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Panchkula News: नाबालिग से यौन अपराध का दोषी 20 साल रहेगा सलाखों के पीछे

Wed, 03 Sep 2025 02:21 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Wed, 03 Sep 2025 02:21 AM IST
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Convicted of sexual offence against a minor will remain behind bars for 20 years
पंचकूला। नाबालिग से यौन अपराध के मामले में अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश बिक्रमजीत अरोड़ा की अदालत ने दोषी देशराज (25) को 20 साल की सजा सुनाते हुए पचास हजार का जुर्माना लगाया है। घटना के समय आरोपी देशराज 19 साल का था। उसे 12 अक्बतूर 2020 को पुलिस ने गिरफ्तार किया था। उसके खिलाफ भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 306 (आत्महत्या के लिए उकसाना) और पॉक्सो अधिनियम की धारा 6 (गंभीर भेदक यौन हमला) के तहत आरोप लगाए गए थे। अभियोजन पक्ष की ओर से लोक अभियोजक डिप्टी डिस्ट्रिक्ट अटॉर्नी सुखविंदर कौर ने मुकदमे के दौरान आरोपी के अपराध को साबित किया।
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पुलिस के अनुसार घटना के समय देशराज सेक्टर-12ए के रैली गांव में रह रहा था। वह मूल रूप से उत्तर प्रदेश का रहने वाला है। मामले की जांच सब-इंस्पेक्टर रीता वालिया ने की थी, जो उस समय महिला पुलिस स्टेशन में तैनात थीं।
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तीन पन्नों का मिला था सुसाइड नोट

मैं जानती हूं जो मैंने किया, वह गलत था। शायद आप मुझे कभी माफ नहीं कर पाएंगे। लेकिन देशराज ने कसम खाई थी कि वह मुझे कभी नहीं छोड़ेगा। मैंने उस पर भरोसा कर सबसे बड़ी गलती की। मैं डरती थी कि अगर मैं उसे छोड़ दूं तो वह सबको हमारे बारे में बता देगा। पढ़ाई पर ध्यान नहीं लग रहा था और नींद भी नहीं आती थी। मैं चाहती हूं कि वह और किसी लड़की की जिंदगी बर्बाद न करे। नाबालिग ने यह भी लिखा था कि देशराज ने उसे गर्भपात की पांच गोलियां दी थीं, जिनमें से तीन उसने खा ली थीं। यह विवरण पूरे मामले को और भी भयावह बना देता है।
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पॉक्सो और आत्महत्या के लिए उकसाने का केस दर्ज



घटना के बाद पीड़िता के परिजनों की शिकायत पर पुलिस ने कार्रवाई करते हुए देशराज के खिलाफ पॉक्सो एक्ट की धारा 4 (नाबालिग से दुष्कर्म) और आईपीसी की धारा 306 (आत्महत्या के लिए उकसाना) के तहत मामला दर्ज किया। जांच अधिकारी रीटा वालिया ने बताया कि जांच के दौरान गवाहों के बयान, मेडिकल रिपोर्ट और अन्य साक्ष्यों को मजबूत तरीके से अदालत के समक्ष पेश किया गया।
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