कर सजा साथ में चलेगी या नहीं यह जिक्र नहीं किया गया है। ऐसे में आदेश में स्पष्ट जिक्र न होने के चलते उसे कुल 12 साल की सजा काटनी होगी। याची ने अपील की कि इन सभी सजाओं को एक साथ गिनने का निर्देश दिया जाए।
विज्ञापन

हाईकोर्ट ने सोमवार को अपना फैसला सुनाते हुए कहा कि याची के खिलाफ किसी एक मामले से जुड़ी अलग-अलग शिकायत नहीं हैं, बल्कि यह सब अलग मामले हैं और शिकायतकर्ता भी अलग हैं। ऐसे में याची की सजा को समानांतर करने का आदेश जारी नहीं किया जा सकता। याचिका को खारिज करते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि इस मामले ने हमारा ध्यान अहम मुद्दे की तरफ खींचा है।
विज्ञापन

चेक बाउंस के मामले में ट्रायल के दौरान आपराधिक इतिहास को रिकॉर्ड पर लाने का प्रावधान नहीं है। ऐसा इसलिए होता है कि न्याय अधिकारी कहीं इससे प्रभावित न हो जाए। इस मामले में भी सजा सुनाने वाली अदालतों के संज्ञान में अन्य मामलों में मिली सजा को नहीं लाया गया जिसके चलते अलग-अलग सजा गिनने की स्थिति बन गई। ऐसे में अब सभी अधीनस्थ अदालतों को आदेश दिया जाता है कि चेक बाउंस मामले में दोषी करार दिए जाने के बाद और सजा सुनाने से पहले व्यक्ति का आपराधिक इतिहास को अदालत के समक्ष रखा जाए ताकि सजा समानांतर चलेगी या अलग-अलग इस पर निर्णय लिया जा सके।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed