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शहर को कूड़े के पहाड़ से निजात दिलाने में निगम नाकाम, विदेशी तकनीकें आ सकती हैं काम: हाईकोर्ट
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चंडीगढ़। डड्डूमाजरा डंपिंग ग्राउंड में कूड़े के पहाड़ की समस्या का इतने वर्ष बीत जाने पर भी समाधान निकालने में नगर निगम के विफल रहने पर अब पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने विदेशी उन्नत तकनीकों को अपनाने पर विचार करने का आदेश दिया है। वीरवार को सुनवाई के दौरान यूटी प्रशासन ने कचरे के प्रबंधन के लिए किए अनुबंध हाईकोर्ट में पेश किए और हाईकोर्ट ने इन्हें याची को सौंपते हुए इनका अध्ययन कर सुझाव सौंपने का आदेश दिया है। 2016 में दीप्ति सिंह तो वहीं 2021 में एडवोकेट अमित शर्मा ने जनहित याचिका दाखिल करते हुए डड्डूमाजरा में कूड़े के पहाड़ के कारण आसपास के लोगों को होने वाली परेशानी का मुद्दा उठाया था। हाईकोर्ट लगातार इस मामले को लेकर सुनवाई करता आ रहा था। कोर्ट ने जुलाई में नगर निगम की एक्शन टेकन रिपोर्ट पर सवालिया निशान लगा दिया था और कूड़े के निपटान के बारे में झूठ बोलने पर निगम अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की थी।
शर्मा ने बताया था कि डंपिंग ग्राउंड के चारों तरफ एक दीवार बनाई गई थी, जबकि निर्माण के एक साल के भीतर इसका एक महत्वपूर्ण हिस्सा ढह गया था और दूषित पानी आबादी की ओर बह रहा था। एमसी के वकील ने इस आरोप का विरोध करते हुए कहा कि उनका काम योजना के मुताबिक चल रहा है और उन्होंने एक नए अनुबंध पर हस्ताक्षर किए हैं। एमसी ने दावा किया कि कूड़े के तीन ढेर में से एक को साफ कर दिया गया है। शर्मा ने कहा कि यह सब आंखों में धूल झोंकने का प्रयास है क्योंकि कचरे को केवल मिट्टी की एक परत से ढक दिया गया है।
सुनवाई के दौरान वीरवार को नगर निगम ने याची अमित शर्मा की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा कि याचिका दाखिल करने का उद्देश्य जनहित नहीं कुछ और ही है। याची किसी एक अफसर से रंजिश के चलते यह सब कर रहा है। याची ने निगम के इन सभी आरोपों को नकार दिया। याची ने कहा कि 2021 से 2023 के बीच कूड़े के ढेर की संख्या एक से बढ़कर तीन हो गई है। कचरा प्रसंस्करण 2020 में जहां 13 प्रतिशत था वहीं 2022 में यह केवल 10 प्रतिशत रह गया है। निगम इन समस्याओं का समाधान निकाल दे तो वह याचिका वापस लेने को तैयार हैं। हाईकोर्ट ने अब याची को आदेश दिया है कि नगर निगम ने कचरा प्रबंधन को लेकर जो अनुबंध किए हैं उनका अध्ययन किया जाए और हाईकोर्ट में इसके निपटारे को लेकर सुझाव सौंपे।
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इंदौर से सीखें सबकः हाईकोर्ट
सुनवाई के दौरान याची अमित शर्मा ने बताया कि इंदौर में वहां के नगर निगम ने 13 मीट्रिक टन कचरा 6 माह में केवल 10 करोड़ रुपये खर्च कर निपटा दिया है। चंडीगढ़ नगर निगम की योजना 40 करोड़ की है और एक दशक का समय इसके लिए बताया जा रहा है। हाईकोर्ट ने कहा कि निगम को न केवल इंदौर के मामले का अध्ययन करना चाहिए बल्कि विदेशी तकनीकों के इस्तेमाल पर भी विचार करना चाहिए।
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शर्मा ने बताया था कि डंपिंग ग्राउंड के चारों तरफ एक दीवार बनाई गई थी, जबकि निर्माण के एक साल के भीतर इसका एक महत्वपूर्ण हिस्सा ढह गया था और दूषित पानी आबादी की ओर बह रहा था। एमसी के वकील ने इस आरोप का विरोध करते हुए कहा कि उनका काम योजना के मुताबिक चल रहा है और उन्होंने एक नए अनुबंध पर हस्ताक्षर किए हैं। एमसी ने दावा किया कि कूड़े के तीन ढेर में से एक को साफ कर दिया गया है। शर्मा ने कहा कि यह सब आंखों में धूल झोंकने का प्रयास है क्योंकि कचरे को केवल मिट्टी की एक परत से ढक दिया गया है।
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सुनवाई के दौरान वीरवार को नगर निगम ने याची अमित शर्मा की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा कि याचिका दाखिल करने का उद्देश्य जनहित नहीं कुछ और ही है। याची किसी एक अफसर से रंजिश के चलते यह सब कर रहा है। याची ने निगम के इन सभी आरोपों को नकार दिया। याची ने कहा कि 2021 से 2023 के बीच कूड़े के ढेर की संख्या एक से बढ़कर तीन हो गई है। कचरा प्रसंस्करण 2020 में जहां 13 प्रतिशत था वहीं 2022 में यह केवल 10 प्रतिशत रह गया है। निगम इन समस्याओं का समाधान निकाल दे तो वह याचिका वापस लेने को तैयार हैं। हाईकोर्ट ने अब याची को आदेश दिया है कि नगर निगम ने कचरा प्रबंधन को लेकर जो अनुबंध किए हैं उनका अध्ययन किया जाए और हाईकोर्ट में इसके निपटारे को लेकर सुझाव सौंपे।
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इंदौर से सीखें सबकः हाईकोर्ट
सुनवाई के दौरान याची अमित शर्मा ने बताया कि इंदौर में वहां के नगर निगम ने 13 मीट्रिक टन कचरा 6 माह में केवल 10 करोड़ रुपये खर्च कर निपटा दिया है। चंडीगढ़ नगर निगम की योजना 40 करोड़ की है और एक दशक का समय इसके लिए बताया जा रहा है। हाईकोर्ट ने कहा कि निगम को न केवल इंदौर के मामले का अध्ययन करना चाहिए बल्कि विदेशी तकनीकों के इस्तेमाल पर भी विचार करना चाहिए।