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हरियाणा : फार्मेसी एक्ट को दरकिनार कर अदलखा ने पंजीकरण प्रक्रिया पर जमा लिया था कब्जा

Tue, 12 Jul 2022 02:06 AM IST
Panchkula Bureau पंचकुला ब्‍यूरो
Updated Tue, 12 Jul 2022 02:06 AM IST
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corrruption in haryana state pharmacy council.
चंडीगढ़। हरियाणा राज्य फार्मेसी काउंसिल में भ्रष्टाचार के खुलासे के बाद अब अब प्रधान रहे धनेश अदलखा को लेकर कुछ और चौंकाने वाले मामले सामने आ रहे हैं। राजनेताओं के साथ-साथ उनकी विभागीय अफसरशाही में भी गहरी पैठ थी। इसी दम पर अदलखा ने काउंसिल के नियमों को दरकिनार पंजीकरण प्रक्रिया पर कब्जा जमा लिया था। नियमों के मुताबिक पंजीकरण का कार्य केवल रजिस्ट्रार के पास है, लेकिन अदलखा की मर्जी के बिना किसी का पंजीकरण नहीं होता था। खास बात ये है कि तमाम शिकायतों के बावजूद विभागीय अधिकारियों ने कभी अदलखा पर कार्रवाई तो दूर की बात है इस पर कभी जांच तक नहीं बैठाई।
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पूर्व रजिस्ट्रार डॉ. परविंद्रजीत सिंह ने 12 जुलाई 2021 को एक आफिस ऑर्डर निकाला था कि सभी पेंडिंग फाइलों को निकाला जाए। आदेश में स्पष्ट लिखा था कि हरियाणा के अलावा दूसरे राज्यों से स्कूलिंग, डिप्लोमा, डिग्री करने वालों की फाइलें निकाल कर प्रोसेस की जाएं। यदि बाहरी राज्यों की फाइलें दबाने की कोशिश की गई, तो संबंधित कर्मचारी के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई होगी। इसके अगले ही दिन धनेश अदलखा ने 13 जुलाई को नए आदेश जारी कर डॉ. परविंद्रजीत सिंह के आदेशों पर रोक लगाने लगा दी थी। साथ ही ये भी आदेश जारी किए थे कि उनकी इजाजत के बिना कोई रजिस्ट्रेशन और नवीनीकरण नहीं होगा। इतना ही नहीं इसके कुछ ही दिन बाद डॉ. सिंह से ही यह चार्ज वापस ले लिया गया था। काउंसिल के पूर्व प्रधान केसी गोयल ने अदलखा के इन आदेशों की कॉपी मुख्यमंत्री मनोहर लाल और स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज को भेजकर कार्रवाई की मांग की है।
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एक्ट को दरकिनार कर प्रधान ने ली थी पावर
फार्मेसी एक्ट के नियम 33 (4) में रजिस्ट्रेशन की पावर केवल काउंसिल रजिस्ट्रार के पास है। प्रधान, उपप्रधान और पूरी काउंसिल में कोई अन्य रजिस्ट्रेशन नहीं करता और कोई दखल नहीं दे सकता। लेकिन धनेश अदलखा ने फार्मेसी एक्ट की धज्जियां उड़ाते हुए फार्मेसी एक्ट 35 (।) और (।।) के तहत 13 जुलाई को आदेश जारी कर दिए कि उनकी स्वीकृति के बिना कोई भी रजिस्ट्रेशन और नवीनीकरण नहीं होगा। इस नियम का मतलब काउंसिल की बैठकों में जो भी प्रस्ताव पास करते हैं, उस पर प्रधान जो भी निर्णय लेगा, वह फाइनल है। बैठक में जो एजेंडा आया और उसमें कोई विवाद हो गया, तो प्रधान के पास दो वोट होती है और फाइनल निर्णय ले सकता है। रजिस्ट्रेशन के मामले में प्रधान की कोई दखलअंदाजी नहीं होगी। बावजूद इसके नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए धनेश अदलखा ने स्टेट फार्मेसी रुल्स 1951 के 35 (1) (2) के तहत नई रजिस्ट्रेशन और नवीनीकरण उनकी इजाजत के बिना जारी नहीं होगी।
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नेताओं और अधिकारियों की शह पर अदलखा को बचाने की कोशिश : गोयल
काउंसिल के पूर्व प्रधान केसी गोयल ने आरोप लगाया कि अदलखा समेत अन्य ने मिलकर हजारों फाइलों के नाम पर रिश्वत ली है। आज यही कारण है कि राजनेता और अधिकारी उसको बचाने की कोशिश कर रहे हैं। गोयल ने आरोप लगाया कि नेताओं की शह पर ही आज तक न तो अदलखा की गिरफ्तारी हुई है और न ही स्वास्थ्य मंत्री विज के आदेश के बाद अदलखा के निलंबन के आदेश जारी किए गए हैं। गोयल से सीएम से मांग की है कि इस पूरे मामले की निष्पक्षता के साथ जांच कराए जाए, ताकि पंजीकरण कराने वालों को परेशानी न हो और आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई हो सके।
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