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सरकार को आरक्षण प्रदान करने का आदेश नहीं दे सकती अदालत, यह नीतिगत फैसला: हाईकोर्ट

Wed, 21 Aug 2024 04:55 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Wed, 21 Aug 2024 04:55 AM IST
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Court cannot order the government to provide reservation, this is a policy decision: High Court
चंडीगढ़। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने आरक्षण की मांग को लेकर दाखिल याचिका पर यह स्पष्ट कर दिया है कि कोर्ट किसी विशेष वर्ग या श्रेणी के नागरिकों को आरक्षण देने के लिए राज्य को निर्देश जारी नहीं कर सकता, क्योंकि यह नीतिगत निर्णय होता है। ऐसा आदेश तभी जारी किया जा सकता है, जब याचिका में कोई कानूनी अधिकार हो और सरकार ने उसका उल्लंघन किया हो। जहां मौजूदा आरक्षण नीति के अनुसरण में जारी किए गए सरकारी आदेश द्वारा कानूनी अधिकार का उल्लंघन किया जाता है, वहां आदेश जारी हो सकता है। चंडीगढ़ निवासी व्योम यादव ने याचिका दाखिल करते हुए पंजाब विश्वविद्यालय के यूनिवर्सिटी इंस्टीट्यूट आफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (यूआईईटी) और चंडीगढ़ कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (सीसीईटी) को सत्र 2023-24 और 2024-25 के लिए अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) श्रेणी के छात्रों को आरक्षण प्रदान करके केंद्रीय शिक्षा संस्थान (आरक्षण और प्रवेश) अधिनियम, 2006 (सीईआई अधिनियम) लागू करने का निर्देश देने की मांग की थी।
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याचिकाकर्ता ने बताया कि वह ओबीसी श्रेणी से संबंधित है और जेईई मेन्स में प्राप्त ओबीसी रैंक के आधार पर इंजीनियरिंग में प्रवेश चाहता है। गत वर्ष जब उसने सिंगल बेंच के समक्ष याचिका दाखिल की थी तो जुलाई 2023 में उसकी याचिका का निपटारा करते हुए हाईकोर्ट ने उसे विश्वविद्यालय को मांग पत्र देने का निर्देश दिया था। पीयू ने उसके मांग पत्र पर विचार करने के बाद उसे खारिज कर दिया।
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पीयू ने अपने आदेश में कहा था कि यूआईईटी और सीसीईटी में ओबीसी श्रेणी के तहत आरक्षण का कोई प्रावधान नहीं है। इसके बाद याची ने खंडपीठ के समक्ष अपील दाखिल की थी। सभी पक्षों को सुनने के बाद हाईकोर्ट ने पाया कि पीयू, यूआईईटी व सीसीईटी असल में सीईआई अधिनियम, 2006 की धारा 2 (डी) के तहत परिभाषित केंद्रीय शैक्षणिक संस्थान शब्द के दायरे में नहीं आते हैं। हाईकोर्ट ने कहा कि जब यह संस्थान परिभाषा में आते ही नहीं हैं जो इसके तहत लागू होने वाला आरक्षण उन पर थोपा नहीं जा सकता। प्रशासन और पीयू ओबीसी श्रेणी के लिए आरक्षण प्रदान नहीं करते हैं, यह नीतिगत निर्णय का मामला है और याचिकाकर्ता को इस तरह के आरक्षण प्रदान करने के लिए आदेश जारी करने की मांग करने का कोई अधिकार नहीं देता है। इन टिप्पणियों के साथ ही हाईकोर्ट ने अपील खारिज कर दी।
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